24 न्यूज अपडेट, नेशनल ब्यूरो। हर बार भारत सरकार की ओर से बजट में दुनियाभर के देशों को आर्थिक मदद दी जाती है। खास तौर पर पडोसी देशों की तो बल्ले-बल्ले हो जाती हैं। ये पैसा उनको देना इसलिए जरूरी होता है ताकि वे हमारे मित्र बने रहें व विश्व मंच पर रात-बिरात में हमारे काम आ सकें। हमारे पक्ष में हमारी बातों को बुलंद कर सकें। इस बार के बजट में केंद्र सरकार ने पडोसी देशों सहित पूरी दुनिया के देशों को 4773 करोड रूपए का प्रस्ताव दिया है। इसमें से जोर का झटका चीन के समर्थक मालदीव को दिया है। पिछली बार के मुकाबले मालदीव को हमसे 370 करोड कम मिले हैं। श्रीलंका की निकल पड़ी है उसको इस बार हम चार गुना अधिक रकम दे रहे हैं। पिछले साल विदेश मंत्रालय को 29 हजार 121 करोड़ रुपए दिए गए थे। इसमें 6,967 हजार करोड़ की कटौती की गई है। विदेश मंत्रालय के बजट में ’नेबर्स फर्स्ट पॉलिसी’ और ’सागर मिशन’ के तहत भारत के पड़ोसी और मित्र देशों को आर्थिक मदद के लिए राशि आवंटित की गई है। इनमें भूटान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका और मालदीव समेत 10 देश शामिल हैं। इसके अलावा कई अफ्रीकी, लैटिन अमेरिकी और यूरोएशियाई देशों के लिए भी एड का प्रावधान है। सबसे ज्यादा राशि भूटान को दी गई है। भूटान के लिए 2 हजार 68 करोड़ का पैकेज रखा गया है। हालांकि, यह पिछले साल से करीब 400 करोड़ कम है। श्रीलंका और नेपाल के लिए बजट में बढ़ोतरी हुई है। इसमें श्रीलंका की मदद 60 करोड़ से 4 गुना से ज्यादा बढ़ाकर 245 करोड़ कर दी है। वहीं नेपाल में चीन समर्थक केपी ओली की सरकार बनने के बावजूद देश के लिए आर्थिक मदद को 650 करोड़ से बढ़ाकर 700 करोड़ किया गया है। अफगानिस्तान, मालदीव और म्यांमार को मिलने वाला पैकेज कम कर दिया गया है। मालदीव को पिछले साल 770 करोड़ रुपए की मदद दी गई थी, जबकि इस साल इसे घटाकर 400 करोड़ कर दिया गया है। ईरान के चाबहार पोर्ट के लिए बजट में 100 करोड़ रुपए खर्च करने की बात कही गई है। इसी के साथ भारत सरकार दूसरे देशों की मदद के लिए कुल 4 हजार 773 करोड़ रुपए खर्च करेगी। इसके अलावा 7 अक्टूबर से इजराइल और गाजा में जारी जंग के बावजूद बजट में गाजा या फिलिस्तीन के लिए अलग से आर्थिक मदद का जिक्र नहीं किया गया है।
बजट में सबसे ज्यादा कटौती चीन समर्थक मालदीव के पैकेज में की गई है। 2023 में मालदीव के लिए आर्थिक मदद को 183 करोड़ से बढ़ाकर 770 करोड़ किया गया था। वहीं इस साल इसे 400 करोड़ कर दिया गया है। दरअसल, पिछले साल नवंबर में मालदीव में ’इंडिया आउट’ कैंपेन चलाने वाले मोहम्मद मुइज्जू की सरकार आने के बाद से दोनों देशों में तनाव है। मुइज्जू ने भारतीय सैनिकों को मालदीव से निकालने की घोषणा की थी। इस साल मई में सभी 88 सैनिक भारत लौट आए। इसके अलावा 4 जनवरी को च्ड मोदी के लक्षदीप दौरे के बाद मालदीव के मंत्रियों ने मोदी पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था कि भारत सर्विस के मामले में मालदीव का मुकाबला नहीं कर सकता। इस विवाद के बाद भारत से मालदीव जाने वाले पर्यटकों की संख्या में बड़ी गिरावट आई। दोनों देशों में तनाव के बीच राष्ट्रपति मुइज्जू ने भारत के साथ हाइड्रोग्राफिक सर्वे एग्रीमेंट भी खत्म कर दिया था।
बजट में पड़ोसी देशों को भारत देगा 4773 करोड़, चीन समर्थक मालदीव को झटका, पैकेज में 370 करोड़ काटे, श्रीलंका की निकल पड़ी, 4 गुना ज्यादा मदद

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