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बांसवाड़ा डमीजीवी अभयारण्य : डमी ने पास करवाई ग्राम सेवक की परीक्षा, 2011 से कर रहा था नौकरी, दस्तावेज जांचने वालों पर कोई कार्रवाई नहीं

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24 न्यूज अपडेट, स्टेट डेस्क। ग्राम सेवक भर्ती परीक्षा 2011 में डमी कैंडिडेट बैठाने के मामले में बांसवाड़ा की कुशलगढ़ पुलिस ने मुख्य एजेंट वीरमाराम जाट और असली अभ्यर्थी कोवरसिंह अड़ के खिलाफ मामला दर्ज किया है। इस धोखाधड़ी से संबंधित जानकारी एसटी/एससी सेल के उपाधीक्षक श्यामसिंह ने दर्ज कराई। रैकेट से जुड़े अन्य अभ्यर्थियों और डमी कैंडिडेट की भी जांच की जा रही है।
कैसे हुआ फर्जीवाड़ाः
कोवरसिंह ने 2011 की ग्राम सेवक परीक्षा के लिए आवेदन किया। उसकी जगह डमी कैंडिडेट बनकर वीरमाराम जाट परीक्षा में बैठा और उत्तीर्ण हुआ। कोवरसिंह ने इसके लिए वीरमाराम को 2.50 लाख रुपये दिए थे। वीरमाराम और सकनसिंह खड़िया की दोस्ती उदयपुर में पढ़ाई के दौरान हुई। वीरमाराम ने सकनसिंह के लिए परीक्षा दी, जिसमें सकनसिंह सफल हुआ। इसके बाद दोनों ने पैसे लेकर अन्य अभ्यर्थियों के लिए भी डमी कैंडिडेट उपलब्ध कराना शुरू किया।
डमी कैंडिडेट का नेटवर्कः
वीरमाराम ने कई परीक्षाओं में डमी कैंडिडेट के तौर पर खुद बैठकर परीक्षा दी। सूचना सहायक भर्ती परीक्षा 2018 में भी उसने इसी तरह की धोखाधड़ी की। वीरमाराम अपने क्षेत्र में योग्य छात्रों को ढूंढता और सकनसिंह ऐसे अभ्यर्थियों की तलाश करता जो पैसे देकर परीक्षा पास करना चाहते थे। मुख्य आरोपी वीरमाराम जाट जालौर जिले का निवासी, बीएड डिग्री धारक और सैकंड ग्रेड शिक्षक भर्ती परीक्षा दे चुका है। कोवरसिंह पाली बड़ी का निवासी, जो 2011 में ग्राम सेवक के पद पर चयनित हुआ और छोटी सरवन, कुशलगढ़, व घाटोल पंचायत समितियों में कार्यरत रहा। ग्राम सेवक भर्ती परीक्षा में डमी कैंडिडेट बैठाने का यह मामला शिक्षा और प्रशासनिक प्रणाली की खामियों को उजागर करता है। पुलिस इस मामले में रैकेट से जुड़े सभी लोगों पर सख्त कार्रवाई कर रही है।

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