उदयपुर, 1 दिसंबर, झील संरक्षण कार्यकर्ताओं ने रूपसागर सहित उदयपुर के समस्त छोटे तालाबों में भराव भर की जा रही आवासीय, व्यावसायिक गतिविधियों को कतिपय सरकारी अधिकारियों तथा भूमाफिया की मिलीभगत बताया है। रविवार को हुए झील संवाद में कार्यकर्ताओं ने कहा कि छोटे तालाबों में निर्माण उच्च न्यायालय की खुले आम अवमानना तथा राज्य सरकार के निर्देशों का उल्लंघन है।
संवाद में डॉ अनिल मेहता ने कहा कि छोटे तालाबों की उदयपुर के जल स्थायित्व में बड़ी भूमिका है। पुरखों व प्रकृति की इस विरासत पर किसी भी प्रकार का कुठाराघात एक गंभीर अपराध है।
मेहता ने कहा कि राजस्थान उच्च न्यायालय ने डॉ तेज राज़दान व अन्य बनाम राज्य सरकार वाद में वर्ष 2007
छोटे तालाबो के संरक्षण के लिए आदेश पारित कर रखा है। अब्दुल रहमान बनाम राज्य सरकार सहित अन्य कई याचिकाओं के तहत उच्च न्यायालय ने जलाशयों व उनके जलग्रहण क्षेत्रों को अतिक्रमण व अवरोधों से मुक्त रखने के निर्देश दिए हुए है। राजस्व विभाग के शासन सचिव( राजस्व ग्रुप सात ) ने समस्त जिला कलेक्टर को पत्र क्रमांक प 3 (146) राज -7/2011, 11 मई 2018 जारी कर जलस्रोतों के संरक्षण के निर्देश दिए हुए है । लेकिन धरातल पर हर आदेश की खुलेआम अवेहलना हो रही है।
झील विकास प्राधिकरण के पूर्व सदस्य तेज शंकर पालीवाल ने कहा कि वर्ष 2019 में तत्कालीन जिला कलेक्टर आनंदी द्वारा छोटे तालाबो की स्थिति का आंकलन करने के लिए तहसीलदार गिरवा के संयोजकत्व में एक कमिटी बनाई गई थी। इस कमिटी ने दौरा कर समस्त तथ्य जुटा वस्तुस्थिति रिपोर्ट तत्कालीन कलेक्टर को प्रस्तुत की थी । जिला कलेक्टर को इस रिपोर्ट को तलब कर यह जानकारी करनी चाहिए कि रिपोर्ट आने के बाद भी तालाबों से अतिक्रमण क्यों नहीं हटे, तथा अभी भी अतिक्रमण कौन व कैसे करवा रहा है।
गांधी मानव कल्याण समिति के निदेशक नंद किशोर शर्मा ने कहा कि रूंडेला , मंडोपा, फूटा, नैला, जोगी , डागलीयों की मगरी, तीतरडा सहित समस्त छोटे तालाबो को पुन: उनके मूल स्वरूप में लौटाना तथा उनके जलग्रहण क्षेत्रों को सुरक्षित रखना प्रशासन की विधिक व प्रशासनिक जिम्मेदारी है। लेकिन, अफसोस है कि इस जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं किया जा रहा है।
युवा पर्यावरणविद कुशल रावल ने कहा कि छोटे तालाब उदयपुर के भूजल स्तर को बनाये रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है। ये बाढ़ के समय अतिरिक्त पानी को रोक कर जानमाल की रक्षा करते है। इनका नष्ट होना उदयपुर में भूमिगत जल की कमी व बाढ़, दोनों आपदाएं लाएंगे। बैंगलोर तथा चेन्नई की तरह उदयपुर में भी जल प्लावन व शून्य जल जैसी विकट स्थितियां बनेंगी।
वरिष्ठ नागरिक द्रुपद सिंह सहित उपस्थित जागरूक नागरिकों ने रूप सागर सहित सभी छोटे तालाबों की अधिकतम भरावतल सीमा का सीमांकन करने व इस सीमा के भीतर हुए समस्त निर्माण हटाने की मांग रखी।
संवाद से पूर्व झील स्वच्छता श्रमदान का आयोजन हुआ जिसमे झील सतह से कचरे को हटाया गया।
रूप सागर व अन्य समस्त छोटे तालाबों में अतिक्रमण न्यायालय की अवमानना , सरकारी निर्देशों का उल्लंघन

Advertisements
