24 News Update उदयपुर। नेतागिरी जब सिर चढ़कर बोले और सत्ता में बैठे लोग खुद को जनता की भावना से उपर समझने लगे तब उसका हश्र वंदे भारत रेलगाड़ी जैसा ही होता है। बड़े दावों और राजनीतिक उत्साह के बीच शुरू की गई वंदे भारत एक्सप्रेस पहले ही दिन उम्मीदों पर खरी नहीं उतर सकी। उदयपुर से असारवा के बीच चली इस हाई-स्पीड ट्रेन में कुल 476 सीटों में से महज 96 यात्रियों ने सफर किया। यानी करीब 20 प्रतिशत से भी कम लोड फैक्टर के साथ ट्रेन रवाना हुई, जबकि इसी रूट की सामान्य और एक्सप्रेस ट्रेनें रोज़ाना ओवरलोड होकर चलती हैं।
रेलवे सूत्रों के अनुसार इस ट्रेन में 7 कोच लगाए गए थे, लेकिन अधिकांश कोच लगभग खाली रहे। यात्रियों का कहना है कि भारी किराया इस रूट पर सबसे बड़ी बाधा बना। जहां सामान्य ट्रेनों में इलाज, व्यापार और रोज़गार के लिए सफर करने वाले यात्री कम किराए में यात्रा करते हैं, वहीं वंदे भारत का प्रीमियम फेयर उनकी पहुंच से बाहर है।
किराया ज्यादा, ज़रूरत अलग
यात्रियों का तर्क है कि चार–पांच घंटे कम समय बचने के बदले दोगुना किराया देना व्यावहारिक नहीं है। यही कारण है कि वंदे भारत खाली चली, जबकि पैसेंजर और मेल-एक्सप्रेस ट्रेनों में खड़े होकर सफर करना पड़ता है।
सुरक्षा इंतज़ामों पर भी सवाल
इस रूट पर फेंसिंग और पर्याप्त सुरक्षा इंतज़ाम नहीं होने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। मवेशियों की टक्कर की घटनाएं पहले से दर्ज हैं, ऐसे में हाई-स्पीड ट्रेन के संचालन को लेकर आशंका जताई जा रही है।
राजनीतिक उत्साह, जमीनी हकीकत अलग
इस ट्रेन के शुभारंभ पर सांसद सीपी जोशी, मन्नालाल रावत और राज्यसभा सांसद चुन्नीलाल गरासिया सहित कई जनप्रतिनिधियों ने इसे बड़ी उपलब्धि बताया था। हिम्मतनगर तक स्वागत कार्यक्रम भी हुए, लेकिन पहले ही दिन का यात्री आंकड़ा इन दावों पर भारी पड़ता दिखा। नेताओं ने सपनेभी दिखाए कि ऐसा होगा तो ये हो जाएगा??? ये भी होगा, वो भी होगा?? किसी ने तो ब्लॉग बनाकर भरपूर आनंद भी उठाया था अपने पद का??? मगर अब लोगों ने बडी बडी बातें करने वाले नेताओं को इसके लिए आडे हाथों लिया जो वोट तो जनता क से पाते हैं मगर खुशामद और मस्का पालिश अपनी पार्टी के आकाओं की करते नजर आते हैं। लोगों ने कहा कि हर डिब्बे में एक कार जितनी सवारियां दिखाई दीं। मगर बड़ा सवाल ये है कि क्या रस्सी जल जाने के बाद भी बल जाएंगे या पॉलिटिकल ऐंठन ऐसे ही जारी रहने वाली है?? हम कभी नहीं सुधरेंगे वाला मंत्रजाप यूं ही चलता रहेगा।

