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संसद में उठा उदयपुर का मुद्दा: डिजिटल धोखाधड़ी पर लगाम के लिए आरबीआई का ‘म्यूलहंटर’ तैयार

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24 News Update उदयपुर। डिजिटल लेन-देन में बढ़ती धोखाधड़ी पर अंकुश लगाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित ‘म्यूलहंटर’ उपकरण शुरू किया है। इस टूल के माध्यम से मनी म्यूल खातों की पहचान कर धोखाधड़ी के नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई की जा सकेगी।
यह जानकारी संसद में उदयपुर सांसद डॉ. मन्ना लाल रावत द्वारा पूछे गए प्रश्न के उत्तर में केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने दी। सांसद रावत ने डिजिटल लेन-देन में बढ़ती धोखाधड़ी और साइबर अपराधों की रोकथाम के लिए उठाए जा रहे कदमों पर विस्तृत जानकारी मांगी थी।
मंत्री ने बताया कि सरकार और नियामक संस्थाएं मिलकर डिजिटल धोखाधड़ी रोकने के लिए लगातार नए उपाय लागू कर रही हैं। बैंकों और वित्तीय संस्थानों को निर्देश दिए गए हैं कि वे वास्तविक समय में लेन-देन की निगरानी के लिए सुदृढ़ तंत्र अपनाएं और संदिग्ध गतिविधियों की पहचान के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता तथा मशीन लर्निंग आधारित उपकरणों का उपयोग करें। इसके साथ ही मनी म्यूल नेटवर्क का पता लगाने के लिए नेटवर्क विश्लेषण को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
डिजिटल भुगतान प्रणाली, विशेषकर राष्ट्रीय भुगतान निगम द्वारा संचालित यूपीआई लेन-देन में सुरक्षा को मजबूत करने के लिए डिवाइस बाइंडिंग, दो-स्तरीय प्रमाणीकरण, दैनिक लेन-देन सीमा और उपयोग-आधारित नियंत्रण जैसे उपाय लागू किए गए हैं।
केंद्रीय मंत्री ने यह भी बताया कि ग्राहकों को धोखाधड़ी से हुए नुकसान की भरपाई सुनिश्चित करने के लिए आरबीआई ने 6 जुलाई 2017 के दिशा-निर्देशों के तहत बैंकों को अनधिकृत इलेक्ट्रॉनिक लेन-देन के मामलों में ग्राहक की देयता सीमित करने के निर्देश दिए हैं, जिससे उपभोक्ता संरक्षण को मजबूती मिली है।
साथ ही, साइबर अपराध के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए एसएमएस, रेडियो और अन्य माध्यमों से अभियान चलाए जा रहे हैं। बैंकों को उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों से जुड़े लेन-देन पर विशेष निगरानी रखने और कर्मचारियों को साइबर धोखाधड़ी की पहचान के लिए प्रशिक्षित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

सख्त निगरानी और तकनीकी सशक्तिकरण पर जोर
सरकार का मानना है कि तकनीक आधारित निगरानी, मजबूत सुरक्षा प्रोटोकॉल और जागरूकता अभियान के जरिए डिजिटल लेन-देन को अधिक सुरक्षित बनाया जा सकता है।

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