24 News Update उदयपुर। शहर की 104 वर्ष पुरानी शैक्षणिक संस्था विद्या प्रचारिणी सभा में चल रहा प्रबंधन विवाद बुधवार को और तेज हो गया, जब एडहॉक कमेटी के सदस्य जिला कलेक्टर तक पहुंचे और सात दिन से जारी तालाबंदी हटाने की मांग की। दिनभर चली प्रशासनिक कवायद, मौके के मुआयने और निर्देशों के बावजूद मैनेजमेंट कार्यालय के ताले नहीं खुले, जिससे संस्थान में कामकाज पूरी तरह ठप है।
एडहॉक कमेटी के सदस्य एडवोकेट नरेंद्र सिंह कच्छावा ने बताया कि प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए बताया कि संस्था में एक्सटर्नल ऑडिट करवाना जरूरी है और कई सदस्य इसके पक्ष में हैं, लेकिन पूर्व कार्यकारिणी अनावश्यक गतिरोध पैदा कर रही है। कलेक्टर ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तहसीलदार गिर्वा और रजिस्ट्रार कार्यालय से मौके का मुआयना करवाया तथा दोनों पक्षों को स्पष्ट निर्देश दिए कि कानून हाथ में नहीं लिया जाए और शांतिपूर्ण समाधान निकाला जाए। इसके बावजूद शाम तक स्थिति जस की तस बनी रही।
धरना जारी, मगर कब निकलेगा समाधान
इस बीच, 15 अप्रैल से लगातार एडहॉक कमेटी के सदस्य रोजाना सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक संस्थान के मुख्य द्वार के बाहर बैठकर कार्यभार संभालने का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन कार्यालय में प्रवेश नहीं मिल पा रहा। कमेटी का आरोप है कि पूर्व कार्यकारिणी के प्रभाव में न सिर्फ ताले लगाए गए हैं, बल्कि स्टाफ पर भी दबाव बनाया जा रहा है। यहां तक कि जहां सामान्यतः दोपहर 3 बजे छुट्टी होती है, फार्मेसी में कर्मचारियों को शाम साढ़े 5 बजे तक रोके रखा जा रहा है।
दबाव में काम कर रहे थानाधिकारी आदर्श कुमार
विवाद के बीच कानून-व्यवस्था का मुद्दा भी उभरकर सामने आया है। एडहॉक कमेटी ने आरोप लगाया कि 15 अप्रैल को भैरूसिंह निम्बाहेड़ा और सुरेंद्र सिंह आगरिया द्वारा अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया, जिसके संबंध में भूपालपुरा थाने में शिकायत दी गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। कमेटी ने थानाधिकारी आदर्श कुमार पर भी दबाव में काम करने का आरोप लगाया है। वहीं, “महाराणा के खिलाफ बोले गए शब्दों” को लेकर कुछ संगठनों के मैदान में उतरने की तैयारी के संकेत भी मिल रहे हैं, जिससे विवाद और बढ़ सकता है।
व्यवस्थाओं पर हुआ असर
तालाबंदी का सीधा असर संस्था की शैक्षणिक गतिविधियों पर पड़ रहा है। बी.एन. विश्वविद्यालय सहित सभा की अन्य इकाइयों में प्रशासनिक कामकाज प्रभावित है। परीक्षाएं जारी हैं, लेकिन समन्वय और व्यवस्थाएं बाधित हो रही हैं। प्रवेश प्रक्रिया भी प्रभावित होने लगी है, जिससे छात्रों और अभिभावकों में चिंता का माहौल है।
यह है विवाद की पृष्ठभूमि
यदि इस विवाद की पृष्ठभूमि पर नजर डालें तो 12 अप्रैल 2026 को सभा के प्रधान संरक्षक एवं अध्यक्ष विश्वराज सिंह मेवाड़ ने 11 सदस्यीय एडहॉक कमेटी का गठन किया था। इसके अगले दिन 13 अप्रैल को कमेटी के चेयरपर्सन युवराज सिंह झाला ने पूर्व कार्यकारिणी के समक्ष आदेश की मूल प्रति प्रस्तुत कर कार्यभार ग्रहण करने की प्रक्रिया की। उसी दिन जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय ने पुलिस अधीक्षक को एडहॉक कमेटी को सहयोग देने के निर्देश भी जारी किए थे। हालांकि 15 अप्रैल को कमेटी कार्यभार संभालने पहुंची, तो मैनेजमेंट कार्यालय और रजिस्ट्रार कार्यालय पर ताले लगे मिले, जिसके बाद से यह गतिरोध लगातार जारी है। एडहॉक कमेटी का कहना है कि पूर्व कार्यकारिणी का कार्यकाल 12 फरवरी को समाप्त हो चुका है, इसके बावजूद बिना वैध अधिकार के कार्यालय पर कब्जा बनाए रखा गया है। दूसरी ओर, पूर्व सचिव महेन्द्र सिंह आगरिया ने राजस्थान हाईकोर्ट, जोधपुर में एसबी सिविल रिट पिटिशन संख्या 8342/2026 दायर की है, जिस पर 27 अप्रैल को सुनवाई प्रस्तावित है।
विवाद की जड़ में एक्सटर्नल ऑडिट
विवाद की जड़ में एक्सटर्नल ऑडिट को भी माना जा रहा है। 5 मार्च 2026 से सीए टी.आर. अग्रवाल के नेतृत्व में ऑडिट शुरू किया गया था, लेकिन एडहॉक कमेटी का आरोप है कि पूर्व कार्यकारिणी, विशेषकर महेन्द्र आगरिया ने इसमें सहयोग नहीं किया और आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए। 30 मार्च को अध्यक्ष की ओर से निर्देश दिए जाने के बावजूद स्थिति नहीं सुधरी, जिसके बाद 13 अप्रैल को ऑडिटर की अंतरिम रिपोर्ट में असहयोग और संभावित अनियमितताओं का उल्लेख किया गया।
ज्ञापन देने वालों में ये थे शामिल
पूर्व कार्यकारिणी पक्ष से उपाध्यक्ष दरियाव सिंह चुण्डावत, पूर्व कार्यकारिणी सदस्य राजेंद्र सिंह पीपलान्तरी सहित कई सदस्य सक्रिय हैं। इनके साथ सभा और ओल्ड बॉयज एसोसिएशन से जुड़े प्रदीप सिंह तलावड़ा, भैरूसिंह ज्ञानधर, ललित सिंह झाला (गोगुंदा), नकुल सिंह मुरोली, विजेंद्र सिंह चुण्डावत, मोती सिंह गोगुंदा, भवानी सिंह ताणा, तनवीर सिंह कृष्णावत, प्रेम सिंह मदारा, अचल सिंह देसूरी, दिलीप सिंह लूणदा, देवेंद्र सिंह पीपलाज, गणपत सिंह नारेला, योगेंद्र सिंह रलावता, रघुवीर सिंह गामड़ा, महिपाल सिंह सुरावत, नरपत सिंह ओछड़ी सहित अन्य सदस्य भी सक्रिय भूमिका में बताए जा रहे हैं।

