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पुण्यतिथि पर बापू को नमन: राजस्थान विद्यापीठ में सत्य–अहिंसा और रामराज्य की चेतना पर विमर्श

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24 News Update उदयपुर। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि एवं शहीद दिवस के अवसर पर राजस्थान विद्यापीठ विश्वविद्यालय में शुक्रवार को श्रद्धा, विचार और आत्ममंथन का संगम देखने को मिला। कुलपति सचिवालय के सभागार में आयोजित एक दिवसीय संगोष्ठी में गांधीजी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया गया और उनके विचारों की प्रासंगिकता पर गंभीर विमर्श हुआ।
इस अवसर पर कुलपति प्रो. एस.एस. सारंगदेवोत ने कहा कि महात्मा गांधी केवल स्वराज्य के नहीं, बल्कि रामराज्य के भी प्रबल पक्षधर थे। वे इन दोनों को एक-दूसरे से अलग नहीं, बल्कि अन्योन्याश्रित मानते थे। गांधीजी के विचारों में रामराज्य का अर्थ किसी धार्मिक सत्ता से नहीं, बल्कि न्याय, नैतिकता और लोककल्याण पर आधारित व्यवस्था से था।
उन्होंने गांधीजी की पुस्तक “मेरे सपनों का भारत” का उल्लेख करते हुए कहा कि गांधी के लिए भारत कर्मभूमि था और उसी कर्मभूमि में रामराज्य की स्थापना उनका सबसे बड़ा स्वप्न था।
कुलपति ने कहा कि गांधीजी का संपूर्ण जीवन समाज के लिए एक जीवंत आदर्श है। वे ऐसे राजनेता थे जिन्हें दुनिया ने केवल नेता नहीं, बल्कि संत के रूप में स्मरण किया। उनके सत्य और अहिंसा के सिद्धांतों ने न केवल भारत को स्वतंत्रता दिलाई, बल्कि पूरी दुनिया को संघर्ष का एक नैतिक मार्ग दिखाया। मार्टिन लूथर किंग जूनियर से लेकर बराक ओबामा तक अनेक वैश्विक नेताओं ने गांधीजी को अपना आदर्श माना।
उन्होंने कहा कि जब भी गांधी का नाम लिया जाता है, तो सबसे पहले सत्य और अहिंसा के दो शब्द स्वतः मन में उभर आते हैं। सत्य के प्रति अडिग रहते हुए गांधीजी ने अपना संपूर्ण जीवन राष्ट्र को समर्पित कर दिया। उनके विचार—सत्य, अहिंसा, स्वराज और सत्याग्रह—कालजयी हैं और आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं। सादा जीवन, उच्च विचार और प्रकृति के प्रति उनका गहरा प्रेम ही वह शक्ति थी, जिसने उन्हें पूरे देश का ‘बापू’ बना दिया।
कार्यक्रम में रजिस्ट्रार डॉ. तरुण श्रीमाली, डॉ. भवानीपाल सिंह राठौड़, डॉ. अमी राठौड़, डॉ. चन्द्रेश छतलानी, डॉ. उदयभान सिंह सहित विश्वविद्यालय के अधिकारी, शिक्षक, कर्मचारी और कार्यकर्ताओं ने गांधीजी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की और उनके आदर्शों को आत्मसात करने का संकल्प लिया।

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