एआई से आपत्तिजनक वीडियो बनाने, धमकी देने के गंभीर आरोप; कोर्ट ने कहा-रिहाई पर साक्ष्य से छेड़छाड़ की आशंका
उदयपुर। बहुचर्चित ब्लैकमेल और आईटी एक्ट से जुड़े प्रकरण में अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने आरोपी अधिवक्ता की जमानत अर्जी खारिज कर दी है। मामला भूपालपुरा थाना की एफआईआर संख्या 33/2026 से संबंधित है, जिसमें भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं और आईटी एक्ट की धारा 67-ए के तहत अपराध दर्ज है। आदेश अपर सेशन न्यायाधीश क्रम संख्या 04, उदयपुर के पीठासीन अधिकारी जितेन्द्र गोयल ने 24 फरवरी को सुनाया। अदालत ने कहा कि प्रकरण अभी अनुसंधानाधीन है और इस स्तर पर जमानत दिए जाने से साक्ष्यों से छेड़छाड़ तथा गवाहों को प्रभावित करने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
क्या हैं आरोप
एफआईआर के अनुसार, आरोपी अधिवक्ता पर अपनी ही कार्यालय में कार्यरत जूनियर महिला के आपत्तिजनक वीडियो गुप्त रूप से रिकॉर्ड करने और उन्हें वायरल करने की धमकी देकर दबाव बनाने के आरोप हैं। शिकायत में यह भी उल्लेख है कि कथित तौर पर एआई तकनीक का उपयोग कर वीडियो तैयार किए गए और उन्हें सोशल मीडिया पर प्रसारित करने की धमकी दी गई। पुलिस ने 12 फरवरी को आरोपी को गिरफ्तार किया था। अधीनस्थ न्यायालय द्वारा 19 फरवरी को जमानत खारिज होने के बाद सत्र न्यायालय में धारा 483 भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के तहत पहली जमानत अर्जी पेश की गई थी।
बचाव पक्ष की दलील
बचाव पक्ष ने दलील दी कि एफआईआर कथित घटना के 4-5 माह बाद दर्ज हुई। यह भी कहा गया कि वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल नहीं किए गए। गिरफ्तारी प्रक्रिया में सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों के पालन का मुद्दा भी उठाया गया। आरोपी के स्थायी निवासी व पेशेवर होने के आधार पर फरार होने की संभावना से इनकार किया गया। बचाव पक्ष ने सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय—Vihaan Kumar vs State of Haryana, Arnesh Kumar vs State of Bihar तथा Satender Kumar Antil vs CBI—का हवाला भी दिया।
अभियोजन का पक्ष
अभियोजन ने तर्क दिया कि आरोपी पेशे से अधिवक्ता है और कथित पीड़िता उसके अधीन कार्यरत थी। केस डायरी में आरोपी की निशानदेही पर मेमोरी कार्ड, आपत्तिजनक वीडियो एवं कार्यालय में लगे हिडन कैमरे की जब्ती का उल्लेख है। एफएसएल जांच लंबित होने तथा अपराध की गंभीरता को देखते हुए जमानत का विरोध किया गया।
अदालत में कौन-कौन रहे उपस्थित
प्रार्थी-अभियुक्त की ओर से अधिवक्ता ओमप्रकाश चौधरी ने पैरवी की। अभियोजन की ओर से अपर लोक अभियोजक पृथ्वीराज तेली उपस्थित रहे। परिवादिया की ओर से अधिवक्ता श्रीमती रागिनी शर्मा ने पक्ष रखा। अनुसंधान अधिकारी के रूप में गोपाल चंदेल, पुलिस उप अधीक्षक, वृत्त गिर्वा, उदयपुर भी न्यायालय में उपस्थित रहे।
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