उदयपुर। विश्व ध्यान दिवस के अवसर पर कृष्ण क्रीडांगन, आलोक संस्थान सेक्टर-11 में अखिल भारतीय नववर्ष समारोह समिति और आलोक संस्थान द्वारा विश्व ध्यान दिवस का आयोजन किया गया। मुख्य वक्ता आलोक संस्थान के निदेशक डॉ. प्रदीप कुमावत थे।
इस अवसर पर बोलते हुए डॉ. प्रदीप कुमावत ने कहा कि हमारी सारी चेतना को एकाग्रचित करने का कोई साधन हो सकता है तो वह ध्यान है। वर्तमान में जिस तरह की शेली है, प्रत्येक व्यक्ति तनाव से ग्रस्त है तो ऐसे में ध्यान की महता और भी बढ़ जाती है जब सामूहिक रूप से ध्यान को किया जाता है तो अपनी ऊर्जा को, अपने तनाव को रूपान्तरित कर सकारात्मक रूप में बदलने का यदि कोई सबसे सषक्त माध्यम हो सकता है तो वह ध्यान है। बचपन से ही बच्चों को ध्यान का अभ्यास कराया जाना चाहिए जिससे आगामी जीवन की चुनौतियों का सामना प्रभावी ढंग से कर सके।
उन्होंने कहा कि इसलिये आलोक संस्थान पिछले सतावन वर्षों से इस प्रयोग को नियमित रूप् से कर रहा है और प्रत्येक बुधवार को आमजन के लिये अखिल भारतीय नववर्ष समारोह समिति के साथ मिलकर ध्यान और संस्कार ध्यान सभा का आयोजन करता रहा है।
इस अवसर पर उन्होंने बोलते हुए कहा कि हमारे जो सात चक्र है मूलाधान से लेकर सहस्त्राचार तक जो चक्र है उनको यदि जाग्रत करने का यदि कोई सशक्त माध्यम है तो वह ध्यान है।
डॉ. कुमावत ने मूलाधार चक्र, स्वाधिश्ठान चक्र, मणिपुर चक्र, अनाहत चक्र, विशुद्ध चक्र, आज्ञा चक्र, सहस्त्रार चक्र सभी पर व्याख्या देते हुए विशेष विवेचना की।
डॉ. कुमावत ने सभी आगन्तुक और बच्चों को ध्यान कराया।
इस अवसर पर आलोक स्कूल हिरण मगरी प्राचार्य शशांक टाँक, एसोसिएट एडमिनिस्ट्रेटर प्रतीक कुमावत उपस्थित थे!
वर्तमान परिस्थितियों में ध्यान ही तनाव मुक्ति का सर्वोतम साधन : डॉ. प्रदीप कुमावत

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