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पुलवामा केस का डर दिखाकर बुजुर्ग दंपती को 72 घंटे डिजिटल अरेस्ट रखा, 15 लाख की एफडी तुड़वाने का दबाव

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24 News Update चित्तौड़गढ़। साइबर ठगों ने पुलवामा हमले के मामले में नाम आने का डर दिखाकर एक बुजुर्ग दंपती को करीब 72 घंटे तक डिजिटल अरेस्ट करके रखा। ठगों ने खुद को दिल्ली और पुणे पुलिस का अधिकारी बताते हुए दंपती को वीडियो कॉल पर निगरानी में रखा और 15 लाख रुपए की एफडी तुड़वाकर पैसे ट्रांसफर कराने का दबाव बनाया। मामले में पीड़ित महिला ने चित्तौड़गढ़ के साइबर थाने में लिखित शिकायत दी है।
पीड़िता ने बताया कि शनिवार को एक फोन कॉल आया, जिसमें कॉल करने वाले ने खुद को दिल्ली पुलिस का अधिकारी बताया और कहा कि पुलवामा मामले में उनके नाम से केनरा बैंक का डेबिट कार्ड और एक सिम जारी हुई है, जिसका इस्तेमाल धोखाधड़ी में किया गया है। कुछ देर बाद दूसरे व्यक्ति ने खुद को पुणे पुलिस का अधिकारी बताकर लंबी पूछताछ शुरू कर दी।
ठगों ने दंपती को बताया कि उनके बैंक खाते में करीब 3 करोड़ रुपए का संदिग्ध लेन-देन हुआ है और जांच चल रही है। इसी बहाने उन्होंने आधार कार्ड, बैंक खाते और एफडी की जानकारी ले ली। इसके बाद दंपती को यह कहकर डराया गया कि जांच पूरी होने तक उन्हें किसी से बात नहीं करनी है।
पीड़िता के अनुसार ठग लगातार वीडियो कॉल पर जुड़े रहे और फोन टेबल पर सामने रखने को कहा, ताकि वे हर समय नजर रख सकें। दंपती को केवल जरूरी काम के लिए ही उठने दिया जाता था। ठग बार-बार कहते रहे कि यह पुलिस जांच का हिस्सा है और नियम नहीं मानने पर जेल हो सकती है।
इसके बाद ठगों ने जांच के नाम पर सिक्योरिटी चार्ज जमा कराने और एफडी तुड़वाकर आरटीजीएस करने का दबाव बनाया। डर के कारण दंपती बैंक पहुंचे और एफडी तुड़वाने की प्रक्रिया शुरू कर दी।
जब वे एसबीआई की मीरानगर शाखा में करीब 15 लाख रुपए ट्रांसफर कराने लगे, तभी उन्हें शक हुआ कि पुलिस किसी अज्ञात खाते में पैसे क्यों डलवा रही है। उन्होंने दूसरे मोबाइल से अपनी बेटी को फोन किया। बेटी ने तुरंत इसे साइबर ठगी बताते हुए पैसे ट्रांसफर रोकने और ठगों के नंबर ब्लॉक करने की सलाह दी।
दंपती ने बैंक अधिकारियों को पूरी जानकारी दी। बैंक के सहयोग से समय रहते ट्रांजैक्शन रोक दिया गया और करीब 15 लाख रुपए साइबर ठगी से बच गए। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि कोई भी एजेंसी या पुलिस अधिकारी वीडियो कॉल पर निगरानी रखकर पैसे ट्रांसफर करने को नहीं कहता, इसलिए ऐसे कॉल आने पर तुरंत सतर्क रहें और साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं।

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