24 न्यूज अपडेट उदयपुर। उदयपुर शहर के सेक्टर 13 स्थित फूटा तालाब में एक बार फिर नया निर्माण कार्य शुरू हो गया है। यह वही क्षेत्र है जहाँ कुछ दिन पहले उदयपुर विकास प्राधिकरण ने कुछ पक्के निर्माणों को अवैध करार देते हुए तोड़ा था। लेकिन प्रशासन की सख्ती की कमी और निरीक्षण की उदासीनता व अधिकारियों व कर्मचारियों की सेंटिंग-मिलभगत से नए अवैध निर्माणों को एक बार फिर जन्म दे दिया है।
कोर्ट के आदेशों की अवहेलना
राजस्थान उच्च न्यायालय, जोधपुर द्वारा तालाबों की पालना एवं संरक्षण को लेकर पारित आदेश स्पष्ट रूप से तालाब क्षेत्र में किसी भी प्रकार के निर्माण पर रोक लगाता है। बावजूद इसके, फूटा तालाब में प्रति दिन कोई न कोई नया निर्माण शुरू होता दिखाई दे रहा है, जिससे न केवल पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ रहा है बल्कि न्यायालय की अवमानना भी हो रही है।
रसूखदारों की दबंगई
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, कुछ प्रभावशाली व्यक्तियों ने तालाब की पाल को तोड़कर लगभग 200 मीटर तक मलबा और भराव डालकर कच्ची सड़क बना दी है। इस सड़क ने पूरा तालाब दो हिस्सों में बांट दिया है, जिससे जलप्रवाह बाधित हो गया है। यह स्थिति भविष्य में गंभीर जलभराव की आशंका को जन्म देती है।
बसंत विहार कॉलोनी पर संकट
विशेषज्ञों और स्थानीय निवासियों का कहना है कि यदि आने वाले समय में अतिवृष्टि होती है तो इस तालाब के एक ओर स्थित बसंत विहार कॉलोनी में पानी भर सकता है। सड़क के निर्माण से जल निकासी अवरुद्ध हो गई है, जिससे जन-धन की हानि तक हो सकती है। प्रश्न यह उठता है कि यूडीए द्वारा पूर्व में की गई कार्रवाई के बावजूद क्यों नियमित निगरानी नहीं हो रही? क्यों रसूखदार खुलेआम तालाब क्षेत्र में निर्माण कर पा रहे हैं? और क्यों अदालत के आदेशों की खुलेआम अवहेलना की जा रही है?
फूटा तालाब की फूटी किस्मत, फिर शुरू हुआ नया निर्माण, प्रशासन की मिलीभगत, कोर्ट के आदेशों की धज्जियाँ

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