24 न्यूज अपडेट उदयपुर। हिरण मगरी थाना क्षेत्र के सेवाश्रम पुलिया के नीचे गुरुवार को बाइक सवार दूध वाले पर अचानक एक पेड़ गिर गया जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गया। कल अशोकनगर में एक पेड़ गिरा था। उससे कुछ घंटों पहले ही नंद भवन के पास एक कार पर पेड़ गिरा था। उससे पहले तूफान में कई सारे पेड़ गिर गए। हादसों की फेहरिस्त लंबी है और आगे भी यह सिलसिला इसलिए चलता रहेगा क्योंकि शहर के अधिकारी और नेता गहरी नींद सोए हुए हैं। आपदा प्रबंधन के नाम पर शहर में मजाक चल रहा हैं मानूसन सिर पर हैं और रोज पेड़ गिरने की घटना हो रही है। जिला प्रशासन, नगर निगम और यूआईटी जैसे भारी भरकम लवाजमे वाली जनता की सेवा करनी वाले निकाय-संस्थाएं अपनी जिम्मेदारी में नाकाम व नाकारा साबित हुए हैं। आधी में पेड़ गिरते ही सतर्क हो जाना चाहिए था मगर लगता है अभी मीटिंग और मंथन के बीच और कई हादसों के बाद जिम्मेदार चेतेंगे। प्रशासन व निकायों के पास ऐसा कोई डेटा या सर्वे नहीं है कि शहर में कितने ऐसे पेड़ हैं जो गिरने की स्थिति में हैं। उनका रिस्क असेसमेंट क्या है। उनकी छंगाई हुई है या नहीं। लोग शिकायत कर-करके थक रहे हैं मगर मजाल कि तत्काल कोई कार्रवाई हो जाए। पेड़ गिरेंगे, आम आदमी गंभीर घायल होगा तो चल जाएगा मगर लोग कह रहे हैं कि जिस दिन किसी वीआईपी पर पेड़ गिर गया, उस दिन कानून कायदे भी याद आ जाएंगे और अचानक आपदा राहत प्रबंधन के सिलसिले भी शुरू हो जाएंगे। झुके हुए पेड़ों को देखने के लिए किसी अंतरदृष्टि की जरूरत नहीं है। ये मन की आंखों से नहीं, खुली आंखों से देखे जा सकते हैंं। यह बात अलग है कि कोई आंखें खोलना ही नहीं चाह रहा है तो फिर उसकी किया ही क्या जाए। झुके हुए पेड़, जर्जर इमारतें, जगह-जगह मौत बनकर तने हुए होर्डिंग, ये सब साफ दिखा रहे हैं कि व्यवस्थाओं में ना सिर्फ कमी है बल्कि गंभीर किस्म की लापरवाही भी है। सेवाश्रम की ही बात लें। रोज की तरह दूध वाला बाइक पर सेवाश्रम पुलिया के नीचे से गुजर रहा था। तभी किनारे पर लगा पेड़ अचानक बाइक सवार पर गिर गया। पेड़ पास ही बावजी के स्थान पर लगा हुआ था। पेड़ पूरी तरह सूख चुका था। बावजी के यहां लोगों की बड़ी संख्या में आवाजाही होती है और सुबह-शाम इस व्यस्त चौराहे पर बडी संख्या में लोग खड़े रहते हैं। हादसा बड़ा भी हो सकता था। इससे सीख लेकर प्रशासन और निकाय कोई कार्रवाई करेगा, इसमें संदेह है। ऐसे में लोगों को ही अपने स्तर पर ऐसे जर्जर पेड़ों के खिलाफ मुहीम चला कर बार-बार फालतू के मुद्दों की तरफ ध्यान डाइवर्ट करने वाले नेताओं का ध्यान इस असल मुद्दे पर केंद्रित करना होगा। विधायक और मेयर साहब चाहें तो इस मुहीम का नेतृत्व कर सकते हैं। यह मुद्दा आयड़ के सौंदर्यीकरण, डिवाइडरों को बार-बार तोड़कर नया बनाना, बोटलने खोल कर वाहवाही पाना आदि से ज्यादा जरूरी और तात्कालिक है।
आज दूध वाले के सिर पर गिरा, कल नेता या अधिकारी पर भी गिर सकता है पेड़

Advertisements
