दक्षिण राजस्थान के जलाशयों में जलस्तर गिरा, औसतन 20% से भी कम भराव — 13 बांध पूरी तरह सूखे
24 न्यूज अपडेट, उदयपुर। जल संसाधन विभाग, उदयपुर ज़ोन द्वारा 1 जुलाई 2025 को जारी आंकड़ों के अनुसार, मानसून की धीमी चाल के कारण उदयपुर, राजसमंद, भीलवाड़ा और चित्तौड़गढ़ जिलों में जल संकट की स्थिति बनती जा रही है। ज़ोन के अधीनस्थ 32 प्रमुख बांधों में औसतन जल भराव सिर्फ 19.70 प्रतिशत है। जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 32.18 प्रतिशत था, यानी इस बार लगभग 12.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।
जिलेवार स्थिति का विस्तृत विश्लेषण:
1. उदयपुर ज़िला: औसत भराव 41.77%
- जयसमंद: 173.25 एमसीयूएम पानी के साथ 41.73% भरा। पूर्ण भराव क्षमता 415.13 एमसीयूएम है।
- उदयसागर: 14.87 एमसीयूएम जल संग्रहण (47.71%)।
- स्वरूप सागर: 9.37 एमसीयूएम (68.44%) – सबसे ज्यादा भराव वाला बांध।
- फतेहसागर: 63.80% भराव के साथ शहर के लिए राहतदायक स्थिति में।
- बगोलिया और वल्लभनगर: क्रमशः 2.93% और 26.53% पर, बेहद कम भराव।
2. राजसमंद ज़िला: औसत भराव 17.68%
- राजसमंद: 42.89 एमसीयूएम जल (39.98%) भराव के साथ सबसे बेहतर स्थिति में।
- नंदसमंद: मात्र 2.78 एमसीयूएम पानी (13.06%)।
- माताजी का खेड़ा: पूरी तरह सूखा – 0% जल भराव।
3. भीलवाड़ा ज़िला: औसत भराव 13.37%
- कोठारी बांध: 63.28% भराव के साथ जिले में सबसे बेहतर स्थिति में।
- जेतपुरा: 8.52 एमसीयूएम (45.92%)।
- मेजा: मात्र 6.60% पर, जो पिछली बार 18% था।
- अरवार, खारी, नाहर सागर, कण्याखेड़ी, सारेरी, उमेद सागर – सभी 0 से 5% या पूरी तरह सूखे।
4. चित्तौड़गढ़ ज़िला: औसत भराव 14.27%
- बासी बांध: 50.78% भराव के साथ प्रमुख स्रोत।
- ओराई, बदगोवन, मटरी कुंडिया: 19–30% तक जल भराव।
- भूपाल सागर, दिंदोली, बानाकिया, संवारिया सरोवर, कपासन, धामना – सभी 0% जल स्तर पर।
- कुल 11 बांधों में से 6 पूरी तरह सूखे हुए।
विश्लेषण और प्रभाव:
- 32 में से 13 बांध (40%) में जल स्तर 0% है — ये सभी पूरी तरह सूखे हैं। इनमें भीलवाड़ा और चित्तौड़गढ़ जिले सर्वाधिक प्रभावित हैं।
- 10 बांध ऐसे हैं जिनमें जल भराव 10% से भी कम है, जो पीने के पानी और सिंचाई दोनों के लिए अपर्याप्त है।
- सिर्फ 3 बांध (स्वरूप सागर, फतेहसागर, कोठारी) ऐसे हैं जिनमें 60% से अधिक जल भराव है।
- शून्य डिस्चार्ज: सभी बांधों से फिलहाल कोई बहाव नहीं हो रहा, जिससे साफ है कि जल स्तर सतह के नीचे ही बना हुआ है।
संभावित संकट:
- शहरी क्षेत्रों में जल आपूर्ति के लिए फिलहाल चिंता नहीं, लेकिन दीर्घकाल में समस्या हो सकती है यदि वर्षा नहीं हुई।
- ग्रामीण क्षेत्रों में टैंकर आधारित आपूर्ति बढ़ाई जा सकती है।
- कृषि पर प्रभाव: खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित हो सकती है। सिंचाई जल की अनुपलब्धता से उत्पादकता में गिरावट आ सकती है।
- भविष्य के लिए चेतावनी: यदि अगले 10-15 दिनों में मानसून सक्रिय नहीं हुआ, तो सितंबर तक स्थिति गंभीर हो सकती है।
🟢 उदयपुर ज़िला (8 बांध)
| बांध | जल भराव (MCum) | क्षमता (%) |
|---|---|---|
| जयसमंद | 173.25 / 415.13 | 41.73% |
| उदयसागर | 14.87 / 31.17 | 47.71% |
| वल्लभनगर | 8.09 / 30.49 | 26.53% |
| सोमकागदर | 12.68 / 36.21 | 35.02% |
| बगोल्या | 0.57 / 19.44 | 2.93% |
| स्वरूप सागर | 9.37 / 13.69 | 68.44% |
| फतहसागर | 7.72 / 12.10 | 63.80% |
| औसत भराव | — | 41.77% |
🔵 राजसमंद ज़िला (3 बांध)
| बांध | जल भराव | क्षमता (%) |
|---|---|---|
| राजसमंद | 42.89 / 107.28 | 39.98% |
| माताजी का खेड़ा | 0.00 / 11.93 | 0.00% |
| नंदसमंद | 2.78 / 21.25 | 13.06% |
| औसत भराव | — | 17.68% |
🟡 भीलवाड़ा ज़िला (10 बांध)
| बांध | जल भराव | क्षमता (%) |
|---|---|---|
| मेजा | 5.55 / 84.06 | 6.60% |
| अरवार | 0.00 / 47.95 | 0.00% |
| जेतपुरा | 8.52 / 18.55 | 45.92% |
| कोठारी | 16.48 / 26.05 | 63.28% |
| खारी, कणिया खेड़ी, नाहर सागर, सरेरी | सभी 0.00% | |
| उम्मेद सागर | 0.52 / 17.78 | 2.94% |
| औसत भराव | — | 13.37% |
विशेष: कोठारी और जेतपुरा में स्थिति संतोषजनक है, अन्यथा अधिकांश बांध लगभग शुष्क हैं।
🔴 चित्तौड़गढ़ ज़िला (11 बांध)
| बांध | जल भराव | क्षमता (%) |
|---|---|---|
| बान्सी | 11.79 / 23.22 | 50.78% |
| ओराई | 10.62 / 35.29 | 30.09% |
| बड़गांव | 6.09 / 31.49 | 19.34% |
| मातृकुंडिया | 2.01 / 33.64 | 5.98% |
| भूपाल सागर, डिंडोली, बानाकिया, कपासन आदि | सभी 0.00% | |
| औसत भराव | — | 14.27% |
📉 श्रेणी के अनुसार जलभराव स्थिति:
| जलभराव श्रेणी | बांधों की संख्या |
|---|---|
| 0% (पूर्णतः सूखे) | 13 बांध |
| 0–10% | 6 बांध |
| 10–30% | 5 बांध |
| 30–60% | 5 बांध |
| 60% से अधिक | 3 बांध |
🚫 कोई ओवरफ्लो या जल निकासी नहीं
सभी 32 जलाशयों से 0.00 क्यूसेक (Cumec) पानी का बहाव दर्ज किया गया है। इससे स्पष्ट है कि अभी तक मानसून की कोई उल्लेखनीय बारिश इन क्षेत्रों में नहीं हुई है।

