उदयपुर। वन विभाग की जमीन पर अतिक्रमण का एक हाई प्रोफाइल मामला सामने आया है। मामले के रातोंरात सेटल होने और उसमें राजसमंद वाली मैडम के ससुरजी का नाम आने के आज खूब चर्चे हो रहे हैं। बताया जा रहा है कि जमीन वन विभाग की है। इस पर रातों-रात बुलडोजर चलावा कर समतल करने और अतिक्रमण का प्रयास हो रहा था। विभाग के जागरूक कर्मचारियों ने मौके पर पहुंच रोकने का प्रयास किया तो उन पर पथराव हो गया। बडी मुश्किल से जेसीबी के पीछे छिपकर जान बचाई। मौके पर मौजूद अतिक्रमीएक जेसीबी को लेकर भाग गए। वन विभाग का दस्ता जैसे ही कार्रवाई को आगे बढ़ा, पता चला कि मामला राजसमंद वाली मैडम के ससुरजी का है। कार्रवाई के नाम पर सबको सांप सूघ गया। ऊपर से कॉल आ गए कि अभी ठंड रखो, मामला मत बनाओ। सुबह तक तो पूरा मामला सेटल हो गया। जैसे मौके पर कुछ हुआ ही नहीं था। मगर रात के फोटो गवाही दे रहे हैं कि मौके पर बहुत कुछ हुआ था। इस मामले में पत्थर खाने वाले कर्मचारियों में अंदरखाने जबर्दस्त आक्रोष है। दूसरी तरफ मोटी कुर्सी पर बैठे विभाग के अफसर राजनीति के बोझ तले ऐसा दब गए हैं कि आगे की कार्रवाई करना तो दूर, मीडिया से बात तक कर पाने का साहस नहीं जुटा पा रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि चाहे जो हो, कार्रवाई तो होनी ही चाहिए, कितना भी पावरफुल ग्रुप हो, कुछ तो सबक मिलना ही चाहिए।
फिलहाल सूत्रों के अनुसार मामले की जांच ही चल रही है व आगे भी जांच के लंबा खिंचने की संभावना है। आपको बता दें कि शहर से सटी वन विभाग की बांकी वन खंड की गोवर्धनविलास के पीछे की जमीन पर अतिक्रमण का प्रयास हुआ। वन विभाग का दल सूचना मिलने पर बुधवार रात करीब 10 बजे मौके पर गया तो देखा कि पहाड़ की खुदाई चल रही है। एक कार में कुछ लोग बैठ कर निगरानी कर रहे हैं। विवादित जमीन को आनन-फानन में समतल किया जा रहा था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार फोरेस्टर नारायण कुमावत, गार्ड जवानलाल मीणा और मूकसिंह मौके पर गए। पूछताछ की तो बुलडोजर चालकों ने पथराव करना आरंभ कर दिया। इसके बाद क्षेत्रीय वन अधिकारी विजेंद्र सिंह सिसोदिया भी रेंज के 25 जवानों व कर्मचारियों को लेकर मौके पर गए। इस बीच खुदाई करने वाले दुस्साहस दिखाते हुए एक बुलडोजर लेकर भाग गए व एक के तार काट गए ताकि स्टार्ट नहीं हो सके। विभाग के कर्मचारियों ने दो बुलडोजरों की चाबी निकाल ली। लेकिन सुबह तक राजनीति की ऐसी चाबी घूमी कि मामला सेटल हो गया, जैसे रात को कुछ हुआ ही नहीं था। विवादित जमीन राजसमंद वाली मैडम के ससुरजी की बताई जा रही है। यह भी कहा जा रहा है इसके पास ही वन विभाग की जमीन भी है जिस पर कब्जे के प्रयास का कथित खेल चल रहा है। राजसमंद वाली मैडम का नाम आते ही अधिकारियों ने पंगा लेना मुनासिब नहीं समझा और मामला किसी निर्णायक मोड़ तक पहुंच ही नहीं पाया। बताया गया कि मैडम और अधिकारियों के बीच इस मामले में कल कई बार बात हुई जिसमें आरोप-प्रत्यारोप के दौर चले। अधिकारी ने भी एक हद तक अपनी टीम का बचाव किया मगर बाद में हाथ खड़े कर दिए और ज्यादा पॉलिटिकल पंगा लेना उचित नहीं समझा। दोपहर में टीम को बुला कर कह दिया कि मैं खुद भी समझ गया हूं, आप भी अच्छी तरह से समझ जाइये।
नेताओं और अफसरों की मेहरबानी से कट रहे हैं पिता तुल्य पहाड़
शास्त्रों में पहाड़ों का पिता दर्जा दिया गया है और अरावली पर्वत शृंखला के पहाड़ दुनिया के सबसे पुराने व सबसे मजबूत पहाड़ हैं। खरबों वर्षों में इनका निर्माण हुआ है और उदयपुर की जनता केवल कुछ ही बरसों में इन्हें कटता व गायब होता देख रही है। ये पहाड़ शहर की शान हैं व सच कहें तो पूरे शहर की जान हैं। जानकारों का कहना है कि यदि पहाड़ यूं ही कटते रहे तो आने वाले समय में शहर का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ना तय है। अभी नेताओं, अफसरों और भूमि दलालों की मेहरबानी से रोज पहाड़ों की हत्या हो रही है। सुप्रीम कोर्ट पहले ही कह चुका है कि अरावली के 100 से ज्यादा पहाड राजस्थान में गायब हो चुके हैं।


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