24 ews update उदयपुर, 7 सितम्बर। विश्व फिजियोथेरेपी दिवस-2025 के उपलक्ष्य में रविवार को शहर के विभिन्न फिजियोथेरेपी महाविद्यालयों की ओर से वॉकाथॉन रैली का आयोजन किया गया। हल्की बारिश के बीच रैली का शुभारंभ राजस्थान विद्यापीठ के कुलपति प्रो. शिवसिंह सारंगदेवोत, प्राचार्य डॉ. शैलेन्द्र मेहता, डॉ. पल्लव भटनागर, डॉ. जफर, डॉ. टीना, डॉ. युनुस और डॉ. दीपक ने हरी झंडी दिखाकर किया। निजी सचिव कृष्णकांत कुमावत ने बताया कि रैली मोतीमंगरी से प्रारंभ होकर फतेहसागर पाल तक निकाली गई। इसमें राजस्थान विद्यापीठ, गीतांजली, पैसिफिक और सनराइज महाविद्यालयों के विद्यार्थी और डॉक्टर शामिल हुए। “स्वस्थ जीवन के लिए फिजियोथेरेपी है बड़ी देन” समारोह को संबोधित करते हुए कुलपति प्रो. सारंगदेवोत ने कहा कि स्वस्थ जीवन ही जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है। स्वास्थ्य बिगड़ने पर उसे ठीक करना बेहद मुश्किल होता है, लेकिन फिजियोथेरेपी एक ऐसी चिकित्सा पद्धति है, जिसके जरिए बिना किसी दवा और बिना साइड इफेक्ट के रोगों का निदान संभव है। उन्होंने कहा कि नियमित अभ्यास और फिजियोथेरेपी से न केवल बीमारियों से बचा जा सकता है बल्कि गिरते स्वास्थ्य को भी सुधारा जा सकता है। “हेल्दी एजिंग” इस वर्ष की थीम विश्व फिजियोथेरेपी महासंघ (WPTF) की इस वर्ष की थीम “हेल्दी एजिंग” पर जोर देते हुए प्रो. सारंगदेवोत ने कहा कि 60 वर्ष के बाद बुजुर्गों की बढ़ती स्वास्थ्य चुनौतियों के समाधान के लिए फिजियोथेरेपी बेहद कारगर है। खेलों में चोटिल खिलाड़ियों को भी फिजियोथेरेपिस्ट बिना दवा के फिर से फिट कर सकता है। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation “स्वरांजलि म्यूजिक ग्रुप ने बॉलीवुड के महान पार्श्वगायक स्व. मुकेश की पुण्यतिथि पर ‘एक प्यार का नगमा…’ संगीतमय कार्यक्रम में प्रस्तुत किए सदाबहार गीत, शहर के कलाकारों ने गीतों की महफिल सजाकर दी भावभीनी श्रद्धांजलि” “जैन सोशल ग्रुप स्वास्तिक ने सामूहिक वंदना एवं क्षमापना के भव्य आयोजन से समाज में भाईचारे समरसता और आध्यात्मिक चेतना का संदेश दिया – चार स्थानकों पर साधु-साध्वियों के सान्निध्य में ‘मिच्छामि दुक्कडम्’ के माध्यम से जागृत हुई आपसी सौहार्द की भावना”