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कुलगुरु प्रो. प्रताप सिंह ने डेयरी एवं खाद्य प्रौद्योगिकी महाविद्यालय का निरीक्षण — उद्योग साझेदारी, नवाचार और जनजातीय संसाधनों पर दिया बल

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24 News Update उदयपुर। महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, उदयपुर के कुलगुरु प्रोफेसर प्रताप सिंह ने बुधवार को विश्वविद्यालय के डेयरी एवं खाद्य प्रौद्योगिकी महाविद्यालय का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने विभागीय प्रयोगशालाओं, प्रसंस्करण इकाइयों और शिक्षण सुविधाओं का अवलोकन करते हुए छात्रों और शिक्षकों को शैक्षणिक तथा शोध उन्नयन के लिए महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए।
कुलगुरु ने कहा कि महाविद्यालय में उपलब्ध टमाटर, आइसक्रीम और बेकरी प्रसंस्करण इकाइयों का उपयोग अब केवल शिक्षण तक सीमित न रहकर उद्योग साझेदारी, राजस्व सृजन और स्टार्ट-अप संवर्धन के लिए किया जाना चाहिए, ताकि विद्यार्थी प्रत्यक्ष रूप से बाज़ार और उद्योग की मांगों को समझते हुए सीख सकें।

जनजातीय उत्पादों पर शोध को दी प्राथमिकता
प्रो. सिंह ने अनुसंधान गतिविधियों में जनजातीय क्षेत्रों में उपलब्ध अल्प-उपयोगी फल, सब्ज़ियों एवं दलहनों जैसे तिमरू, फालसा, जामुन और सोयाबीन पर विशेष अध्ययन और वैल्यू एडिशन की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि स्थानीय संसाधनों पर आधारित उत्पाद विकास से इन फलों को बाज़ार में पहचान मिलेगी, जनजातीय उत्पादकों को बेहतर मूल्य प्राप्त होगा और एफपीओ एवं स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से ग्रामीण रोजगार व उद्यमिता को बढ़ावा मिलेगा।
उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि अनुसंधान में प्राकृतिक और स्वास्थ्यवर्धक अवयवों को प्राथमिकता दी जाए और कृत्रिम स्वीटनरों पर निर्भरता कम की जाए।

प्रयोगशालाओं और डिजिटल शिक्षा पर जोर
निरीक्षण के दौरान कुलगुरु ने रसायन विज्ञान और सूक्ष्मजीव विज्ञान विभागों का भी अवलोकन किया। उन्होंने प्रयोगशालाओं के उन्नयन हेतु आधुनिक उपकरणों और उच्चस्तरीय सुरक्षा सुविधाओं से युक्त नई परियोजनाओं के प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए।
साथ ही उन्होंने विद्यार्थियों को वैश्विक ज्ञान संसाधनों से जोड़ने के लिए डिजिटल लाइब्रेरी और ई-लर्निंग प्लेटफॉर्म को और अधिक सशक्त बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।

ग्रामीण युवाओं को उद्यमिता से जोड़ने की दिशा में पहल
कुलगुरु ने कहा कि महाविद्यालय के कौशल विकास कार्यक्रमों में जनजातीय बेल्ट के ग्रामीण युवाओं को खाद्य प्रसंस्करण, विपणन कौशल और उद्यम प्रबंधन प्रशिक्षण से जोड़ा जाए, ताकि वे स्वयं के स्टार्ट-अप स्थापित कर समुदाय के आर्थिक विकास में योगदान दे सकें।
अपने दौरे के समापन पर प्रो. सिंह ने विश्वास व्यक्त किया कि डेयरी एवं खाद्य प्रौद्योगिकी महाविद्यालय शीघ्र ही नवाचार, अनुसंधान, उद्योग सहयोग और सामाजिक विकास के क्षेत्र में एक उत्कृष्ट मॉडल संस्थान के रूप में स्थापित होगा।
यह जानकारी डॉ. जी. एल. मीना, मीडिया प्रकोष्ठ एवं जनसंपर्क अधिकारी, महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, उदयपुर ने दी।

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