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उदयपुर। प्रदेशभर में आज शीतलाष्टमी पर्व पर कई तरह के धार्मिक आयोजन किए जा रहे हैं। अधिकतर हिस्सों में सुबह शीतला माता को बासी भोजन का भोग लगाकर पूजा की गई। उदयपुर में भी महिलाओं ने विधिवत रूप से माताजी का पूजन किया। धरों में ठंडा भोजन खाया गया। जयपुर के चाकसू में शीतलाष्टमी का लक्खी मेला भरा है। बड़ी संख्या में महिलाएं इस मेले में पहुंच रही हैं। वहीं भीलवाड़ा में इस मौके पर जिंदा व्यक्ति की अंतिम यात्रा निकाली गई है। इसमें पूरा शहर शामिल हुआ। लोग सड़कों पर गुलाल खेलते नजर आ रहे हैं। भीलवाड़ा में मुख्य होली शीतलाष्टमी के दिन ही खेली जाती है। भीलवाड़ा में शीतलाष्टमी पर बड़े मंदिर से ढोल नगाड़ों के साथ लोग झंडा लेकर निकले और चित्तौड़वालों की हवेली यहां पर एक घंटे तक होली खेली गई। इसके बाद डोल महोत्सव (अंतिम यात्रा) शुरू किया गया। इसमें लोगों ने विलाप करने का नाटक किया। इस दौरान खूब हंसी-ठिठोली हुई। अंतिम संस्कार के वक्त खाली डोल (अर्थी) को जला दिया गया। यह परंपरा भीलवाड़ा में 425 साल से चली आ रही है। जोधपुर में नागौरी गेट पर कागा की पहाड़ियों स्थित शीतला माता मंदिर में सुबह से श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। मंदिर को प्लास्टिक मुक्त रखा गया है। पूजा के लिए आज 35 पुजारियों की टीम लगाई गई है।
शीतला सप्तमी पर किया माताजी का पूजन, खाया ठंडा भोजन

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