24 न्यूज अपडेट जयपुर। आरपीएससी में अब भी पोपाबाई का ही राज चल रहा है चाहे जितने सुधार के दावे किए जाएं। ऐसे लूप होल खुद आरपीएससी छोड देती है जिससे कोर्ट जाना पडता है। उसमें समय व पेसा खर्च होता है लेकिन सरकारी मिलीभगत से अफसर बच जाते हैं और सिस्टम यूं ही चलता रहा है। असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती 2023 में हिंदी विषय में होने वाली नियुक्तियों को हाईकोर्ट ने याचिका के अधीन रख दिया हैं हाईकोर्ट की ओर से अंजना चौधरी व अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह आदेश आया। राजस्थान लोक सेवा आयोग (आरपीएससी) ने फाइनल आंसर-की बिना ही अंतिम परिणाम जारी करने की धांधली कर दी थी। वेटिंग लिस्ट और सफल नहीं हुए अभ्यर्थियों के कितने नंबर आए ये भी नहीं बताया। सार्वजनिक परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता पर गंभीर सन्देह उत्पन्न करता है ऐसा नहीं करना। हाईकोर्ट ने आरपीएससी और राज्य सरकार को नोटिस जारी करते हुए पूछा है कि बिना प्रक्रिया अपनाए अंतिम परिणाम कैसे जारी कर दिया। वकील प्रेमचन्द देवन्दा और हेमराज रोदिया ने मीडिया से कहा कि मार्च 2024 में लिखित परीक्षा हुई। आयोग ने मॉडल उत्तर कुंजी जारी की। अंतरिम परिणाम में याचिकाकर्ता को उर्त्तीण बताया गया। अंतरिम परिणाम के आधार पर आयोग ने हिंदी विषय के 214 पदों के मुकाबले इंटरव्यू के लिए 8 गुणा अभ्यर्थियों को बुलाया। जबकि इंटरव्यू में 3 गुणा को ही बुलाना था। आठ गुना को क्या व किस नियम के तह बुलाया गया? 16 दिसम्बर को भर्ती का अंतिम परिणाम आ गया। आज तक लिखित परीक्षा की न तो उत्तर-कुंजी जारी की गई है और न वेटिंग लिस्ट में रखे गए की सूची आई। अनुत्तीर्ण अभ्यर्थियों के अंतिम प्राप्तांक जारी किए हैं।
गजब की धांधली, ना फाइनल आंस की ना वेटिंग लिस्ट, असिस्टेंट प्रोफेसर हिन्दी की भर्ती 2023 की नियुक्तियां अब याचिका के अधीन

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