24 न्यूज अपडेट, नेशनल डेस्क। रामलला प्राण प्रतिष्ठा के मुख्य आचार्य 86 वर्षीय लक्ष्मीकांत दीक्षित का शनिवार सुबह निधन हो गया। वे कुछ दिनों से बीमार थे और गंभीर बीमारी की चपेट में थे। लक्ष्मीकांत प्राण प्रतिष्ठा आयोजन में पुजारियों की टीम में शामिल थे व प्राण प्रतिष्ठा के दौरान लक्ष्मीकांत दीक्षित का मुख्य पुजारी के रूप में चयन हुआ था। उनके दीक्षित पूजा पद्धति में सिद्धहस्त और वाराणसी के मीरघाट स्थित सांगवेद महाविद्यालय के वरिष्ठ आचार्य रहे। उनके निधन पर पीएम मोदी और यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी दुख जाहिर किया। अंतिम यात्रा मणिकर्णिका घाट पहुंची जहां पर उनका दाह संस्कार किया गया। अयोध्या अनुष्ठान लक्ष्मीकांत दीक्षित की अध्यक्षता में 121 पंडितों की टीम ने किया था, काशी के 40 से अधिक विद्वान इसमें शामिल हुए थे। प्राण प्रतिष्ठा के बाद मुख्य पुजारी और आचार्य पंडित लक्ष्मीकांत दीक्षित ने पीएम नरेंद्र मोदी को रक्षासूत्र बांधा था। पीएम ने उनके पैर छूकर आशीर्वाद लिया था। शुक्ल यजुर्वेद के शीर्ष विद्वानों में शामिल वेदमूर्ति लक्ष्मीकान्त मथुरानाथ दीक्षित का जन्म सन 1942 में मुरादाबाद (यूपी) में हुआ था। उनकी माताजी का नाम रुक्मिणी और पिताजी का नाम वेदमूर्ति मथुरानाथ दीक्षित था। नेपाल के अलावा भारत के अनेक शहरों में वैदिक अनुष्ठानों में बतौर आचार्य शामिल हुए। लक्ष्मी कांत दीक्षित के आचार्यत्व में बेटे अरुण दीक्षित पीएम को संकल्प और पूजन कराया था। प्राण प्रतिष्ठा की मुख्य पूजा कराई।
रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा करने वाले लक्ष्मीकांत दीक्षित का निधन

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