उदयपुर, 22 फरवरी। पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र की ओर से शिल्पग्राम में आयोजित तीन दिवसीय ‘ऋतु वसंत’ उत्सव का समापन रविवार को सुरों और नृत्य की अविस्मरणीय प्रस्तुतियों के साथ हुआ। अंतिम संध्या में प्रख्यात शास्त्रीय गायक जयतीर्थ मेवुंडी ने अपनी गायकी से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया, वहीं ‘नृत्य प्रवाह’ की ऊर्जा से पूरा शिल्पग्राम झूम उठा।
कार्यक्रम के दौरान केंद्र के निदेशक फुरकान खान एवं अतिथियों ने कलाकारों का स्वागत किया।
राग, ठुमरी और भजन से सजी सुरमई शाम
जयतीर्थ मेवुंडी ने कार्यक्रम की शुरुआत राग यमन कल्याण की झपताल बंदिश “पिया बिन रतिया…” से की। पहली ही प्रस्तुति में उन्होंने स्वर विस्तार और आलाप के माध्यम से राग की गंभीरता और माधुर्य को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।
तीनताल की बंदिश “श्याम बजाए आज मुरलिया…” ने वातावरण को कृष्णमय बना दिया। सुर और लय के संतुलन तथा दमदार तानों ने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। राग सोहनी के तराने “रंग ना डारो श्यामजी…” ने संगीत प्रेमियों की खूब दाद बटोरी।
राग मिश्र तिलंग में प्रस्तुत ठुमरी “नैनों में जादू…” ने श्रृंगार रस का सुंदर संचार किया। वहीं भजन “ठुमक ठुमक पग…” और राग वसंत में “केतकी गुलाब…” की प्रस्तुति ने भक्ति और संगीत का अद्भुत संगम रचते हुए वातावरण को भक्तिरस से सराबोर कर दिया। उनके साथ तबले पर पंडित अभिषेक मिश्रा और हारमोनियम पर तरुण जोशी ने सशक्त संगत दी।
‘नृत्य प्रवाह’ का जादू, क्लासिकल नृत्यों का संगम
उत्सव की अंतिम प्रस्तुति के रूप में प्रसिद्ध कोरियोग्राफर संतोष नायर के निर्देशन में ‘नृत्य प्रवाह’ ने दर्शकों में नई ऊर्जा का संचार किया। स्वागतम और गणेश वंदना से शुरुआत करते हुए विभिन्न शास्त्रीय नृत्य शैलियों का अनूठा संगम प्रस्तुत किया गया।
केरल की मोहिनीअट्टम ने भगवान विष्णु के मोहिनी रूप को साकार किया, जबकि मणिपुरी नृत्य ने राधा-कृष्ण के प्रेम को भावपूर्ण अभिव्यक्ति दी। ओडिसी की भक्ति और अभिनय, कथक की लयकारी और तमिलनाडु के भरतनाट्यम की भाव-राग-ताल की प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
फिनाले में सभी शास्त्रीय नृत्यों का संयुक्त प्रदर्शन हुआ, जिसने कार्यक्रम को यादगार बना दिया। देर तक तालियों की गड़गड़ाहट गूंजती रही और दर्शक झूम उठे।
उत्सव की सफलता पर आभार
तीनों दिन मंच संचालन मोहिता दीक्षित ने किया।
पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र के निदेशक फुरकान खान ने ‘ऋतु वसंत’ उत्सव की सफलता के लिए उदयपुर के संगीत एवं नृत्य प्रेमियों, सहयोगी विभागों और सभी अधिकारियों का आभार व्यक्त किया।

