उदयपुर। श्रमण भगवान महावीर स्वामी के 2625वें जन्म कल्याणक महोत्सव के तहत शहर में आस्था और राष्ट्रभक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। सकल जैन समाज की प्रतिनिधि संस्था महावीर जैन परिषद के तत्वावधान में फतहसागर पाल स्थित टाया पैलेस पर मंगलवार को भारत माता पूजन एवं भव्य महाआरती का आयोजन किया गया, जिसमें सर्व समाज की सहभागिता ने आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया।
परिषद के मुख्य संयोजक राजकुमार फत्तावत ने बताया कि महावीर जन्मकल्याणक महोत्सव के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में जेएसजी मेवाड़ रीजन के सहयोग से देशभक्ति से ओत-प्रोत वातावरण में भारत माता की महाआरती की गई। कार्यक्रम की शुरुआत नवकार महामंत्र और वंदे मातरम् के मंगलाचरण से हुई, जिसके बाद पूरा फतहसागर क्षेत्र राष्ट्रभक्ति के जयघोष से गूंज उठा।
फतहसागर पाल पर जुटे श्रावक-श्राविकाओं और आमजन ने हाथों में तिरंगा लेकर ‘‘भारत माता की जय’’ और ‘‘वंदे मातरम्’’ के गगनभेदी नारों के साथ देशभक्ति का जश्न मनाया। “वतन की मिट्टी से बढ़कर कोई शान नहीं, इस तिरंगे से बड़ा कोई मान नहीं” जैसे गीतों पर उपस्थित जनसमूह भावविभोर नजर आया। भारत माता आरती, कर चले हम फिदा, ऐ वतन, तेरी मिट्टी जैसे देशभक्ति गीतों ने पूरे वातावरण को ऊर्जा और भावनाओं से सराबोर कर दिया।
जेएसजी मेवाड़ रीजन के चेयरमैन अरुण मांडोत ने कहा कि उदयपुरवासियों ने पंथ, सम्प्रदाय, धर्म और जाति से ऊपर उठकर एकजुटता की जो मिसाल पेश की है, वह शहर के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज होने योग्य है। यह आयोजन ‘‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’’ की भावना का जीवंत उदाहरण बनकर उभरा।
कार्यक्रम में पारस ढेलावत, आशुतोष सिसोदिया, मोहन बोहरा, जितेंद्र हरकावत, महेश पोरवाल, हिमांशु मेहता, डॉ. कमल नाहर, श्याम सिसोदिया, पूरणमल मेहता, रमेश खोखावत, प्रवीण नाहर, अर्जुन खोखावत, नरेंद्र सिंघवी, यशवंत आंचलिया, कुलदीप नाहर, नितुल चंडालिया, दीपक सिंघवी, अशोक कोठारी, विजयलक्ष्मी गलुण्डिया, वीरेंद्र महात्मा, सोनल सिंघवी, प्रिया झगड़ावत एवं रचिता मोगरा सहित बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।
महावीर जैन परिषद के कोषाध्यक्ष कुलदीप नाहर ने बताया कि महोत्सव की श्रृंखला में बुधवार को भारतीय जैन संघटना लेडिज विंग एवं जैन जागृति सेंटर लेडिज विंग के संयुक्त तत्वावधान में शुभ केसर गार्डन में शाम 6:30 बजे भव्य जैन गरबा एवं डांडिया प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा।
इस आयोजन ने यह साबित कर दिया कि जब आस्था और राष्ट्रप्रेम एक साथ मिलते हैं, तो एक ऐसा माहौल बनता है जो समाज को जोड़ने और नई ऊर्जा देने का कार्य करता है।

