24 News Update Udaipur. उदयपुर स्थित दर्शन डेंटल कॉलेज एवं अस्पताल में जन्मजात ओष्ठ एवं तालु विदर (Cleft Lip and Palate) से पीड़ित नवजात बच्चों के उपचार की दिशा में एक प्रेरणादायी पहल करते हुए नासोएलवोलर मोल्डिंग (NAM) थेरेपी को सफलतापूर्वक लागू किया गया है। पीडियाट्रिक एवं प्रिवेंटिव डेंटिस्ट्री विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. रुचि अरोरा के नेतृत्व में दो नवजातों—3.5 माह के बालक और 6 माह की बालिका—का उपचार किया गया, जिन्हें आरएनटी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, उदयपुर के प्लास्टिक सर्जन डॉ. विकास चौधरी और उनकी टीम द्वारा दर्शन डेंटल कॉलेज रेफर किया गया था।
NAM थेरेपी के बाद 6 माह की बालिका में होंठ सुधार सर्जरी आरएनटी अस्पताल में सफलतापूर्वक की गई, जिससे चेहरे की संरचना और कार्यात्मक क्षमता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। डॉ. रुचि अरोरा ने बताया कि NAM एक गैर-शल्य चिकित्सा पद्धति है, जो सर्जरी से पूर्व ओष्ठ, नासिका एवं नासोएलवोलर सेगमेंट को फिर से आकार देने में सहायक होती है। यह थेरेपी शल्य चिकित्सा को अधिक सरल बनाकर आवश्यक ऑपरेशनों की संख्या घटाने में मदद करती है।
दर्शन डेंटल कॉलेज, एक स्नातकोत्तर शिक्षण संस्थान होने के नाते, इस नवाचार को पूर्णतः निशुल्क प्रदान कर रहा है। कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. विकास पुनिया ने बताया कि सामाजिक सेवा की भावना से प्रेरित होकर माता-पिता को उपकरण की देखभाल, उपयोग की विधि तथा नियमित फॉलोअप की समस्त जानकारी भी दी गई। डॉ. विकास पुनिया ने यह भी बताया कि भविष्य में डॉ. विकास चौधरी और उनकी प्लास्टिक सर्जरी टीम के सहयोग से ऐसे और अधिक बच्चों को इस सेवा का लाभ दिया जाएगा तथा NAM थेरेपी को व्यापक और उन्नत स्तर तक ले जाने के प्रयास किए जाएँगे। दोनों नवजातों के परिजनों ने इस सेवाभावी पहल के लिए दर्शन डेंटल कॉलेज, आरएनटी मेडिकल कॉलेज, डॉ. रुचि अरोरा, डॉ. विकास पुनिया एवं डॉ. विकास चौधरी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके बच्चों के चेहरे की बनावट में उल्लेखनीय सुधार हुआ है, जिससे आगे की सर्जरी अब अपेक्षाकृत सरल प्रतीत हो रही है।
ओष्ठ एवं तालु विदर से पीड़ित नवजातों के चेहरे की बनावट में आया सुधार, शल्य चिकित्सा हुई सरल

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