Site icon 24 News Update

क्या आप जानते हैं उदयपुर में जीवाश्म उद्यान कहां है? यदि नहीं तो खबर पढ़िये, विरासत को जानिये-

Advertisements

सबसे पुरानी अरावली संरचना
मामादेव में अरावली की सबसे पुरानी चट्टान जगत की ओर जाने वाली पक्की सड़क के बगल में दिखाई देती है। यह लोगों के आकर्षण का केन्द्र है।
गहड़वाली माता (महाराणा उदय सिंह निर्मित गढ़)
गहड़वाली माता का मंदिर मेवाड़ की राजधानी उदयपुर शहर से 30 किलोमीटर दूर स्थित है। स्थानीय श्रुति परम्परा में इसे महाराणा उदयसिंह गढ़ बताया जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि उदयसिंह उदयपुर से पहले जामरकोटड़ा को ही अपनी राजधानी बनाना चाहते थे। इसलिए उन्होंने यहां पर गढ़ बनवाया था। यह गढ़ अधिक समय तक नहीं टिका और टूट गया। इसके बाद गहड़वाली माता महाराणा उदयसिंह के सपने में आई। माता ने उदयसिंह को सपने में जामरकोटड़ा से 30 किलोमीटर दूर अपनी राजधानी बनाने का आदेश दिया। इसके बाद उदयसिंह ने किले के स्थान पर गहड़वाली माता का मंदिर बनवाया।

3 करोड़ बहनों का लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा ड्रोन दीदी भी बनाने का लक्ष्य रखा है। महिलाओं के स्वास्थ्य के मुद्दों पर भी अनेक काम करने का संकल्प किया है।
किसाना सम्मान निधि, मत्स्य
जनार्दनराय नागर राजस्थान विद्यापीठ ने राजस्थान विश्वविद्यालय को मात दी।
उदयपुर। इंटर जोनल ऑल इंडिया युनिवर्सिटी

हमला करने वाले लेपर्ड को ग्रामीणों ने मार डालाःपहाड़ी के पास इकठ्ठा हुए, लाठियों से वार किए; रास्ते में दम तोड़ा
उदयपुर47 मिनट पहले

उदयपुर-अहमदाबाद हाईवे पर परसाद वन रेंज के जंगल में ग्रामीण पर हमला करने के बाद गुस्साए लोगों ने उसे मार डाला। पूरी घटना वन विभाग के कर्मचारियों के सामने हुई। वन विभाग से आए शूटर ने लेपर्ड को ट्रेंकुलाइज कर दिया था। जैसे ही वह बेहोश हुआ। ग्रामीण लेपर्ड पर टूट पड़े और उसकी जान ले ली।

उदयपुर शहर से करीब 37 किलोमीटर दूर परसाद वन रेंज के अमरपुरा गांव के पास जंगल में मादा लेपर्ड के एक गांव के फला गराड़ा में देवीलाल (40) पुत्र रत्ना मीणा पर हमला कर दिया। इसके बाद से ग्रामीण भय के मारे वहां जंगल की पहाड़ियों पर एकत्रित हो गए। इस दौरान लेपर्ड पहाड़ी पर गुफा में छिपा था। उस दौरान उदयपुर से वन विभाग की रेस्क्यू टीम शूटर डीपी शर्मा वहां पहुंच गए। स्थानीय वन विभाग की टीम के साथ शाम तक शूटर लेपर्ड के बाहर निकलने का इंतजार कर रहे थे।

उदयपुर के अमरपुरा गांव की पहाड़ियों पर सुबह लेपर्ड के एक व्यक्ति पर हमले के बाद ग्रामीण जमा हो गए।
उदयपुर के अमरपुरा गांव की पहाड़ियों पर सुबह लेपर्ड के एक व्यक्ति पर हमले के बाद ग्रामीण जमा हो गए।
एकाएक जब लेपर्ड नीचे उतर रहा था और नाले के पास शूटर शर्मा ने उसको ट्रेंकुलाइज कर दिया। इस बीच लेपर्ड के दशहत से घबराए ग्रामीणों ने लेपर्ड पर हमला बोल दिया। बाद में जब वनकर्मियों ने लेपर्ड को उपचार के लिए ले जाने लगे तो देखा कि उसकी मौत हो गई। इस संबंध में टीडी थानाधिकारी फेलीराम ने बताया कि इस संबंध में वन विभाग की तरफ से कोई रिपोर्ट नहीं मिली है।

ग्रामीणों में गुस्सा कि घर से बाहर निकलना मुश्किल हुआ
इस जंगल के अंदर पहाड़ी क्षेत्र और आसपास ग्रामीण के घर है और वहां पर लेपर्ड के मूवमेंट के चलते ग्रामीण डरे और सहमे रहते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों को घर से बाहर ही निकालने में घबराते हैं और शाम ढलने के बाद अकेले घर से बाहर जाना मुश्किल भरा काम है। यहां पर पूर्व में भी लेपर्ड इंसानों पर हमला कर चुका है। इसमें परसाद, पडूणा, केवड़े की नाल आदि क्षेत्र में लेपर्ड का मूवमेंट रहता है।

लेपर्ड के हमले से देवीलाल के पैर में चोट लगी।
लेपर्ड के हमले से देवीलाल के पैर में चोट लगी।
सुबह हमला किया था लेपर्ड ने
इस जंगल में सोमवार की सुबह ही अमरपुरा ग्राम पंचायत के फला गराड़ा में लेपर्ड ने देवीलाल (40) पुत्र रत्ना मीणा पर हमला कर दिया था। देवीलाल उस समय बकरी चरा रहा था लेपर्ड ने उसके पैर पर इस कदर जबड़े में जकड़ लिया कि बड़ा घाव हो गया और बाद में उसे अस्पताल लेकर गए थे।

लाख में हुआ नीलाम
अंडे की आखिरी बोली लगाने वाले दानिश हमीदइमेज स्रोत,क्।छप्ैभ् भ्।डप्क्
इमेज कैप्शन,अंडे की आखिरी बोली लगाने वाले दानिश हमीद
….में
।नजीवत,रियाज़ मसरूर
पदनाम,बीबीसी उर्दू, श्रीनगर
15 अप्रैल 2024
यह कोई सोने का अंडा नहीं बल्कि बाज़ार से छह रुपये में ख़रीदा गया एक आम सा अंडा था. लेकिन मस्जिद बनाने के लिए जिस जज़्बे के साथ एक ग़रीब महिला ने उसे दान में दिया, उसने उसकी कुल क़ीमत सवा दो लाख रुपये से अधिक तक पहुंचा दी.
भारत प्रशासित कश्मीर के उत्तरी क़स्बे सोपोर के ‘माल मापनपुरा’ गांव में कई महीने से एक मस्जिद बनाई जा रही है. ईद के मौक़े पर मस्जिद कमेटी ने घर-घर जाकर नक़द और सामान दान में लेने का फ़ैसला किया.
लोगों ने नक़दी, बर्तन, मुर्ग़ियां और चावल वग़ैरह दान में दिए.
मस्जिद कमेटी के एक सदस्य नसीर अहमद बताते हैं, “हम दान जमा कर रहे थे कि एक छोटे से घर से एक महिला सर झुकाए धीरे से मेरे पास आई और मुझे एक अंडा पकड़ा कर कहा कि मेरी तरफ़ से यह क़बूल कीजिए.”
नसीर का कहना है कि यह महिला बेहद ग़रीब हैं और एक छोटे से जर्जर मकान में अपने इकलौते बेटे के साथ रहती हैं.

Exit mobile version