भीलवाड़ा। भीलवाड़ा से निर्दलीय विधायक अशोक कोठारी ने क्या सोशल मीडिया पर फर्जी सदस्यता कार्ड अपलोड किया था या फिर भाजपा संगठन ने सदस्यता देने के बाद विधायकी जाने से कोठारी को बचाने के लिए सदस्यता कार्ड दिखाने के बावजूद रेड कार्ड दिखा दिया। भीलवाड़ा विधायक अशोक कोठारी भाजपा से टिकट नहीं मिलने पर निर्दलीय लड़े और जीत गए। जब उन्होंने भाजपा के सदस्यता अभियान में हिस्सा लेकर कार्ड बनवा लिया, नंबर पा लिए व भावुकता में कार्ड सोशल मीडिया पर डाल कर पार्टी का सच्चा सिपाही होने का दावा किया तब अचानक हंगामा हो गया। दल बदल कानून के दायरे में आने के डर से भाजपा ने यू टर्न ले लिया। पहले प्रदेशाध्यक्ष का बयान आया कि ऐसे कोई सदस्य थोड़े ही ना बन जाता है, हम पूरी जांच के बाद लेते हैं। उसके बाद आज विधानसभाध्यक्ष वासुदेव देवनानी के बयान ने पूरे मामले का पटाक्षेप कर दिया। कोठारी की विधायकी बच गई, उनको भाजपा की सदस्यता नहीं दी गई। पर सवाल यह उठा कि यदि सदस्य नहीं बने तो सोशल मीडिया पर अपलोड किया गया कार्ड क्या था? यदि वो गलत था तो भाजपा उन पर सवाल क्यों नहीं उठा रही। याने पूरा मैच ही फिक्स दिखाई दे रहा है। क्योंकि सदस्यता अभियान पूरी तरह से भाजपा का अंदरूनी मामला है। इसलिए ऐसा कोई डेटा सार्वजनिक नहीं है जिससे यह पता लगाया जा सके कि कौन ऑथेंटिक रूप से सदस्य बना है कौन नहीं। किसको सदस्यता मिली है, किसको मना करदिया गया है। कोठारी की बीजेपी की सदस्यता को लेकर आज भीलवाड़ा में विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा- मेरे पास बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष का स्टेटमेंट आया है। उन्होंने विधायक अशोक कोठारी को पार्टी की सदस्यता देने से मना कर दिया है। वो आज की तारीख में पार्टी के सदस्य नहीं हैं। जब वे सदस्य नहीं हैं, तो मेरा कोई एक्शन उन पर नहीं बनता है।सर्किट हाउस में गुरुवार को मीडिया से बातचीत में देवनानी ने कहा- जब तक कोई विधायक दूसरी पार्टी की सदस्यता नहीं लेता, तब तक उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो सकती है। भीलवाड़ा के विधायक के बारे में बीजेपी ने इनको सदस्यता के लिए मना कर दिया तो यह विषय स्वत: संज्ञान जैसा नहीं बना। देवनानी ने कहा- नियम यह है कि विपक्ष पार्टी का सदस्य रूलिंग पार्टी का मेंबर नहीं बन सकता है, लेकिन सम्बद्ध सदस्य बनकर कार्य कर सकता है। उन्होंने कहा- पार्टी में विशेष आमंत्रित सदस्य भी होते हैं। पहले भी ऐसे मेंबर रहे हैं। मेरे सामने अब तक जो तथ्य आए हैं, उसके आधार पर इन पर दल-बदल कानून लागू नहीं होता है। केवल विपक्ष के नेता का एक पत्र आया है, जिसमें उन्होंने इस पर संज्ञान लेने के लिए कहा है। उस पर मैंने अपने सचिव को तथ्यात्मक जानकारी प्रस्तुत करने के लिए कहा है। निर्दलीय विधायक अशोक कोठारी ने 4 सितंबर को भाजपा की सदस्यता ली थी व सदस्यता प्रमाण पत्र सोशल मीडिया पर शेयर किया था। इस पर नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने विधानसभा स्पीकर वासुदेव देवनानी को चि_ी लिखकर अशोक कोठारी की विधायकी खत्म करने की मांग की थी। विवाद के बाद कोठारी ने कहा कि मुझे नियम-कायदों की जानकारी नहीं थी, इसलिए सदस्यता ली। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation छात्र देवराज के परिजनों को दी नगद सहायता सनसनीखेज हत्या की कहानी : इलेक्ट्रिशियन घर आया, हो गया प्यार, शादी के बाद अनबन, पति ने वहशी तरीके से करंट लगा कर मार दिया