24 न्यूज अपडेट. उदयपुर। सड़कें खुदी हुईं हैं, उनमें गड्ढे हो रहे हैं, अंदरूनी शहर सिवरेज के बदबूदार पानी से तरबतर है। डेंगू और मौसमी बीमारियों का घर-घर प्रकोप है। शहर की ट्रैफिक और गांव देहात तक की यातायात व्यवस्था चरमरा रही है। बिजली के अते-पते नहीं है, पीन के पानी को लोग तरस रहे हैं लेकिन हमारे नेताओं को इन सबसे शायद कोई सरोकार नहीं है। इनके पास इतना ज्यादा फालतू समय है कि ये सोशल मीडिया पर बयानों के खेल खेल रहे हैं। महासंग्राम लड़ रहे हैं। वैचारिक जंग जीतने की जिद में बयानबाजियां हो रही हैं जिनको पढ़कर हंसी नेताओं की बुद्धि पर ही तरस आ जाता है। जन सरोकारों से दूर हुए जन प्रतिनिधि और नेताओं की पूरी की पूरी फौज को जनता को सबक जरूर सिखाना चाहिए ताकि विवकेशील बुद्धि भी ठिकाने पर रहे और जिस काम के लिए उन्होंने वोट देकर चुना है उसके अलावा काम करने पर लगाम लगाई जा सके। हालिया मामला पेथर को लेकर बयानबाजी का है। वन विभाग के जवान जंगलों की खाक छानते फिर रहे हैं। पिछले कई दिनों से कई टीमें डेरा डाले हुए हैं मगर आदमखोर पेंथर पकड़ में ही नहीं आ रहा है। अब उस पर बयानबाजी हो रही है। बाप पार्टी के कार्यकर्ताओं ने पोस्ट किया कि – आदिवासी इलाकों में लेपर्ड को जानबूझकर लाया गया है। ये आदिवासी समाज को खत्म करने की योजना है। इस पर हालांकि जवाब देने की जरूरत नहीं थी मगर फिर से फुर्सत के पलों में उदयपुर सांसद मन्नालाल रावत ने अपने फेसबुक अकाउंट पर पोस्ट कर लिख दिया – ’गोगुंदा-सायरा के जंगलों में ये पेंथर कही बाप पार्टी ने तो नहीं छोड़े।’ यह सब तब हो रहा है जब गोगुंदा में पेंथर ने अब तक 7 लोगों की जान ले ली है। याने संवेदनशीलता दोनों तरफ शून्य दिखाई दे रही है। समस्या के समाधान का हिस्सा बनने की बजाय जन दोनों दलों के नेता खुद सोशल मीडिया पर समस्या के पंच बन पंचायती कर रहे हैं। आपको यह बता दें कि सर्च ऑपरेशन में लगभग महीना बीतने आया है मगर ना तो पेंथर का पता चला है ना सुराग मिला है। इस पोस्ट पर उदयपुर सांसद ने मीडिया से कहा है कि – इस मुददे पर लगातार बीएपी वाले सोशल मीडिया और अन्य जगहों पर आक्रमण कर रहे हैं। भ्रम फैलाने के लिए कहा रहे हं कि ’बीजेपी वालों ने तो पेंथर नहीं छोड़े, आदिवासियों को जंगल से भगाने के लिए।’ मैंने भी फेसबुक के जरिए सवाल पूछा कि- ’कहीं बाप पार्टी ने राजनीतिक हथियार के रूप में तो पेंथर जंगल में नहीं छोड़े है।’ ये मेरा बयान नहीं है। मेरा तो इतना सा है कि कहीं इनका षडयंत्र तो नहीं है इसलिए जनता से पूछा है ताकि किसी को ध्यान होगा तो मुझे बताएंगे। सरकार ने आदमखोर लेपर्ड का आतंक खत्म करने के लिए हर संभव प्रयास किए। उसे गोली मारने तक के आदेश दे दिए। यहां तक कि हैदराबाद से स्पेशल शूटर बुलवाया। प्रभावितों को मुआवजा देने तक की कार्रवाई की। आदमखोर लेपर्ड के आतंक की शुरुआत होते ही हम स्वयं उस क्षेत्र में पहुंचे। पूरे घटनाक्रम पर अधिकारियों की बैठक ली। मामले से निपटने की रणनीति पर चर्चा की। पीड़ितों को शीघ्र राहत और मुआवजा राशि जारी कराने की व्यवस्था की। इसके बावजूद यह इस तरह का भ्रम फैलाते हैं, लगातार फैलाते हैं। आखि़र क्यों…?…. बीएपी के लोग भ्रम फैला रहे हैं। प्रशासन कानूनी कार्रवाई करें।आपको बता दें कि बाप पार्टी के कार्यकर्ताओं के सोशल अकाउंट से पोस्ट की जा रही थी कि – ’आदिवासी इलाकों में लेपर्ड जानबूझकर लाए गए हैं। वीडियो फुटेज इस बात का सबूत है कि आदिवासी समुदाय को खत्म करने की एक संगठित योजना चल रही है। ’इन सबके बीच बड़ा सवाल यह उठता है क्या आदमखोर पेंथर से हुई मौतों के बाद भी इस तरह की राजनीति दोनों पक्षों को शोभा देती है। क्या यह नई राजनीतिक गिरावट की निशानी नहीं है। दोनों की बातों में कोई लॉजिक नहीं है, इन्हें पढ़कर सिर्फ हंसी और तरस आ सकता है। उम्मीद है कि जन प्रतिनिधि ऐसे बयानों से बचेंगे। यदि कोई अनर्गल बात कर रहा है तो उसका संज्ञान लेना प्रशासन का काम है व उस पर कार्रवाई की जाए। जन प्रतिनिधि कानून बनाने के अपने मूल काम में ही संलग्न रहें या किसी बड़े स्तर की राजनीति करें वहीं सुहाता है। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation डेंगू मच्छरों से बचाव के लिए मदार नहर की सफाई, कई वार्डों में नहीं आ रही कचरा गाड़ी बी.एन. कन्या इकाई में वाॅइस कल्चर पर वर्कशाॅप का आयोजन