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चित्तौड़गढ़ जिला कारागार में प्रतिबंधित सामान और डिजिटल लेन-देन का भंडाफोड़

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24 News Udpate चित्तौड़गढ़। चित्तौड़गढ़ जिला कारागार की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। विभागीय जांच में सामने आया है कि जेल के भीतर लंबे समय तक प्रतिबंधित सामग्री की आपूर्ति होती रही और इसके बदले बंदियों के परिजनों से डिजिटल माध्यमों से धन वसूला गया। मामले की पुष्टि होने के बाद जेल प्रशासन की शिकायत पर कोतवाली थाने में प्रकरण दर्ज कर पुलिस जांच शुरू कर दी गई है।
जानकारी के अनुसार यह अवैध गतिविधियां जनवरी 2022 से जनवरी 2023 के बीच संचालित होती रहीं। जांच में खुलासा हुआ कि जेल के अंदर सीधे लेन-देन न होकर बंदियों के परिजनों के बैंक खातों और यूपीआई आईडी के जरिए पैसों का आदान-प्रदान किया गया। इन लेन-देन के बदले में जेल के भीतर निषिद्ध सामग्री पहुंचाई जाती रही।

विभागीय जांच में उजागर हुई अंदरूनी सांठगांठ
महानिदेशालय कारागार, जयपुर के निर्देश पर करवाई गई विभागीय जांच का जिम्मा केंद्रीय कारागृह उदयपुर के अधीक्षक को सौंपा गया था। जांच रिपोर्ट में चित्तौड़गढ़ जिला जेल के तत्कालीन डिप्टी जेलर सहित कुछ कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई। रिपोर्ट के अनुसार कुछ बंदी जेल की चारदीवारी के बाहर से फेंके गए सामान को अंदर मंगवाने में सफल रहे, वहीं कुछ मामलों में जेल स्टाफ की संलिप्तता के संकेत भी मिले हैं।

डिजिटल ट्रांजेक्शन बने अहम सबूत
जांच के दौरान जिन मोबाइल नंबरों और यूपीआई आईडी की जानकारी सामने आई, उनमें से कई पर धन के लेन-देन की पुष्टि हुई है। बैंक रिकॉर्ड खंगालने पर पाया गया कि कुछ खातों से रकम की निकासी भीलवाड़ा रोड क्षेत्र के एटीएम से की गई, जबकि कुछ यूपीआई खातों से अलग-अलग मोबाइल नंबरों पर लगातार ट्रांसफर किए गए। इससे यह स्पष्ट हुआ कि अवैध वसूली का पूरा तंत्र योजनाबद्ध तरीके से संचालित किया जा रहा था।

तीन बंदियों पर दर्ज हुआ मामला
जांच रिपोर्ट के आधार पर चित्तौड़गढ़ कोतवाली थाने में जेल में बंद रहे तीन बंदियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने शिकायत से जुड़े दस्तावेज और बैंक रिकॉर्ड मंगवाकर जांच को आगे बढ़ाया है।

जेल स्टाफ की भूमिका पर भी नजर
पुलिस और जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस पूरे प्रकरण में कितनी राशि का लेन-देन हुआ और इसमें जेल प्रशासन के किन-किन अधिकारियों व कर्मचारियों की भूमिका रही। तत्कालीन जेल अधीक्षक, डिप्टी जेलर और अन्य स्टाफ के बयान भी दर्ज किए जा चुके हैं। अधिकारियों का कहना है कि केस फाइल के गहन अध्ययन के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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