24 न्यूज अपडेट उदयपुर। क्या आपने हाल ही में बिजली का कनेक्शन कटवाया है। क्या आपने पांच सा दस साल पहले कनेक्शन कटवाया था। यदि हां तो क्या धरोहर राशि बिजली निगम के दफ्तर से वापस ली। यदि नहीं तो ये खबर आपकी आंखें खोलने वाली है। इसे पढ़िये ओर तुरंत एप्लीकेशन देकर बिजली निगम से अपनी राशि को वसूल कीजिए।
बिजली निगम के गुलाबबाग वाले पावर हाउस के दफ्तार में धरोहर राशि के 87 लाख रूपए जमा हैं। विभाग जनता के इन पैसों के ब्याज का आनंद ले रहा है। देश के विख्यात आरटीआई एक्टिविस्ट और जनता से जुड़े मुद्दों पर सशक्त पैरवी करने वाले वरिष्ठ पत्रकार जयवंत भैरविया की आरटीआई से यह खुलासा हुआ है कि बिजली निगमों के दफ्तरों में लाखों की धरोहर राशि पड़ी है जो लौटाई नहीं गई है। भैरविया ने उदयपुर में गुलाबबाग पावर हाउस में आरटीआई लगाई व पूछा कि —–
(1) उदयपुर के गुलाब बाग पॉवर हॉउस क्षेत्र में आज दिनाँक तक स्थाई रूप से कटे विद्युत कनेक्शनों की कुल जमा धरोहर राशि की सूचना प्रदान की जाए एवं इस धरोहर राशि पर कुल प्राप्त होने वाले मासिक ब्याज की सूचना प्रदान की जाए।
(2) उदयपुर के गुलाब बाग पॉवर हॉउस क्षेत्र में आज दिनाँक तक स्थाई रूप से कटे विधूत कनेक्शनों की कुल जमा धरोहर राशि की सूचना प्रदान की जाए जो आज दिन तक किसी को लौटाई नहीं गई है एवं इस धरोहर राशि पर कुल प्राप्त होने वाले मासिक ब्याज की सूचना प्रदान की जाए।
(3) उदयपुर के गुलाब बाग पॉवर हॉउस में विद्युतत कनेक्शन हेतु जमा कराई जाने वाली धरोहर राशि किस मद में जमा करवाई जाती है, सूचना प्रदान की जाए।
(4) धरोहर राशि पुनः प्राप्त करने हेतु न्यूनतम आवश्यक दस्तावेजो की सूचना प्रदान की जाए।
आरटीआई के जवाब से उदयपुर के गुलाबबाग पॉवर हॉउस से जुड़ा बड़ा खुलासा हुआ है। कनेक्शन स्थाई रूप से काटे जाने पर भी रिफण्डेबल धरोहर राशि नहीं लौटाई जा रही हैं। यहां पर धरोहर राशि के 87 लाख रूपए जमा हो गए हैं। एक सामान्य तर्क के साथ सोचें तो भी यह असंभव लगता है कि आखिर कौन ऐसा महान व्यक्ति होगा जो कनेक्शन को कटवाने के बाद अपनी धरोहर राशि अपनी गाढ़ी मेहनत की कमाई का पैसा यूं ही छोड़ देना चाहेगा। दरअसल इसके लिए नियमों व प्रक्रियाओं की ऐसी जालबंदी तैयार की गई है कि जिसमें उपभोक्ता उलझ कर रह जाता है। या तो गुप्त रूप से उपर से आदेश हैं कि धरोहर राशि वापस नहीं की जाए या फिर एक परिपाटी बना दी गई है कि इतने चक्कर दो कि उपभोक्ता भूल ही जाए कि उसने धरोहर राशि भी जमा करवाई थी। जब भी बिजली का कनेक्शन लिया जाता है तो बदले में एक अमाउंड विभाग सुरक्षित रख लेता है ताकि कभी किन्हीं परिस्थतियों में कोई आर्थिक लेन-देन की बात आए तो विभाग या साधारण शब्दों में कहें तो सरकार को कोई नुकसान नहीं उठाना पड़े। लेकिन सिक्योरिटी अमाउंट की सुरक्षा की तब कोई अहमियत नहीं रह जाती है जब कनेक्शन की कटवा दिया गया हो। यह राशि कनेक्शन काटे जाने पर एवीवीएनएल को पुनः लौटाना होती है, कई बार जानकारी के अभाव में और कभी एवीवीएनएल की चालाकियों के कारण ये राशि उपभोक्ताओं को पुनः प्राप्त नहीं हो रही है। ऐसे में एवीवीएनएल के खतों में जमा लाखों व करोड़ो की राशि पर ब्याज का लाभ भी एवीवीएनएल ही प्राप्त करता है। याने मुफ्त का चंदन,घिस मेरे नंदन वाली स्थिति हो रही हैं
चौकाने वाला आंकड़ा गुलाब बाग पॉवर हॉउस से जुड़ा हुआ है। जयवंत भैरविया की आरटीआई से पता चला है कि केवल एक पावर हाउसे में लगभग 87 लाख की राशि विभाग के खाते में है जो पुनः लौटाई नहीं गई है, जबकि विभाग को जिम्मेदारी और नैतिकता दिखाते हुए इस राशि को पुनः लौटाया जाना था। आम नागरिकों की जागरूकता की जरूरत है नही तो विभागों की नीयत आम जनता के पैसे हजम करने वाली ही नजर आती है।
सभी विभाग जनता के हितों में ही काम कर रहे हैं व यही उनका ध्येय है। ऐसे में जब कनेक्शन लेते समय धरोहर राशि देने की अनिवार्यता है तो कनेक्शन काटते ही हाथोंहाथ धरोहर राशि को वापस करने की अनिवार्यता क्यों नहीं है?? यह बड़ा सवाल है। इसमें कहा ंपर चूक है यह तो सरकारी स्तर पर गहरी जांच का विषय है व इसमें दोषियों पर कार्रवाई भी की जानी चाहिए। होना यह चाहिए कि जैसे ही कनेक्शन काटने का फार्म विभाग को प्राप्त हो, उसके साथ ही उपभोक्ता का एक कैंसल चेक ले लिया जाए ताकि उसके खाता नंबरों पर सीधे ही धरोहर राशि का हस्तांतरण हाथोंहाथ किया जा सके। इतने सालों से धरोहर राशि जमा होना साफ दिखा रहा है कि विभाग के अधिकारियों ने अपने चलताउ रवैये के कारण कभी जनहित में सोचा ही नहीं। यह नहीं सोचा कि विभाग आखिर किस हक से जनता के पैसों की ब्याज खा रहा हैं। ऐसे में यदि कानूनी उपचारों के माध्यम से राशि को क्लेम किया जाए तो हो सकता है कि विभाग को ब्याज सहित रकम अदा करनी पड़ जाएगी।
भैरविया ने बताया कि पिछले दिनों एक वरिष्ठ नागरिक के सामने यही समस्या आई। वे बरसों से धरोहर राशि की डिमांड कर रहे थे, विभाग गोली पर गोली दे रहा था। आखिरकार जब नोटिस दिया और सख्ती दिखाई तो धरोहर राशि में से कुछ पैसा काट कर रिफंड किया गया। पैसा क्यों कटा, बताया नहीं गया। इतने सालों का ब्याज कौन देगा, अधिकारी जवाब नहीं दे रहे। इसके अलावा निगम के अधिकारी बार-बार मूल जमा राशि की रसीद मांग रहे हैं जो एक भद्दा मजाक है। भाई, कनेक्शन निगम ने दिया, पैसा निगम ने वसूला, बरसों तक निगम ने बिल जारी किए तो क्या उसके पास यह रिकॉर्ड भी नहीं है कि कितनी धरोहर राशि जमा करवाई। जबकि यह राशि बिलों में मेंशन की जा रही है। इतने बचकाने एक्सक्यूज देने के बाद भी कैसे अधिकारी बच रहे हैं यह जांच का विषय है।
ऐसे में जनता को तो जागरूक होना ही होगा, यहां के जन प्रतिनिधियों सांसद व विधायक को भी बिजली निगम के अधिकारियों से सख्ती से पूछा होगा कि धरोहर राशि पर कुंडली मार कर क्यों बैठे हो। ऐसी व्यवस्था क्यों नहीं कर रहे कि इधर कनेक्शन कटे, उधर राशि वापस कर दी जाए। जो राशि जमा है वह उसके हकदारों के पास जाने की क्या व्यवस्था है। वे लौटाने की मंशा भी रखते हैं या नहीं। यदि इस मामले में उदयपुर का ही पूरा डेटा आ जाए तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आ जाएंगे। ऐसे में पूरे राज्य में कितनी धरोहर राशि पर कुंडली मार ली गई है यह तथ्य सचमुच चिंता में डालने वाला है। भैरविया ने कहा कि उम्मीद है कि बिजली निगम खुद पहल करते हुए धरोहर राशि को उनके हकदारों तक जरूर पहुंचाएगा।


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By desk 24newsupdate

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