24 न्यूज अपडेट नेशनल डेस्क। हरियाणा के पंचकूला में एक ऐसा हृदय विदारक हादसा सामने आया जिसने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया। एक ही परिवार के सात सदस्यों ने जहर खाकर सामूहिक आत्महत्या कर ली। जिस गाड़ी में ये हादसा हुआ, वही अब इस परिवार के बिखरे सपनों, टूटे संघर्षों और असहाय हालात की गवाह बन गई है। पंचकूला के मनसा देवी कॉम्प्लेक्स में एक किराए के मकान में रहने वाला मित्तल परिवार सोमवार देर रात जैसे हमेशा के लिए खामोश हो गया। रात के अंधेरे में एक कार में बैठे परिवार के सदस्य धीरे-धीरे विष पीते गए और मौत की नींद में समा गए। पड़ोसियों की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची, तो गाड़ी में एक व्यक्ति—प्रवीण मित्तल—अभी भी जीवित था, मगर अस्पताल पहुंचते-पहुंचते उसने भी दम तोड़ दिया।
जहर, कर्ज और टूटी उम्मीदों की दास्तां
मृतकों की पहचान प्रवीण मित्तल, उनकी पत्नी रीना, माता विमला, पिता देशराज, 11 वर्षीय जुड़वां बेटियां हिमशिखा और दलिशा, और 14 वर्षीय बेटा हार्दिक के रूप में हुई है। यह पूरा परिवार आर्थिक तंगी, भारी कर्ज और सामाजिक तिरस्कार से टूट चुका था। बताया गया है कि देहरादून में प्रवीण ने “टूर एंड ट्रैवल्स” का कारोबार शुरू किया था लेकिन घाटा उठाना पड़ा। कर्ज की रकम लगभग 20 करोड़ तक पहुंच गई थी। इस भीषण कदम से कुछ ही घंटे पहले पूरा परिवार पंचकूला में सेक्टर 5 में बागेश्वर धाम के बाबा धीरेंद्र शास्त्री की कथा में भाग लेकर लौटा था। शायद एक अंतिम आस लेकर वे वहां पहुंचे थे, लेकिन कथा से लौटते ही उन्होंने गाड़ी में बैठकर जहर खा लिया। यह वही गाड़ी थी जो देहरादून निवासी गंभीर सिंह नेगी के नाम रजिस्टर्ड है, जिन्होंने प्रवीण को एक NGO के काम के सिलसिले में जानकर गाड़ी दी थी।
सुसाइड नोट में बैंकरप्ट होने की बात, ससुर को निर्दोष ठहराया
कार से एक दो पेज का सुसाइड नोट बरामद हुआ जिसमें लिखा था—”मैं बैंकरप्ट हो चुका हूं, मेरी वजह से ही सब कुछ हुआ है। मेरे ससुर को किसी भी तरह से दोष न दें। अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी मेरे मामा के बेटे को दी जाए।” पुलिस अब उस नोट में उल्लिखित नामों की जांच कर रही है।
प्रत्यक्षदर्शियों की आंखों में बसी वह भयावह रात
पास में रहने वाले युवक हर्ष ने बताया कि रात करीब 10:30 बजे उनके मकान मालिक ने सड़क किनारे खड़ी हुंडई ऑरा कार में हलचल देखी। नजदीक जाकर देखा तो कार के अंदर एक व्यक्ति जीवित था, जबकि बाकी सभी बेसुध पड़े थे। प्रवीण ने तब बताया, “होटल नहीं मिला तो गाड़ी में सोने का निर्णय लिया।” लेकिन शक होने पर जब गाड़ी की जांच की गई तो सभी ने उल्टियां की हुई थीं और विष का असर साफ दिख रहा था।
बैंक का बकाया और परिवार से टूटा रिश्ता
प्रवीण के ससुर राकेश गुप्ता ने बताया कि प्रवीण ने करीब 10 साल पहले एक करोड़ रुपये का लोन लिया था और फिर देहरादून में व्यापार शुरू किया। घाटा होने के बाद वह पूरे परिवार के साथ संपर्क तोड़कर रह रहा था। कुछ दिन पहले पता चला कि वे पंचकूला लौट आए हैं। बेटी रीना की मदद करने की कोशिश भी की थी, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
प्रवीण की बहन का बयान—बैंक ने भगोड़ा घोषित किया था
प्रवीण की पत्नी रीना की बहन राखी गुप्ता ने बताया कि बैंक ने जब कर्ज वसूली के लिए दबाव बनाया और प्रवीण भागा-भागा सा रहने लगा, तो उसे “भगोड़ा” घोषित कर दिया गया। हाल ही में रीना अपने बच्चों का स्कूल में एडमिशन कराने आई थी, तब उसकी मुलाकात राखी से हुई थी।
कभी फैक्ट्री मालिक, अब टैक्सी ड्राइवर
प्रवीण के मामा के लड़के संदीप अग्रवाल ने बताया कि एक समय था जब प्रवीण पंचकूला में स्क्रैप फैक्ट्री चलाता था। फिर व्यापार में नुकसान हुआ और देहरादून चला गया। वहां भी हालात नहीं सुधरे। जान से मारने की धमकियां मिलने लगीं और वह टैक्सी चलाने लगा। पर जीवन की जद्दोजहद में वह खुद को और परिवार को नहीं बचा सका।
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