आयुर्वेद से रोगों का जड़ से उपचार संभव : केबिनेट मंत्री बाबूलाल खराड़ी
उदयपुर। भारत की प्राचीनतम एवं वैज्ञानिक चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद आज भी गंभीर रोगों के स्थायी उपचार में सक्षम है। आयुर्वेद को अपनाकर रोगों को जड़ से समाप्त किया जा सकता है। यह विचार केबिनेट मंत्री बाबूलाल खराड़ी ने रविवार को उदयपुर में आयोजित दस दिवसीय निःशुल्क आयुर्वेद अंतरंग शल्य चिकित्सा शिविर के शुभारम्भ अवसर पर व्यक्त किए।
आयुष मंत्रालय, भारत सरकार के राष्ट्रीय आयुष मिशन के अंतर्गत आयुर्वेद विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा आयोजित यह शिविर 14 से 23 दिसंबर तक सेवा भारती चिकित्सालय, हरिदास जी की मगरी, सुभाष चौराहा, उदयपुर में आयोजित किया जा रहा है।
शिविर का उद्घाटन केबिनेट मंत्री बाबूलाल खराड़ी, सांसद डॉ. मन्नालाल रावत एवं शहर विधायक ताराचंद जैन ने किया। कार्यक्रम की शुरुआत भगवान धन्वंतरि की पूजा-अर्चना से हुई।
इस अवसर पर केबिनेट मंत्री खराड़ी ने कहा कि आयुर्वेद केवल चिकित्सा नहीं बल्कि जीवनशैली है, जिसे अपनाकर समाज स्वस्थ रह सकता है। सांसद डॉ. मन्नालाल रावत ने आयुर्वेद को सुरक्षित, प्राकृतिक और प्रभावी बताते हुए आमजन से इसे दिनचर्या में शामिल करने का आह्वान किया। विधायक ताराचंद जैन ने कहा कि ऐसे शिविर आम जनता को राहत देने के साथ आयुर्वेद के प्रति विश्वास को मजबूत कर रहे हैं।
क्षारसूत्र से पाइल्स, फिस्टुला व फिशर का निःशुल्क उपचार
आयुर्वेद विभाग उदयपुर के उपनिदेशक डॉ. राजीव भट्ट ने बताया कि शिविर में पाइल्स, फिस्टुला एवं फिशर रोगों का उपचार आयुर्वेद की प्रमाणिक क्षारसूत्र शल्य चिकित्सा पद्धति से निःशुल्क किया जा रहा है। अनुभवी आयुर्वेद शल्य चिकित्सकों द्वारा आधुनिक एनेस्थीसिया सुविधा के साथ उपचार किया जा रहा है।
शिविर संयोजक एवं प्रभारी वैद्य डॉ. शोभालाल औदिच्य ने बताया कि पंचकर्म चिकित्सा के माध्यम से गठिया, जोड़ दर्द, कमर दर्द, सर्वाइकल, माइग्रेन, स्नायु विकार एवं पुराने दर्दों का उपचार किया जा रहा है।
बिना दवा, बिना सर्जरी न्यूरोथैरेपी
19 दिसंबर से कोटा के प्रसिद्ध न्यूरोथेरेपिस्ट डॉ. मनोज शर्मा एवं उनकी टीम द्वारा सायटिका, स्पॉन्डिलाइटिस, फ्रोजन शोल्डर, सर्वाइकल व नसों के दर्द का बिना दवा और बिना सर्जरी उपचार किया जाएगा।
योग, स्वर्ण प्राशन और जीवनशैली परामर्श
15 से 23 दिसंबर तक प्रतिदिन प्रातः योग एवं प्राणायाम सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। 6 माह से 16 वर्ष तक के बच्चों के लिए स्वर्ण प्राशन महाभियान भी प्रतिदिन संचालित किया जा रहा है। साथ ही प्रकृति परीक्षण द्वारा खान-पान व जीवनशैली परामर्श दिया जा रहा है।
प्रथम दिन ही बड़ी संख्या में रोगियों को लाभ
शिविर के पहले दिन अंतरंग विभाग में 40 से अधिक रोगियों को भर्ती किया गया, जबकि बहिरंग विभाग में 160 से अधिक रोगियों ने उपचार का लाभ लिया। महिला एवं पुरुष रोगियों के लिए पृथक वार्ड, ऑपरेशन थिएटर, पंचकर्म कक्ष, औषध वितरण एवं अन्य सभी आवश्यक व्यवस्थाएँ सुनिश्चित की गई हैं।
शुभारम्भ अवसर पर अतिथियों ने शिविर स्थल का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं की सराहना की।

