रिपोर्ट – जयवंत भैरविया, सीनियर जर्नलिस्ट, आरअीआई एक्टिविस्ट

24 न्यूज अपडेट. उदयपुर। कोटड़ा में मंत्री बाबूलाल खराड़ी के प्रभाव वाले इलाकों में उनकी नाक के नीचे पॉलिटिकल मिलीभगत से कार्य व्यवस्था के नाम पर तबादलों के खेल हो गए। दीपावली पर कर्मचारियों को नियमों से परे जाकर कुल 9 लोगों के तबादले किए गए। जिन कनिष्ठ सहायकों को इधर से उधर किया गया है उनमें गर्भवती महिला भी शामिल है। इसके अलावा एक कार्मिक मृतक आश्रित है जिनका नियमानुसार तबादला नहीं किया जा सकता। तबादला आदेश या यूं कहें कि कार्यालय आदेश में बताया गया कि पंचायत समिति की प्रशासन स्थापना एवं स्थायी समिति की बैठक में 28 अक्टूबर को लिए गए प्रस्ताव के अनुसार कार्य व्यवस्था की दृष्टि से कनिष्ठ सहायकों का विभिन्न पंचायत में किया जाता है। यह नहीं लिखा कि क्या किया जाता है। तबादला या फिर क्या?? इसमें दीपक गौतम का गांधी सरणा, नंदकिशोर कुमावत का नयावास, कैलाशंचंद्र तिवाड़ी का जूना पादर, पिंकी कुमारी मीणा का खाम, नीलम बाई राजपूत का तिलोई, नेहा कुमार पारी का सावन का क्यारा, रविकांत लबाना का बेड़ाघर, नरेश कुमार कुमावत का बाखेल, दिनेश कुमार गरासिया का खुणा में तबादला किया गया है। सभी तबादले बीडीओ मनवीर सिंह के आदेश पर किए गए हैं। इन तबादलों के बाद से पंचायत समिति सहित पूरे राजनीतिक हलके में चर्चा का माहौल है कि आखिर तबादले किसके कहने पर किए गए। कहीं कोई आर्थिक या राजनीतिक मामला तो नहीं है। आपको बता दें कि इसी तरह के एक मामले में राजस्थान सिविल सेवा अपील अधिकरण रोक लगा चुका है। इनकी जानकारी होते हुए भी विकास अधिकारी ने तबादलों के आदेश क्यों जारी किए यह जांच का विषय है। आपको बता दें कि राज्य सरकार की ओर से इसी साल 10 फरवरी से 22 फरवरी तक तबादलों से प्रतिबंध हटाया गया था। उसके बाद प्रतिबंध लगा दिया था। तबादले या कार्यव्यवस्था के नाम पर किसी भी तरह के आदेश पर प्रतिबंध लगा रखा है। बिना सीएमओ के कोई भी आदेश जारी नहीं किया जा सकता है। इस स्थिति में जो भी तबादले या कार्य व्यवस्था में आदेश हुए उनको राजस्थान हाइकोर्ट एवं सिविल सेवा प्राधिकरण ने तुरंत प्रभाव से निरस्त कर दिया है जो विभाग में सबको पता है। अब सवाल यह उठ रहा है कि ऐसी कौनसी कार्य व्यवस्था की जल्दी मच रही है कि गर्भवती, मृतक आश्रित तथा दो वर्ष की परिवीक्षा अवधि पूरी नहीं होने वाले कार्मिकों का स्थानांतरण तक किया जा रहा है जो नियमानुसार नहीं किया जा सकता है। यही नहीं, जिस कर्मचारी का रिटायर्मेंट होने वाला है और अभी उसमें 6 माह से कम का समय बचा हुआ है, उसका भी स्थानांतरण कर दिया गया है। आपको बता दें कि पंचायतों में वरिष्ठ सहायक यूडीसी का पद नहीं होता है इसलिए यूडीसी को पंचायतों में नहीं लगाया जा सकता है। यह इतनी सामान्य बात है जो सभी बीडीओ को पता होनी चाहिए। लेकिन पता नहीं किस दबाव में आकर बीडीओ मनवीरसिंह ने तबादला या कार्यालय आदेश जारी कर दिया है। आपको बता दें कि पंचायत समिति से बाहर पंचायतों में मृतक आश्रित को नहीं लगाया जा सकता है यह राज्य सरकार का आदेश है लेकिन उसकी भी पालना नहीं की गई है। महिला कर्मचारी को ऐसी दूरस्थ पंचायत में लगाया हैं जहां आवागमन का कोई साधन नहीं है।
सभी नियमों की धज्जियाँ उड़ाने वाले इस आदेश के बारे में जब हमने बीडीओ मनवीरसिंह बेनीवाल से बातचीत करनी चाही तो उन्होंने वाट्सएप पर प्रधान सुगना देवी का नंबर दे दिया। इससे यह प्रतीत हो रहा है कि बीडीओ पूरे मामले को प्रधान के दबाव पर हुआ बताना चाहते हैं। लेकिन आदेश पर उनके हस्ताक्षर होने से आदेश बीडीओ का कही माना जाएगा। जब हमने प्रधान से उनके नंबर पर संपर्क किया तो उनके प्रतिनिधि की ओर से बताया गया कि तबादले कार्य व्यवस्था के तहत नियमानुसार ही हुए हैं। यह आम तौर पर जरूरत के अनुसार होता आया है। जब उन्हें न्यायालय व सरकार के फैसले के बारे में बताया गया तो उन्होंने इसकी जानकारी होने से मना कर दिया। जब गर्भवती महिला व रिटायर्ड होने वाले कार्मिक के तबादले का सवाल किया गया तो कोई जवाब तक नहीं दे सके। हमारी इन्वेस्टिगेशन में यह सामने आया है कि पंचायत समिति में राजनीतिक स्तर पर बड़े नेता के रिश्तेदार बैठे हैं व उनकी भी दखल है। लेकिन बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या राजनीतिक दबाव में आकर वे फैसले भी किए जा सकते हैं जो नियमानुसार नहीं होते हैं। जिन पर कार्मिक विभाग व न्यायालय के फैसलों की नजीर भी सामने हो।
यह है नजरी
आपको बता दें कि सप्ताह भर पहले ही जयपुर में टोडारायसिंह पंचायत समिति में बस्सी ग्राम पंचायत के कनिष्ठ सहायक को कार्य व्यवस्थार्थ लगाने के आदेश पर रोक लगा दी गई। पंचायत समिति के विकास अधिकारी के आदेश पर राजस्थान सिविल सेवा अपील अधिकरण ने यह रोक लगाई थी। अधिकरण के सदस्य शुचि शर्मा व चेतनराम देवड़ा की पीठ ने रोक लगाई। बस्सी ग्राम पंचायत के कनिष्ठ सहायक शंकरलाल धाकड़ की ओर से अपील दायर की गई थी। अधिकरण ने राज्य सरकार, टोंक जिला परिषद सीईओ, पंचायत समिति टोडारायसिंह के बीडीओ व अन्य को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। तबादलों और कार्य व्यवस्थार्थ कार्मिक को लगाने पर रोक के बावजूद, बीडीओ द्वारा 29 अक्टूबर, 2024 को आदेश जारी कर दिया गया था। एडवोकेट लक्ष्मीकान्त शर्मा मालपुरा ने इसमें प्रार्थी पक्ष की ओर से पैरवी की।


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By desk 24newsupdate

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