24 न्यूज अपडेट, उदयपुर
उदयपुर जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) पद को लेकर दो वरिष्ठ चिकित्सकों डॉ. शंकरलाल बामणिया और डॉ. अशोक आदित्य के डबल इंजन से विवाद अब सार्वजनिक बहस का विषय बन चुका है।
न्यायालय के आदेश, प्रशासनिक प्रक्रिया और व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप के इस मामले ने जिले की स्वास्थ्य सेवाओं को असहज स्थिति में ला खड़ा किया है। विवाद अधिकारियों के बीच का नहीं रहा बल्कि एक ऐसी स्थिति का प्रतीक बन गया है जहां न्यायालय, शासन और प्रशासन के बीच समन्वय की कमी झलक रही है।
स्पष्ट निर्णय और दिशा-निर्देशों की आवश्यकता है, लेकिन वहां पर सरकार और विभागीय अधिकारी तत्काल निर्णय की बजाय गहरी नींद में सोए हुए हैं।
🔍 पृष्ठभूमि: क्या है मामला?
आपको याद दिला दें कि:
- डॉ. शंकरलाल बामणिया, पूर्व में उदयपुर के सीएमएचओ थे, जिन्हें कुछ माह पूर्व स्थानांतरित कर दिया गया था।
- इसके बाद विभाग ने डॉ. अशोक आदित्य को सीएमएचओ का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा।
- डॉ. बामणिया ने अपने ट्रांसफर को चुनौती देते हुए राजस्थान हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश वाली खंडपीठ से राहत प्राप्त की।
- खंडपीठ ने सिंगल बेंच के फैसले को अपास्त किया तो स्थितियां पूर्ववत हो गईं।
इस पर डॉ. बामणिया ने हाईकोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए तुरंत उदयपुर सीएमएचओ पद का कार्यभार ग्रहण कर लिया। वहीं दूसरी तरफ कार्यभार संभाले डॉ. अशोक आदित्य का कहना है कि न्यायालय ने सीधे डॉ. बामणिया को जॉइनिंग का अधिकार नहीं दिया, बल्कि राज्य सरकार को पालन कराने के लिए निर्देशित किया था।
👉 इसलिए जब तक सरकार स्पष्ट आदेश नहीं देती, तब तक वे ही विधिसम्मत सीएमएचओ हैं।
⚖️ आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला
🔹 डॉ. अशोक आदित्य का आरोप:
डॉ. आदित्य ने चर्चित सोशल मीडिया समूह ‘उदयपुर चौपाल’ में लिखा कि:
- डॉ. बामणिया ने न्यायालय के आदेश की मनमानी व्याख्या करते हुए राज्य सरकार और जिला प्रशासन को दरकिनार कर सीएमएचओ पद का कार्यभार खुद ग्रहण कर लिया।
- डॉ. आदित्य का दावा है कि वर्तमान में उन्हें ही राज्य सरकार ने प्रशासनिक और वित्तीय अधिकार सौंप रखे हैं, और ऐसे में डॉ. बामणिया का कार्यभार ग्रहण करना नियमों के विपरीत है।
- उनका कहना है कि छुट्टी के दिन खुद को सीएमएचओ घोषित करना न्यायपालिका और शासन दोनों की अनदेखी है।
- उन्होंने इस बाबत उच्चाधिकारियों को लिखा है कि जब तक राज्य सरकार खुद आदेश जारी नहीं करती, तब तक उदयपुर सीएमएचओ के समस्त अधिकार डॉ. अशोक आदित्य के पास ही रहेंगे।
🔹 डॉ. शंकरलाल बामणिया का आरोप:
डॉ. बामणिया का कहना है कि:
- आरसीएचओ डॉ. अशोक आदित्य ने अपने वाहन के साथ-साथ सीएमएचओ का वाहन भी अपने कब्जे में रखा हुआ है।
- सीएमएचओ बनने के बाद उन्होंने जब सरकारी वाहन RJ 27 GA 9939 मंगवाया, तो चालक ने देने से इंकार कर दिया।
- उन्होंने आरोप लगाया कि डॉ. आदित्य ने ड्राइवर से वाहन की चाबी लेकर उक्त वाहन को अपने घर पर रखवा लिया, जिससे उन्हें निजी वाहन से भ्रमण करना पड़ रहा है।
- डॉ. बामणिया का कहना है कि डॉ. आदित्य दो-दो सरकारी वाहन (एक आरसीएचओ का और एक सीएमएचओ का) उपयोग कर राजकीय कोष का दुरुपयोग कर रहे हैं।
- उन्होंने कहा कि सोमवार को आयोजित आयुष्मान आरोग्य शिविरों का निरीक्षण भी उन्हें निजी वाहन से करना होगा।
- उनका यह भी आरोप है कि डॉ. आदित्य स्वयंभू स्थायी सीएमएचओ की तरह व्यवहार कर रहे हैं, जबकि उन्हें केवल अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया था।
❓ मूल प्रश्न जो खड़े होते हैं:
- यदि हाईकोर्ट ने डॉ. बामणिया के पक्ष में आदेश दिया है तो राज्य सरकार ने अब तक उनकी पुनः नियुक्ति को लेकर कोई आदेश क्यों नहीं जारी किया?
- क्या न्यायालय के आदेशों की व्याख्या करने का अधिकार संबंधित अधिकारियों को है या केवल राज्य सरकार को?
- दोनों वरिष्ठ डॉक्टरों के इस टकराव का असर जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था पर किस रूप में पड़ेगा?
- क्या यह जरूरी नहीं हो जाता कि विभाग ऐसे मामलों में स्पष्ट दिशा-निर्देश दे ताकि संवैधानिक प्रक्रिया का पालन हो और विवाद की स्थिति न बने?

