24 News Update उदयपुर। कुराबड़ पुलिस ने गैंग की कमर को तोड़ते हुए मोहित ज्वैलर्स चोरी कांड का पूरा खुलासा कर दिया है। उदयपुर जिले के कुराबड़ कस्बे में 14 मार्च की रात हुई बड़ी ज्वैलरी चोरी की वारदात को पुलिस की सूझबूझ और अपराधियों की चालाकी के बीच चली 15 दिनों की जंग के बाद सुलझा दिया गया। उदयपुर पुलिस ने इस मामले में पर्दाफाश करते हुए तीन शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया है और उनके कब्जे से 30 किलो चांदी के जेवरात बरामद किए हैं, जबकि तीन आरोपी अब भी फरार हैं। बाकी जेवरात व सोना बरामद होना बाकी है।
मामले के खुलासे में 61 पुलिसकर्मियों की टीम लगी जिसमें थाना कुराबड़ के 33 सदस्य, थाना गोवर्धनविलास के 4 सदस्य, थाना प्रतापनगर के 2 सदस्य, साइबर सेल के 3 सदस्य, जिला स्पेशल टीम के 16 सदस्य, चित्तौड़गढ़ पुलिस टीम के 3 सदस्य
शामिल थे।
कहानी शुरू होती है 15 मार्च 2026 की सुबह से, जब कुराबड़ निवासी अशोक सोनी ने थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई कि उनकी दुकान “मोहित ज्वैलर्स” के ताले तोड़कर रातों-रात करीब 20 तोला सोना और 100 किलो चांदी के आभूषण चोरी कर लिए गए। मामला दर्ज होते ही पुलिस हरकत में आई व टीमों का गठन हुआ। जिला पुलिस अधीक्षक डॉ. अमृता दुहन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सात विशेष टीमों का गठन किया। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक गोपाल स्वरूप मेवाड़ा और पुलिस उप अधीक्षक गोपाल चंदेल के सुपरविजन में थानाधिकारी तेजुसिंह के नेतृत्व में टीमों ने सीसीटीवी फुटेज खंगाले, तकनीकी साक्ष्य जुटाए और पुराने अपराधियों की कुंडली खंगालनी शुरू की।
जांच के दौरान पुलिस को एक पैटर्न नजर आया—वारदातें सुनसान इलाकों में, रात के समय और बेहद सफाई से की गई थीं। सुराग धीरे-धीरे चित्तौड़गढ़ जिले के बिजयपुर क्षेत्र तक जा पहुंचे। 28 मार्च को पुलिस ने शिवलाल उर्फ शिया, कालूलाल कंजर और महेन्द्र कंजर को डिटेन कर पूछताछ की। शुरुआत में चुप्पी साधे बैठे आरोपियों ने आखिरकार सख्ती के आगे जुर्म कबूल लिया।
पूछताछ में सामने आया कि यह कोई अकेली चोरी नहीं, बल्कि छह लोगों का संगठित गिरोह है, जो लंबे समय से इसी तरीके से वारदातें कर रहा था। सबसे चौंकाने वाला खुलासा था इनका तरीका—आरोपी रात में मोटरसाइकिलों से निकलते, महिलाओं के कपड़े पहनकर अपनी पहचान छिपाते, हथियार साथ रखते और सूने मकानों व दुकानों को निशाना बनाते। ताले तोड़कर मिनटों में माल समेटते और अंधेरे में गायब हो जाते। इसके अलावा पुलिस से बचने के लिए पक्षियों जैसी आवाज में बातें करते ािे व मोबाइल फोन का उपयोग नहीं करते थे।
गिरफ्तार तीनों आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने 30 किलो चांदी के आभूषण बरामद कर लिए हैं। हालांकि अभी भी बड़ी मात्रा में चोरी का माल बरामद होना बाकी है और गिरोह के तीन सदस्य—अर्जुन कंजर, रामचन्द्र कंजर और कुंदन कंजर—फरार हैं, जिनकी तलाश में पुलिस लगातार दबिश दे रही है।
अगर अपराध रिकॉर्ड पर नजर डालें तो यह कोई नए खिलाड़ी नहीं हैं—शिवलाल पर 6, कालूलाल पर 8 और महेन्द्र पर 16 मामले पहले से दर्ज हैं। फरार आरोपी रामचन्द्र पर भी 3 मामले दर्ज हैं। यानी यह गिरोह अपराध की दुनिया में पहले से ‘माहिर’ था।
इस पूरे ऑपरेशन की सबसे बड़ी खासियत रही पुलिस टीमों का तालमेल। कुराबड़ थाना से लेकर गोवर्धनविलास, प्रतापनगर, साइबर सेल, जिला स्पेशल टीम और चित्तौड़गढ़ पुलिस तक—पुलिसकर्मियों की संयुक्त मेहनत ने इस केस को सुलझाया।
प्रमुख पुलिस टीम
थानाधिकारी तेजुसिंह के नेतृत्व में सुखदेव, लालूराम, भगवतसिंह, गोवर्धनलाल, ईश्वरलाल, शांतिलाल, प्रकाशचन्द्र, रूपलाल, पुष्करलाल, राजेन्द्र कुमार, मुकेश कुमार, विक्रमसिंह, मुराराम, लोकेश कुमार, शंकरलाल, कानाराम, रामकरण, लोकेन्द्रसिंह, माधुसिंह, मंवरसिंह, भूपेन्द्र कुमार डांगी, मुकेश, मोहनसिंह, लालसिंह, राजेन्द्रसिंह, आकाश कुमार, सरिता कुंवर, सविता, निरमा, धनश्यामसिंह, नरेन्द्रसिंह, लक्ष्मणलाल (चालक)
साथ ही गोवर्धनविलास से राजेन्द्रसिंह, मनोहरसिंह, प्रहलाद पाटीदार, दिनेश; प्रतापनगर से रामस्वरूप, सोहन शर्मा; साइबर सेल से लोकेश रायकयाल, लोकेश गवारिया, अंकित; जिला स्पेशल टीम से विक्रमसिंह, योगेश कुमार, करतारसिंह, अखिलेश्वर कुमार, भंवरलाल, हितेन्द्रसिंह, जगदीशचन्द्र, गणेशसिंह, कमलेश कुमार, सुमेरसिंह, सुमित, शक्तिसिंह, मुकेश, जितेन्द्र, वीरेन्द्र, कृष्ण कुमार; तथा चित्तौड़गढ़ के बिजयपुर थाना से रामलाल, रामावतार और बेंगु से ललितसिंह की भूमिका रही।

