24 News ujpdate ओसाका। वर्ल्ड एक्सपो 2025 के भव्य मंच पर भारत की उपस्थिति एक तकनीकी प्रदर्शन नहीं, बल्कि भावनात्मक और सांस्कृतिक जुड़ाव की जीवंत मिसाल बन गई है। जापान के यूमेशिमा द्वीप पर चल रहे इस वैश्विक आयोजन में ‘इंडिया पवेलियन’ का ‘भारतीय रेल सप्ताह’ जैसे-जैसे अपने अंतिम दिन की ओर बढ़ा, वैसे-वैसे वहाँ उमड़ते दर्शकों की भीड़ और उनकी प्रतिक्रिया ने यह सिद्ध कर दिया कि भारतीय रेलवे अब केवल परिवहन नहीं, एक आत्मीय संवाद बन चुका है।
वंदे भारत के आगे सेल्फी, पीछे संस्कृति की परछाई
पवेलियन के केंद्र में सजी सफेद-नीली वंदे भारत एक्सप्रेस के मॉडल के आगे जापानी परिवार बड़े उत्साह से सेल्फियाँ ले रहे हैं। बच्चों की आंखों में जिज्ञासा है, युवा तकनीकी विशेषताएं पढ़ रहे हैं और बुज़ुर्ग इसकी बनावट की तारीफ कर रहे हैं। इस दृश्य को देखकर ओसाका की एक छात्रा अकीको तनाका मुस्कराते हुए कहती हैं, “मुझे नहीं पता था कि भारत में इतनी तेज और खूबसूरत ट्रेनें चलती हैं! यह सचमुच कमाल है।” और फिर ‘नमस्ते’ कहकर भारतीय परंपरा को आत्मसात करती हैं।
चिनाब ब्रिज: स्टील में बसा संकल्प
भारतीय इंजीनियरिंग का गौरव चिनाब ब्रिज, जिसका मिनिएचर मॉडल यहाँ प्रदर्शित है, दर्शकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। लोग नीचे झुककर इसके विभिन्न कोणों से फोटो खींचते हैं। नागोया के एक सेवानिवृत्त इंजीनियर बताते हैं, “यह केवल एक पुल नहीं, संरचनात्मक चमत्कार है जो हिमालय जैसे कठिन भू-भाग में खड़ा है। अविश्वसनीय!”
रेलवे नहीं, जीवन की जीवंत कहानी
इंडिया पवेलियन का रेलवे खंड केवल मशीनों की प्रदर्शनी नहीं, बल्कि भावनाओं का विस्तार है। ऑगमेंटेड रियलिटी, वर्चुअल प्रोजेक्शन, और इमर्सिव टूर दर्शकों को भारत के पहाड़ों, जंगलों, मैदानों और रेगिस्तानों की यात्रा पर ले जाते हैं। 359 मीटर ऊँचाई पर स्थित चिनाब ब्रिज और अंजी खड्ड ब्रिज जैसे निर्माण केवल तकनीकी चमत्कार नहीं, राष्ट्रीय संकल्प और मानवीय जिजीविषा के प्रतीक बनकर उभरे हैं।
चाय की महक, हिंदी में उद्घोषणाएं और इंजन की घरघराहट के साथ सजे एक भारतीय रेलवे स्टेशन के जीवंत पुनर्निर्माण ने तो जापानी दर्शकों को भावविभोर कर दिया। यह तकनीक नहीं, बल्कि भारत के दिल की धड़कन बन गई।
“नमस्ते इंडिया”: जब संस्कृतियाँ झुक कर मिलीं
एक भावनात्मक क्षण तब आया जब जापानी स्कूली बच्चों के समूह ने “नमस्ते इंडिया” कहकर भारतीय वालंटियर्स को अभिवादन किया और भारतीय रेल नेटवर्क के डिजिटल मानचित्र के सामने ग्रुप सेल्फी ली। कुछ दर्शकों ने वालंटियर्स को ओरिगामी क्रेन भेंट की, तो कुछ ने “वंदे भारत” और “चिनाब” शब्दों को उच्चारित कर सीखने का प्रयास किया। स्थानीय निवासी का कथन मन को छूता है: “यह केवल रेल नहीं, बल्कि भारत के सपनों की कहानी है – जो आगे बढ़ रही है।”
थीम से मेल खाती भारत की प्रस्तुति
एक्सपो 2025 की थीम – “हमारे जीवन के लिए भविष्य का समाज” – में जीवन को जोड़ने और सशक्त बनाने का संदेश है, जिसे भारतीय पवेलियन ने बख़ूबी साकार किया है।
सौर ऊर्जा से संचालित स्टेशन, AI आधारित ट्रैफिक नियंत्रण, 2030 तक शत-प्रतिशत विद्युतीकरण का लक्ष्य और जल संरक्षण के उपाय – यह सब इंटरेक्टिव डिस्प्ले और डिजिटल टाइमलाइन में प्रदर्शित हैं, जिन्हें हर आयु वर्ग सहजता से समझ पा रहा है।
अंतिम क्षण: जब तकनीक और परंपरा ने मिलकर रचा संगम
जैसे-जैसे सूर्यास्त की लालिमा यूमेशिमा के आकाश पर फैलती है, इंडिया पवेलियन में भीड़ ज्यों की त्यों बनी रहती है। मसाला चाय की सुगंध और दूर से आती ट्रेन की सीटी की आवाज़ माहौल को जीवंत बनाए रखती है। मैं जब वंदे भारत मॉडल के सामने तस्वीर ले रहा था, तो एक जापानी बच्चा कंडक्टर की तरह हाथ उठाकर मुस्कराता है – मानो एक नई पीढ़ी भारत से जुड़ रही हो। उसके माता-पिता झुककर कहते हैं – “धन्यवाद, आपने हमें भारत का यह रूप दिखाया।”
एक सांस्कृतिक पुल बनती भारतीय रेल
इस एक्सपो में भारतीय रेलवे ने खुद को केवल एक लॉजिस्टिक सिस्टम नहीं, बल्कि सांस्कृतिक सेतु के रूप में प्रस्तुत किया है – जो तकनीक, परंपरा, स्टील और मुस्कान के संगम से भारत को दुनिया से जोड़ता है। आज जब विश्व ‘सस्टेनेबिलिटी’ और ‘इन्क्लूज़िव डेवेलपमेंट’ की बात कर रहा है, भारत की रेल प्रणाली यह सिखा रही है – यह यात्रा अकेले नहीं होती, यह साथ चलने से होती है।

