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खनन और खनिज उद्योगों में पर्यावरणीय स्थिरता पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस का भव्य समापन, विशेषज्ञों ने सतत विकास, तकनीक और पर्यावरण संरक्षण पर किया गहन मंथन

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24 News Update उदयपुर। पर्यावरणीय स्थिरता मानव समाज के निरंतर अस्तित्व, समृद्धि और स्वास्थ्य के लिए एक मूलभूत शर्त है। नई पीढ़ी को गति और आधुनिक तकनीक पर केंद्रित होकर कार्य करना होगा, ताकि भविष्य को अधिक सुरक्षित और सुनहरा बनाया जा सके। ये विचार मुख्य अतिथि श्री एम.पी. सिंह, प्रधान मुख्य अभियंता, केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण, विद्युत मंत्रालय, भारत सरकार (नई दिल्ली) ने व्यक्त किए।
श्री सिंह भूपाल नोबल्स स्नातकोत्तर महाविद्यालय के भूविज्ञान विभाग द्वारा आयोजित “खनन और खनिज उद्योगों में पर्यावरणीय स्थिरता” विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस के समापन सत्र को संबोधित कर रहे थे।

पर्यावरण संरक्षण सरकार और समाज की साझा जिम्मेदारी
समापन समारोह में विशिष्ट अतिथि प्रो. विनोद अग्रवाल, सदस्य, विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति (सी एंड टीपी), पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MOEFCC), भारत सरकार, नई दिल्ली ने अपने उद्बोधन में कहा कि पर्यावरणीय स्थिरता केवल सरकार की नहीं, बल्कि समाज की भी सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में खनन उद्योग विभिन्न कानूनी प्रावधानों और नियमों के तहत कार्य कर रहा है, जिससे पर्यावरण को न्यूनतम क्षति पहुंचे और संसाधनों का सतत उपयोग सुनिश्चित हो सके।

33 शोध पत्र प्राप्त, नई दिशाओं का निर्धारण
आयोजन सचिव डॉ. हेमंत सेन ने कॉन्फ्रेंस की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि इस राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में देश के विभिन्न हिस्सों से कुल 33 शोध पत्र प्राप्त हुए। इन शोध पत्रों के माध्यम से प्रस्तुत उच्च गुणवत्ता वाले शोध निष्कर्ष, विषय विशेषज्ञों के अनुभव और ज्ञान के समन्वय से पर्यावरणीय स्थिरता के क्षेत्र में नई दिशाएं, नए परिवर्तन और नए आयाम स्थापित होंगे।

अतिथियों का स्वागत एवं तकनीकी सत्रों की जानकारी
संयुक्त आयोजन सचिव श्री करण सिंह ने सभी पधारे हुए अतिथियों का स्वागत उद्बोधन प्रस्तुत किया। वहीं श्री देवेंद्र सिंह ने कॉन्फ्रेंस के दौरान आयोजित तकनीकी सत्रों की विस्तृत जानकारी दी। कॉन्फ्रेंस के संदर्भ में श्री विनोद पांडे, श्री जाकिर हुसैन एवं डॉ. ए.के. वशिष्ठ ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

विभिन्न तकनीकी विषयों पर विशेषज्ञ व्याख्यान
उच्च स्तरीय इस कॉन्फ्रेंस के दौरान देश-विदेश के विषय विशेषज्ञों द्वारा कई महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से व्याख्यान प्रस्तुत किए गए। डॉ. विनोद अग्रवाल एवं डॉ. हेमंत सेन ने Environmental Sustainability in Mining Sector विषय पर विचार रखे। श्री वी.के. पांडे ने Use of Metal Organic Framework in Energy Transition पर प्रस्तुति दी।
प्रो. सीमा जालान ने Sustaining the Aravalli: The Definitional Challenges, Implications and Potential Solutions विषय पर विस्तार से चर्चा की। श्री सतीश कुमार श्रीमाली ने Statutory Requirements for the Grant of Environmental Clearance to Maintain Environmental Sustainability in Mining and Mineral Industries विषय पर अपने विचार साझा किए। वहीं के. वेंकटेश्वरलू, बी. सुडौलू एवं पी. रवि किरण ने Sustainable Coal Mining: The Singareni Approach विषय पर व्याख्यान प्रस्तुत किया।

सम्मान और आभार
कॉन्फ्रेंस अध्यक्ष प्रो. रेणू राठौड़ एवं कॉन्फ्रेंस निदेशक प्रो. रितु तोमर ने सभी विषय विशेषज्ञों एवं अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। कॉन्फ्रेंस के मुख्य संरक्षक समानार्थ मानद कर्नल प्रो. शिव सिंह सारंगदेवोत, संरक्षक डॉ. महेंद्र सिंह राठौड़, सह-संरक्षक श्री मोहब्बत सिंह राठौड़, प्रो. चेतन सिंह चौहान, डॉ. निरंजन नारायण सिंह राठौड़ एवं डॉ. युवराज सिंह राठौड़ ने कॉन्फ्रेंस के सफल आयोजन हेतु अपनी शुभकामनाएं प्रेषित कीं। इस अवसर पर महाविद्यालय के सभी संकाय अधिष्ठाता एवं सदस्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. तन्वी अग्रवाल द्वारा किया गया।

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