उदयपुर, 20 दिसम्बर – राजस्थान विद्यापीठ विश्वविद्यालय के संघटक लोकमान्य तिलक शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय की ओर से सिरोही स्थित पावापुरी विजय पताका धाम में विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास हेतु आयोजित तीन दिवसीय आवासीय वनशाला शिविर का शनिवार को उद्घाटन किया गया। कुल 600 विद्यार्थियों के दल को कुलपति प्रो. एस.एस. सारंगदेवोत, प्राचार्य प्रो. सरोज गर्ग, डॉ. अमी राठौड़, डॉ. सुनिता मुर्डिया, डॉ. बलिदान जैन और डॉ. भुरालाल श्रीमाली ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
गांवों की परंपरा और ग्रामीण जीवन से रूबरू होंगे विद्यार्थी
कुलपति प्रो. सारंगदेवोत ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि यह आवासीय शिविर टीम वर्क, आत्मविश्वास और एक-दूसरे की मदद करने की भावना विकसित करने में सहायक होगा। उन्होंने कहा, “देश की आत्मा गांवों में बसती है, जहां हमारी भारतीय संस्कृति, परंपरा और विरासत जिंदा हैं। लेकिन आधुनिक दौर में गांवों से शहरों की ओर पलायन बढ़ा है। इसे रोकने के लिए ग्रामीण स्तर पर रोजगार के अवसर और कौशल विकास की शिक्षा आवश्यक है।”
उन्होंने विद्यार्थियों को निर्देश दिया कि तीन दिनों तक समूह बनाकर गांवों का सर्वेक्षण करें, वहां की समस्याओं को जानें और उन्हें संबंधित विभागों के माध्यम से समाधान दिलाने का प्रयास करें।

छात्रावासों और शिक्षा की दिशा में उल्लेखनीय योगदान
प्रो. सारंगदेवोत ने संस्थापक मनीषी जनुभाई के योगदान का स्मरण करते हुए कहा कि 1937 में विद्यापीठ की स्थापना वंचित और सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों तक शिक्षा पहुँचाने के उद्देश्य से हुई थी। उस समय पांच कार्यकर्ता और लालटेन के माध्यम से रात्रिकालीन पाठशालाएं आयोजित की जाती थीं।
ग्रामीण जीवन का समग्र अध्ययन और सामाजिक संदेश
वनशाला शिविर के दौरान विद्यार्थी मंडवा, सांणेश्वर और सिरोही के आसपास के गांवों में आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय बदलावों का अध्ययन करेंगे। विद्यार्थियों को यह भी बताया जाएगा कि स्वच्छ भारत, स्वस्थ भारत, शिक्षा का अधिकार, बेटी बचाओं-बेटी पढ़ाओं, जननी सुरक्षा, जल स्वावलंबन, पर्यावरण संरक्षण जैसी योजनाओं का लाभ ग्रामीणों तक कैसे पहुंचाया जा सकता है।
शाम को गांवों में लगने वाली चौपालों में नुक्कड़ नाटकों और संवादात्मक गतिविधियों के माध्यम से यह संदेश ग्रामीणों तक पहुँचाया जाएगा।
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