24 News Update कोटपुतली। जिले के लीला का बास ढाणी में एक भावनात्मक और विवादित घटना उस समय सामने आई जब एक बेटे ने अपनी मां के अंतिम संस्कार से पहले श्मशान में विरोध जताया। बेटे का कहना था कि मां के चांदी के कड़े और अन्य गहने उसे नहीं दिए गए हैं, जिस कारण उसने चिता पर लेटकर अंतिम संस्कार को रोक दिया। यह घटनाक्रम 3 मई को दोपहर के समय घटित हुआ, जिसका वीडियो गुरुवार को सामने आया।
विवाद की जड़ में पारिवारिक संपत्ति और गहने
जानकारी के अनुसार, भूरी देवी पत्नी स्वर्गीय छित्रमल रेगर का निधन 3 मई को दोपहर 12 बजे हुआ। उनके सात बेटों में से छह एक साथ रहते हैं जबकि एक बेटा, ओमप्रकाश, गांव से बाहर अलग मकान में रहता है। बताया गया है कि ओमप्रकाश और अन्य भाइयों के बीच पिछले कुछ वर्षों से संपत्ति को लेकर मतभेद चल रहे हैं।
मां के निधन के बाद परंपरागत रूप से अंतिम संस्कार की पूर्व क्रियाएं संपन्न की गईं। इस दौरान भूरी देवी के गहनों को उतारकर सबसे बड़े बेटे गिरधारी को सौंपा गया, जिससे ओमप्रकाश असहमत था।
श्मशान में दो घंटे तक चला गतिरोध
भूरी देवी की अंतिम यात्रा में ओमप्रकाश ने अर्थी को कंधा भी दिया। हालांकि, श्मशान पहुंचने पर उसने चांदी के कड़ों और अन्य गहनों की मांग करते हुए चिता पर लेटने का कदम उठाया। लगभग दो घंटे तक चले इस घटनाक्रम में ग्रामीणों और रिश्तेदारों ने उसे समझाने का प्रयास किया, लेकिन वह टस से मस नहीं हुआ।
गहने सौंपने पर हुआ अंतिम संस्कार
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अंततः श्मशान में ही मां के कड़े और अन्य गहने मंगवाकर ओमप्रकाश को सौंपे गए। इसके बाद ही वह चिता से उठा और अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की गई। यह घटना न केवल पारिवारिक विवादों की संवेदनशीलता को उजागर करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि मृत्यु जैसे पवित्र अवसर पर भी पारस्परिक विश्वास की कमी किस हद तक तनाव उत्पन्न कर सकती है।
मां की चिता पर लेट गया बेटा, गहने लाकर दिए तक 2 घंटे बाद हुआ अंतिम संस्कार

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