उदयपुर, 31 अगस्त। सर्वऋतु विलास मंदिर में चल रहे राष्ट्रसंत आचार्य पुलक सागर ससंघ के चातुर्मास अंतर्गत विशेष 10 दिवसीय पाप नाशनम् शिविर के चौथे दिन रविवार को उत्तम शौच धर्म दिवस धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर 700 से अधिक शिविरार्थियों ने एक समान वस्त्र धारण कर संगीतमय पूजा, अभिषेक और धर्म आराधना में भाग लिया।
चातुर्मास समिति के अध्यक्ष विनोद फांदोत ने बताया कि पहली बार आचार्य पुलक सागर महाराज के सान्निध्य में दिगम्बर समाज के सभी पंथों का पर्युषण पर्व एक साथ मनाया जा रहा है। रविवार को प्रातः 5:30 बजे प्राणायाम, 7:30 बजे अभिषेक व शांतिधारा के बाद पूजन सम्पन्न हुआ। प्रातः 9:30 बजे आचार्यश्री ने विशेष प्रवचन देते हुए कहा कि “लोभ सब पापों की जड़ है, और धर्म ध्यान ही इसका सबसे बड़ा निवारण है। जीवन में सिद्धांतों से समझौता नहीं होना चाहिए। निःस्पृहता, वैराग्य और धर्म के अभ्यास से ही मन और चरित्र की शुद्धि संभव है।”
आचार्यश्री ने बताया कि लालच इंसान को नहीं बल्कि इंसान का लालच दौड़ता है। गंगा स्नान से शुद्धि नहीं, बल्कि मन की पवित्रता से ही सच्चा शौच संभव है। विज्ञान जहां असफल होता है, वहां से अध्यात्म का आरंभ होता है।
चातुर्मास समिति के महामंत्री प्रकाश सिंघवी एवं प्रचार संयोजक विप्लव कुमार जैन ने बताया कि प्रवचन के पश्चात सिंधी धर्मशाला में साधकों का सामूहिक भोजन, 12:30 बजे सामायिक मंत्र जाप, 2 बजे धार्मिक प्रशिक्षण एवं तत्व चर्चा हुई। सायं 7:30 बजे गुरु भक्ति एवं श्रीजी की महाआरती सम्पन्न हुई। इसके बाद प्रतिदिन की भांति रात 8 बजे सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं।
इस अवसर पर विनोद फान्दोत, शांतिलाल भोजन, आदिश खोडनिया, पारस सिंघवी, अशोक शाह, शांतिलाल मानोत, नीलकमल अजमेरा, सेठ शांतिलाल नागदा सहित सम्पूर्ण उदयपुर संभाग से हजारों श्रावक-श्राविकाएं मौजूद रहे।

