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राष्ट्रपति के साले की करतूत : मालदीव दौरे से पहले प्रधानमंत्री मोदी को ’आतंकवादी’ लिखा, दबाव बढ़ते ही ट्विट डिलीट कर दिया

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24 न्यूज अपडेट, नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगामी मालदीव दौरे से ठीक पहले वहां के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू के साले और सलफी जमीयत संगठन के नेता शेख अब्दुल्लाह बिन मोहम्मद इब्राहिम की एक नापाक करतूत सामने आई है। सोशल मीडिया पर विवादित पोस्ट कर उन्हें ’आतंकवादी’ बताया और इस्लाम का दुश्मन करार दिया। अब्दुल्लाह ने ग् (पूर्व ट्विटर) पर धिवेही भाषा में पोस्ट करते हुए लिखा कि मोदी ने बाबरी मस्जिद गिराई, पुरानी मुस्लिम जमीनें लूटीं और अहमदाबाद को कब्रिस्तान में बदल दिया। उन्होंने यह भी लिखा कि मोदी को मालदीव बुलाना एक बड़ी गलती है। यह पोस्ट तेजी से वायरल हुई और विवाद बढ़ता देख अब्दुल्लाह ने इसे डिलीट कर दिया। अब तक मालदीव सरकार की ओर से इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। शेख अब्दुल्लाह राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू की पत्नी साजिदा मोहम्मद से संबंधित संगठन से जुड़े हुए हैं और देश में एक प्रभावशाली धार्मिक नेता माने जाते हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25-26 जुलाई को मालदीव की आधिकारिक यात्रा पर रहेंगे। 26 जुलाई को मालदीव का स्वतंत्रता दिवस मनाया जाएगा, जिसमें वे मुख्य अतिथि के रूप में भाग लेंगे। इस दौरान वे मालदीव के राष्ट्रपति मुइज्जू के साथ द्विपक्षीय बातचीत करेंगे, जिसमें समुद्री सुरक्षा, व्यापार, जलवायु परिवर्तन, इन्फ्रास्ट्रक्चर सहयोग जैसे प्रमुख विषयों पर चर्चा होने की संभावना है। यह प्रधानमंत्री मोदी की मालदीव की तीसरी यात्रा होगी। इससे पहले वे नवंबर 2018 में राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए थे और जून 2019 में उन्होंने मालदीव की संसद (मजलिस) को संबोधित किया था, साथ ही कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन किया था। अक्टूबर 2024 में भारत और मालदीव के बीच हुई उच्चस्तरीय बातचीत के बाद मुक्त व्यापार समझौते पर काम भी शुरू किया गया है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद का बयान भी सामने आया है जिसमें उन्होंने भारत की आर्थिक सहायता की सराहना की है। नशीद ने इंटरव्यू में कहा कि अगर भारत ने समय पर मालदीव की मदद नहीं की होती, तो देश डिफॉल्ट की स्थिति में पहुंच जाता। उन्होंने यह भी कहा कि भारत ने संकट के समय मालदीव की इकोनॉमी को संभालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। शेख अब्दुल्लाह के बयान और प्रधानमंत्री मोदी की प्रस्तावित यात्रा के बीच यह टिप्पणी भारत-मालदीव संबंधों की विविधतापूर्ण राजनीतिक और कूटनीतिक परिस्थितियों को दर्शाती है।

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