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मानसून पश्चात् गत वर्ष के मुकाबले इस वर्ष जल स्तर में रिकॉर्ड वृद्धि

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24 न्यूज़ अपडेट चित्तौड़गढ़। भूजल विभाग से प्राप्त अधिकारिक आंकड़ो के अनुसार जिले में मानसून पश्चात् गत वर्ष के भू-जल स्तर में 4.69 मीटर की बढ़ोतरी के मुकाबले इस वर्ष भू-जल के स्तर में 13.16 मीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई है जो कि वर्ष 2024 में राज्य में सर्वाधिक हैं। वर्ष 2023 में वर्षाकाल के पश्चात् भू-जल की औसतन गहराई 11.56 मीटर थी, जो इस वर्ष 7.09 मीटर दर्ज की गई है। जिले के वर्ष 2015 से 2024 प्री मानसून व पोस्ट मानसून के अधिकारिक आंकड़ो के विश्लेषण से यह पाया गया हैं कि वर्ष 2016 व 2019 में क्रमशः 1348.36 व 1200.91 मिमी. की वर्षा के उपरांत पोस्ट मानसून जल स्तर 15.56 मी. व 13.92 मी. बढ़ा है जबकि वर्ष 2024 में 818.36 मिमी. की वर्षा पर 13.16 मी. बढ़ा है जो जिले की इस वर्ष की प्रभावी जल संरक्षण एवं प्रबंधन रणनीति को दर्शाता है।

         भू-जल की उपलब्धता वर्षा पर निर्भर करती है, क्योंकि जिले में बहुत कम पारगम्यता और खराब भण्डार क्षमता वाली कठोर चट्टानें है, इसके अलावा जिले के पूर्वी और दक्षिणी हिस्सों में कॉमपेक्ट सेण्डस्टोन, सेल और बेसाल्टिक पठार है, जिनकी मध्यम से लेकर सौम्य ढाल के कारण भू-जल पुनर्भरण की क्षमता कम है, सतही जल प्रवाह अधिक रहता है। इस समस्या के स्थाई समाधान हेतु जिला कलेक्टर आलोक रंजन के नवाचार एवं कुशल मार्गदर्शन से मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन योजना के अन्तर्गत गत एक वर्ष में जिले में विभिन्न विभागों जैसे वन, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज, जलग्रहण विकास एवं भूसंरक्षण तथा जल संसाधन विभाग द्वारा जल संग्रहण हेतु अथक प्रयास किये गए है जो कि फोर वाटर्स अवधारणा आधारित हैं। जिसमे फसल को बढ़ाने और भू जल स्तर में सुधार हेतु वर्षा जल, सतही जल, भूजल एवं मिट्टी की नमी को संरक्षित करने के लिए एनिकट, तालाब, पक्का चैकडेम, परकोलेशन टेंक, पेरिफेरियल बण्ड, संकन गली पीट, अरदन चैकडेम, संकन पोण्ड, फॉर्म पोण्ड, खेत तलाई, सीसीटी सहित कुल 575 विभिन्न जल संग्रहण ढ़ाचों का निर्माण एवं मरम्मत कार्य (राशि रू. 14.71 करोड़) करवाये गए तथा सघन वृक्षारोपण अभियान (हरियालो राजस्थान) के अंतर्गत भूमि कटाव को रोकन हेतु सरकारी व गैर सरकारी संस्थााओं द्वारा 11.82 लाख पौधे लगाए गए।

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