विश्व विरासत दिवस पर 18 को होगी ‘विरासत यात्रा’उदयपुर। विश्व विरासत दिवस पर प्रताप गौरव शोध केन्द्र राष्ट्रीय तीर्थ, जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ के संघटक सहित्य संस्थान तथा इतिहास संकलन समिति उदयपुर जिला इकाई के संयुक्त तत्वावधान में ‘विरासत यात्रा’ का आयोजन किया जा रहा है। प्रताप गौरव केन्द्र के निदेशक अनुराग सक्सेना व साहित्य संस्थान के निदेशक डॉ. जीवन सिंह खरकवाल ने बताया कि इस यात्रा में आठ विरासत स्थलों का चिह्नित किया गया है। उन स्थानों पर जाकर इतिहासकार और पुराविद् इस विषय में अध्ययनरत विद्यार्थियों और जिज्ञासुओं को इनके महत्व और उनके ऐतिहासिक पहलुओं को समझाएंगे। इन आठ स्थलों में बेड़वास की बावड़ी, झरनों की सराय, उदय निवास, लकड़कोट, झामरकोटड़ा (जामेश्वर महादेव), जीवाश्म उद्यान (झामेश्वर महादेव), अरावली के निर्माण प्रक्रिया का सबसे पुराना प्रमाण और गहड़वाली माता (महाराणा उदय सिंह द्वारा निर्मित गढ़) को शामिल किया गया है।बेड़वास की बावड़ीइस बावड़ी को नन्द बावड़ी के नाम से भी जाना जाता है। इसका निर्माण महाराणा राजसिंह के शासन में पंचोली फतहचंद 1668 ईस्वी (वि.सं. 1725) में बेड़वास में करवाया। इस बावड़ी के साथ एक हवेली, सराय, और करीब 7 बीघा में एक बाग भी विकसित किया गया। इस बावड़ी पर लगे अभिलेख को डोलो गजाधर ने 1673 ईस्वी में उकेरा। अभिलेख में बताया गया है कि महाराणा राज सिंह ने 1673 ईस्वी में इस बावड़ी का पानी पिया। साथ बावड़ी को बनवाने वाले पंचोली फतहचंद का सम्मान भी किया। 2018 में इस बावड़ी को साहित्य संस्थान की ओर से स्वयंसेवकों के दल ने विश्व विरासत दिवस के अवसर पर साफ किया था।झरनों की सरायझरनों की सराय का निर्माण महाराणा प्रताप की दादी मां झरना बाई की ओर से करवाया गया था। इसलिए इस सराय का सीधा सम्बंध मेवाड़ राजपरिवार है। सराय एक गढ़ परिसर में निर्मित है और इसके साथ एक बावड़ी भी निर्मित की गई है, जो क्षेत्र के आम लोगों के लिए पेयजल का साधन है। इस परिसर के अवशेषों को बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग व सहित्य संस्थान, जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ (डीम्ड-टू-बी विश्वविद्यालय), उदयपुर ने खोजा था।उदय निवासमहाराणा उदयसिंह के नाम पर निर्मित यह अत्यंत आकर्षक महल उदयसागर के दक्षिणी छोर पर स्थित है। यह आहड़ के पुराने टीले पर निर्मित है। साथ ही यह यहां की भौगोलिक परिस्थितियों का भी शानदार उपयोग करता है। बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग व सहित्य संस्थान, जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ (डीम्ड-टू-बी विश्वविद्यालय), उदयपुर के सर्वेक्षण दल ने यहां से अहार ताम्रपाषाण कालीन सफेद चित्रित काले व लाल मृदभाण्ड तथा मोटे चमकीले, चिकने भूरे मृदभाण्ड खोजे।लकड़कोटदेवड़ा राजपूतों को प्राचीन गढ़ लकड़कोट लकड़वास और भल्लों का गुड़ा गांव के मध्य स्थित अरावली के कटक पर स्थिति है। इस गढ़ का अधिकतम भाग खनन और सड़क निर्माण के दौरान नष्ट हो चुका है, लेकिन इसके पूर्वी ढाल पर बना एक द्वार आज भी दिखाई देता है।झामरकोटड़ा (झामेश्वर महादेव)इस क्षेत्र में चूने की अत्यन्त प्राचीन गुफाएं हैं। इनमें चूने के झरण से निच्युताश्म बने दिखाई देते हैं। यह एक अभूतपूर्व भौगोलिक निर्माण है। वर्ष 1978 में इसे भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने भू-विरासत स्थल घोषित किया है।जीवाश्म उद्यान (जीवन का प्राचीनतम प्रमाण)झामरकोटड़ा, झामेश्वर महादेव मंदिर के करीब स्थित स्ट्रोमेटोलाइट उद्यान में एशियाई स्ट्रोमेटोलाइट का समृद्ध भण्डार है। यहां पर फॉस्फोराइट विशाल संग्रह है। यह उद्यान 1.8 अरब वर्ष पुराना है जो इस क्षेत्र में जीवन के सबसे पुराने साक्ष्य के प्रमाण देता है। सबसे पुरानी अरावली संरचनामामादेव में अरावली की सबसे पुरानी चट्टान जगत की ओर जाने वाली पक्की सड़क के बगल में दिखाई देती है। यह लोगों के आकर्षण का केन्द्र है।गहड़वाली माता (महाराणा उदय सिंह निर्मित गढ़)गहड़वाली माता का मंदिर मेवाड़ की राजधानी उदयपुर शहर से 30 किलोमीटर दूर स्थित है। स्थानीय श्रुति परम्परा में इसे महाराणा उदयसिंह गढ़ बताया जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि उदयसिंह उदयपुर से पहले जामरकोटड़ा को ही अपनी राजधानी बनाना चाहते थे। इसलिए उन्होंने यहां पर गढ़ बनवाया था। यह गढ़ अधिक समय तक नहीं टिका और टूट गया। इसके बाद गहड़वाली माता महाराणा उदयसिंह के सपने में आई। माता ने उदयसिंह को सपने में जामरकोटड़ा से 30 किलोमीटर दूर अपनी राजधानी बनाने का आदेश दिया। इसके बाद उदयसिंह ने किले के स्थान पर गहड़वाली माता का मंदिर बनवाया। 3 करोड़ बहनों का लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा ड्रोन दीदी भी बनाने का लक्ष्य रखा है। महिलाओं के स्वास्थ्य के मुद्दों पर भी अनेक काम करने का संकल्प किया है।किसाना सम्मान निधि, मत्स्यजनार्दनराय नागर राजस्थान विद्यापीठ ने राजस्थान विश्वविद्यालय को मात दी।उदयपुर। इंटर जोनल ऑल इंडिया युनिवर्सिटी हमला करने वाले लेपर्ड को ग्रामीणों ने मार डालाःपहाड़ी के पास इकठ्ठा हुए, लाठियों से वार किए; रास्ते में दम तोड़ाउदयपुर47 मिनट पहले उदयपुर-अहमदाबाद हाईवे पर परसाद वन रेंज के जंगल में ग्रामीण पर हमला करने के बाद गुस्साए लोगों ने उसे मार डाला। पूरी घटना वन विभाग के कर्मचारियों के सामने हुई। वन विभाग से आए शूटर ने लेपर्ड को ट्रेंकुलाइज कर दिया था। जैसे ही वह बेहोश हुआ। ग्रामीण लेपर्ड पर टूट पड़े और उसकी जान ले ली। उदयपुर शहर से करीब 37 किलोमीटर दूर परसाद वन रेंज के अमरपुरा गांव के पास जंगल में मादा लेपर्ड के एक गांव के फला गराड़ा में देवीलाल (40) पुत्र रत्ना मीणा पर हमला कर दिया। इसके बाद से ग्रामीण भय के मारे वहां जंगल की पहाड़ियों पर एकत्रित हो गए। इस दौरान लेपर्ड पहाड़ी पर गुफा में छिपा था। उस दौरान उदयपुर से वन विभाग की रेस्क्यू टीम शूटर डीपी शर्मा वहां पहुंच गए। स्थानीय वन विभाग की टीम के साथ शाम तक शूटर लेपर्ड के बाहर निकलने का इंतजार कर रहे थे। उदयपुर के अमरपुरा गांव की पहाड़ियों पर सुबह लेपर्ड के एक व्यक्ति पर हमले के बाद ग्रामीण जमा हो गए।उदयपुर के अमरपुरा गांव की पहाड़ियों पर सुबह लेपर्ड के एक व्यक्ति पर हमले के बाद ग्रामीण जमा हो गए।एकाएक जब लेपर्ड नीचे उतर रहा था और नाले के पास शूटर शर्मा ने उसको ट्रेंकुलाइज कर दिया। इस बीच लेपर्ड के दशहत से घबराए ग्रामीणों ने लेपर्ड पर हमला बोल दिया। बाद में जब वनकर्मियों ने लेपर्ड को उपचार के लिए ले जाने लगे तो देखा कि उसकी मौत हो गई। इस संबंध में टीडी थानाधिकारी फेलीराम ने बताया कि इस संबंध में वन विभाग की तरफ से कोई रिपोर्ट नहीं मिली है। ग्रामीणों में गुस्सा कि घर से बाहर निकलना मुश्किल हुआइस जंगल के अंदर पहाड़ी क्षेत्र और आसपास ग्रामीण के घर है और वहां पर लेपर्ड के मूवमेंट के चलते ग्रामीण डरे और सहमे रहते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों को घर से बाहर ही निकालने में घबराते हैं और शाम ढलने के बाद अकेले घर से बाहर जाना मुश्किल भरा काम है। यहां पर पूर्व में भी लेपर्ड इंसानों पर हमला कर चुका है। इसमें परसाद, पडूणा, केवड़े की नाल आदि क्षेत्र में लेपर्ड का मूवमेंट रहता है। लेपर्ड के हमले से देवीलाल के पैर में चोट लगी।लेपर्ड के हमले से देवीलाल के पैर में चोट लगी।सुबह हमला किया था लेपर्ड नेइस जंगल में सोमवार की सुबह ही अमरपुरा ग्राम पंचायत के फला गराड़ा में लेपर्ड ने देवीलाल (40) पुत्र रत्ना मीणा पर हमला कर दिया था। देवीलाल उस समय बकरी चरा रहा था लेपर्ड ने उसके पैर पर इस कदर जबड़े में जकड़ लिया कि बड़ा घाव हो गया और बाद में उसे अस्पताल लेकर गए थे। लाख में हुआ नीलामअंडे की आखिरी बोली लगाने वाले दानिश हमीदइमेज स्रोत,क्।छप्ैभ् भ्।डप्क्इमेज कैप्शन,अंडे की आखिरी बोली लगाने वाले दानिश हमीद….में।नजीवत,रियाज़ मसरूरपदनाम,बीबीसी उर्दू, श्रीनगर15 अप्रैल 2024यह कोई सोने का अंडा नहीं बल्कि बाज़ार से छह रुपये में ख़रीदा गया एक आम सा अंडा था. लेकिन मस्जिद बनाने के लिए जिस जज़्बे के साथ एक ग़रीब महिला ने उसे दान में दिया, उसने उसकी कुल क़ीमत सवा दो लाख रुपये से अधिक तक पहुंचा दी.भारत प्रशासित कश्मीर के उत्तरी क़स्बे सोपोर के ‘माल मापनपुरा’ गांव में कई महीने से एक मस्जिद बनाई जा रही है. ईद के मौक़े पर मस्जिद कमेटी ने घर-घर जाकर नक़द और सामान दान में लेने का फ़ैसला किया.लोगों ने नक़दी, बर्तन, मुर्ग़ियां और चावल वग़ैरह दान में दिए.मस्जिद कमेटी के एक सदस्य नसीर अहमद बताते हैं, “हम दान जमा कर रहे थे कि एक छोटे से घर से एक महिला सर झुकाए धीरे से मेरे पास आई और मुझे एक अंडा पकड़ा कर कहा कि मेरी तरफ़ से यह क़बूल कीजिए.”नसीर का कहना है कि यह महिला बेहद ग़रीब हैं और एक छोटे से जर्जर मकान में अपने इकलौते बेटे के साथ रहती हैं. Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation सलमान के घर के बाहर फायरिंग के 2 आरोपी गिरफ्तार, सूरत की नदी में फेंकी थी पिस्तौल 49 हजार के सिक्के लेकर नामांकन करने आए दो प्रत्याशी, गिनती में ही निकल गया समय, नहीं हो सका नामांकन