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उदयपुर सीएमएचओ कार्यालय निकला ‘‘आरटीआई शल्य चिकित्सक’’, जवाब में कॉपी पेस्ट कर दिए पूछे गए सवाल, कौनसी पोल खुलने का सता रहा है डर??

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24 न्यूज अपडेट, उदयपुर। देश के जाने-माने आरटीआई एक्टिविस्ट और पत्रकार जयवंत भैरविया की ओर से दायर एक आरटीआई आवेदन ने उदयपुर के सीएमएचओ कार्यालय की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कानून को ताक में रखते हुए यह कार्यालय आरटीआई का शल्य चिकित्सक बनने का प्रयास कर रहा है जो अति गंभीर है।
भैरविया ने सीएमएचओ कार्यालय से वाहनों, ईंधन खर्च और भुगतान से जुड़ी पारदर्शी जानकारी मांगी थी, लेकिन जवाब में उन्हें सूचना देने के बजाय स्टेट मोटर गैराज का पत्र और आवेदन फॉर्मेट चस्पा कर ऑनलाइन भेज दिया गया। इस तरह के जवाब को लेकर आरोप लग रहे हैं कि विभाग मामले में लीपापोती कर रहा है व बहुत बड़े मामले पर खुद पर्देदारी करने पर तुला हुआ है।

क्या मांगी गई थी सूचना?
जयवंत भैरविया ने अपने आरटीआई आवेदन में सीएमएचओ कार्यालय से चार प्रमुख बिंदुओं पर जानकारी मांगी थीः
15 जनवरी 2025 को मंडलीय अधीक्षक, स्टेट मोटर गैराज द्वारा सीएमएचओ कार्यालय को लिखे गए पत्र का संदर्भ देते हुए लगभग 1 करोड़ रुपये बकाया बिल की मांग की गई थी। इस संदर्भ में सभी वाहनों के रजिस्ट्रेशन नंबर और उनका उपयोग करने वाले अधिकारियों के नाम-पदनाम की जानकारी मांगी गई। सीएमएचओ कार्यालय द्वारा उपयोग किए जा रहे सभी वाहनों पर वर्ष 2024 में हुए ईंधन और अन्य खर्च की रजिस्ट्रेशन नंबर सहित अलग-अलग सूचना मांगी गई। उन भ्रष्ट अधिकारियों के नाम और पदनाम की जानकारी मांगी गई जो आरटीआई के अंतर्गत सूचना उपलब्ध नहीं करवाते।
वर्ष 2024 में सीएमएचओ कार्यालय में किस वाहन पर सबसे अधिक खर्च हुआ, इसका विवरण रजिस्ट्रेशन नंबर सहित मांगा गया।

क्षतिग्रस्त वाहनों पर भी खर्च!
सूत्रों के अनुसार, मुख्य कार्यालय परिसर में कई वाहन क्षतिग्रस्त अवस्था में खड़े हैं, लेकिन आशंका जताई जा रही है कि इन्हीं वाहनों के नाम पर पेट्रोल-डीजल की पर्चियां तो नहीं काटी जा रही हैं। पर्चियां कथित तौर पर कहीं दी जाती हैं और तेल भरवा लिया जाता है। इससे सवाल खड़ा होता है कि बंद पड़े वाहन आखिर सफर कैसे तय कर रहे हैं? यदि आरोप सही नहीं है तो जवाब देकर दूध का दूध व पानी का पानी करने में प्रोब्लम क्या हो रही है। अन्यथा सवाल बरकरार है कि – जनता के पैसों से चल रहे सिस्टम का तेल कौन निकाल रहा है और यह पैसा किसकी जेब को हरा भरा कर रहा है।

जवाब पर उठे सवाल
भैरविया ने कहा कि पारदर्शी जानकारी उपलब्ध कराने के बजाय विभाग ने एक गैर-प्रासंगिक दस्तावेज भेज दिया, जो सीधे तौर पर सूचना छिपाने की कोशिश को दर्शाता है। इससे साफ है कि विभाग जनता से जानकारी छिपाने और आंतरिक गड़बड़ियों पर पर्दा डालने की कोशिश कर रहा है। आरटीआई एक्टिविस्ट भैरविया ने स्पष्ट किया है कि यदि उचित जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई, तो वह इस मामले को राज्य सूचना आयोग और उच्च अधिकारियों के संज्ञान में ले जाएंगे।

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