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आस-पास भी देखें, कोई अमीरजादा हिट एंड रन में छूट तो नहीं गया, पुणे पोर्श केस के बाद चली देशव्यापी मुहीम, पुणे में सरकारी अस्पताल में बदला गया सैंपल, नाबालिग के बिल्डर पिता ने डॉक्टरों को दी 3 लाख की घूस दी, ब्लड सेंपल बदले

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24 न्यूज अपडेट उदयपुर/जयपुर। 18 मई की रात को पूणे में पोर्श कार एक्सीडेंट केस हुआ था जिसके बाद हिट एंड रन मामले में पूरे सिस्टम ने जो वीआईपी ट्रीटमेंट दिया और हत्यारों का सपोर्ट किया, उससे देश की कानून व्यवस्था की पोल खुल गई है। स्थानीय विधायक का सुबह 6 बजे थाने आना, थाने में हत्या करने वाले को पिज्जा सर्व होना, 24 घंटे से पहले बेल मिल जाना। बच्चे के दादा का ड्राइवर को बंधक बनाना, दबाव बनाना कि वो एक्सीडेंट अपने माथे पर ले ले। और तो और अस्पताल में सस्पेंड डाक्टरों द्वारा 3 लाख की घूस लेकर ब्लड सेंपल तक बदल देना। यही नहीं सजा के तौर पर शहजादे को 300 शब्दों का निबंध लिखने का पनिशमेंट। यह सब बताता है कि सब कुछ बिका हुआ है। इस घटना के बाद यदि सोशल मीडिया पर दबाव नहीं बनता तो ये सभी किरदार सामने ही नहीं आते। मगर अब आ गए हैं तो पूरे देश में एक मुहिम चली हुई है कि आप भी जरा अपने आस-पास देखें कि कहीं कोई हिट एंड रन केस में अमीरजादा आपके शहर में ऐसा तो करके नहीं चला गया हैं। जैसे कहीं कोई किसी को अपनी गाड़ी से हिट करके भाग गया हो और अब तक मुंह छिपाता फिर रहा हो। कहीं किसी सिस्टम ने सपोर्ट करते हुए बडे बडे सुबूतों से छेड़छाड़ तो नहीं कर दी हो। कहीं कोई फेक वाहन या ड्राइवर तो खड़ा नहीं कर दिया हो। या फिर पैसों और पावर के दम पर कहीं किसी ने तथ्यों को ही तो नहीं बदल दिया हो। यदि ऐसा है और आपके पास भी कोई सुबूत है तो फिर उठ खड़े होइये क्यांंकि अगला नंबर आपका हो सकता हैं। सोशल मीडिया की इस मुहीम को व्यापक समर्थन मिलने के बाद यह सामने आया है कि कुछ मामलों में तत्काल एक्शन हो गए हैं जो बरसों से पेंडिंग थे। सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर कह रहे हैं कि चाहे कोई कितना भी पावरफुल क्यों ना हो, पूरा सिस्टम उसके साथ क्यों न हो। जनता जिस दिन चाहेगी, न्याय तो होकर रहेगा।
पूणे के मामले में भी लगातार नए खुलासे हो रहे हैं। पुलिस कमिश्नर अमितेश कुमार ने बताया कि नाबालिग आरोपी के पिता ने बेटे की शराब पीने की बात छिपाने के लिए ब्लड सैंपल बदलवाया था। पिता विशाल अग्रवाल ने सरकारी अस्पताल के कर्मचारी को 3 लाख रुपए दिए थे। उसने फोरेंसिक हेड डॉ. अजय तावरे और डॉ. श्रीहरि हैलनोर तक ये रकम पहुंचाई थी। पिता ने डॉ. अजय तावरे से इसके लिए फोन पर बात भी की थी। हैलनोर ने पुलिस के सामने कबूला कि डॉ. तावरे के कहने पर ही उसने ओरिजनल ब्लड सैंपल डस्टबिन में फेंका था। इसके बाद उसने किसी अन्य शख्स के ब्लड सैंपल से रिपोर्ट बनाई, जिससे नाबालिग के नशे में होने की बात छिपाई जा सके। दोनों डॉक्टर और कर्मचारी अतुल घटकांबले को गिरफ्तार कर लिया गया है। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि टिंगरे ने पुणे पुलिस की जांच में हस्तक्षेप करने की कोशिश की थी। टिंगरे ने पुलिस को फोन कर नाबालिग पर कम सख्ती करने की मांग की थी। हालांकि, टिंगरे ने इन सब आरोपों को निराधार बताया है। मामले में जांच के लिए सोमवार रात 3 मेंबर की कमेटी भी गठित की गई है। महाराष्ट्र मेडिकल एजुकेशन के कमिश्नर राजीव निवतकर ने कमेटी के गठन का आदेश जारी करने के बाद ससून अस्पताल के डीन डॉ. विनायक काले को जांच में सहयोग करने का आदेश दिया। पुलिस कमिश्नर अमितेश कुमार ने कहा कि घटना के बाद हमने नाबालिग के ऐल्कोहॉल ब्लड टेस्ट 2 अलग-अलग अस्पताल में कराए थे। ससून अस्पताल में कराई गई जांच में रिपोर्ट निगेटिव आई थी, लेकिन दूसरे अस्पताल से मिली रिपोर्ट से उसके नशे में होने की पुष्टि हुई थी। पब के सीसीटीवी में भी वह शराब पीते दिखा था।

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