24 News Update उदयपुर। लेकसिटी उदयपुर में बेकाबू होता ट्रैफिक अब केवल असुविधा नहीं, बल्कि शहर की पहचान, पर्यटन और अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। त्योहारों, विवाह सीजन और पीक टूरिस्ट समय में हालात ऐसे हो जाते हैं कि प्रमुख मार्ग घंटों तक ठप रहते हैं। सड़कों पर बेतरतीब ठेले, अतिक्रमण, अव्यवस्थित ऑटो-रिक्शा और कमजोर ट्रैफिक मैनेजमेंट ने शहर को मानो “ठेलों का शहर” बना दिया है।
इसी पृष्ठभूमि में उदयपुर सिटीजन सोसायटी की ओर से एक अहम बैठक आयोजित की गई, जिसमें शहर के प्रबुद्ध नागरिकों, होटल उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने शिरकत की। बैठक में एक स्वर में चेतावनी दी गई कि यदि अगले 5 से 10 वर्षों की जरूरतों को ध्यान में रखकर मास्टर प्लानिंग के तहत सड़क विस्तार, फ्लाईओवर और आधुनिक ट्रैफिक प्रबंधन लागू नहीं हुआ, तो हालात और भयावह हो जाएंगे।
सोसायटी अध्यक्ष क्षितिज कुम्भट ने कहा कि उदयपुर को इंदौर, कोटा और गिफ्ट सिटी जैसे शहरों के मॉडल से सीख लेनी होगी, जहां सुव्यवस्थित सड़क ढांचा और सख्त ट्रैफिक अनुशासन है। उन्होंने ऑटो-रिक्शा में मीटर सिस्टम, ड्रेस कोड और अनिवार्य पहचान पत्र लागू करने, मनमानी वसूली पर सख्ती से रोक लगाने की मांग की।
कुम्भट ने महिला सुरक्षा के मद्देनज़र प्रमुख इलाकों में वूमन बाइक स्क्वॉड, सस्ती बस सेवाओं का विस्तार, बड़े ऑटो हटाकर सार्वजनिक परिवहन मजबूत करने तथा चित्तौड़गढ़, राजसमंद, नाथद्वारा, कुंभलगढ़ और उदयपुर को जोड़ने वाली मेट्रो रेल सेवा की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
बैठक में होटल एसोसिएशन से जुड़े अर्जुन सिंह (लेक पिछोला क्षेत्र), समर विजय (उदय कोठी), जयवर्धन (आमेट हवेली), दिव्यऋषि राणावत (कांकरिया) और यशवर्धन राणावत (जिवाना हवेली) ने व्यावहारिक सुझाव रखे। इनमें पिंक व ब्लू ई-रिक्शा को बढ़ावा देना, संकरी सड़कों पर बड़े ऑटो का प्रवेश प्रतिबंधित करना और प्रदूषण कम करने के लिए ई-व्हीकल्स को प्रोत्साहित करना प्रमुख रहा।
पीक टाइम शाम 6 से रात 10 बजे तक लालघाट, चांदपोल और सहेलियों की बाड़ी क्षेत्रों में वन-वे सिस्टम लागू करने, स्पष्ट साइन बोर्ड लगाने और नियम तोड़ने वालों पर मोबाइल ऐप से तत्काल चालान की मांग उठी। वक्ताओं ने बताया कि शहर को कम से कम 400 ट्रैफिक पुलिसकर्मियों की जरूरत है, जबकि वर्तमान में मात्र 120 कर्मी ही तैनात हैं।
यशवर्धन राणावत ने लाइसेंसधारी टूरिस्ट गाइड्स को टूरिस्ट पुलिस में शामिल करने का सुझाव दिया, ताकि पर्यटकों को सही मार्गदर्शन, सुरक्षा और त्वरित सहायता मिल सके।
जयवर्धन (आमेट हवेली) ने दो टूक कहा कि यदि पिछोला झील तक पहुंचना ही मुश्किल हो गया, तो पर्यटन और व्यापार दोनों को भारी नुकसान तय है। उन्होंने आगाह किया कि कई टूर ऑपरेटर्स ने पहले ही ट्रैफिक जाम के कारण उदयपुर को अपने पीक सीजन पैकेज से हटाना शुरू कर दिया है।
बैठक में सीसारमा और स्वरूप सागर क्षेत्र से पिछोला झील तक बैटरी या सोलर से चलने वाली कम शुल्क वाली फेरी बोट सेवा शुरू करने का प्रस्ताव भी रखा गया, जिससे सड़कों पर वाहनों का दबाव घटाया जा सके। होटल व्यवसायियों ने इस पहल में सहयोग का भरोसा दिलाया। साथ ही लालघाट और चांदपोल जैसे इलाकों में अतिक्रमण हटाने, सड़क किनारे पार्किंग समाप्त कर सुव्यवस्थित पार्किंग लॉट विकसित करने तथा आपात स्थिति में एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।
वक्ताओं ने सवाल उठाया—“हम किस बड़ी आपदा का इंतजार कर रहे हैं, जिसके बाद प्रशासन जागेगा?” निर्मल नागर ने भविष्य की जरूरतों को देखते हुए शहर की प्रमुख सड़कों को 100 से 150 फीट तक चौड़ा करने का सुझाव रखा।
बैठक के अंत में निलेश कारवा, गणपत अग्रवाल, दिलीप मिंडा, निर्मल नागर और कमल नाहटा ने सभी सुझावों का समर्थन करते हुए शीघ्र ही प्रशासन व जनप्रतिनिधियों को विस्तृत मेमोरेंडम सौंपने की बात कही। सचिव कमल नाहटा ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए चेतावनी दी कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो उदयपुर भी गोवा की तरह एक बड़ा अवसर खो सकता है।
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