उदयपुर, 8 मार्च।चैत्र शुक्ल प्रतिपदा विक्रम संवत 2083 के पावन अवसर पर उदयपुर में इस वर्ष भी भारतीय नववर्ष उत्सव श्रद्धा, परंपरा और सांस्कृतिक गौरव के साथ मनाया जाएगा। भारतीय नववर्ष समाजोत्सव समिति, उदयपुर के तत्वावधान में आयोजित होने वाले इस महोत्सव के अंतर्गत 18 मार्च से शहर में विभिन्न धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यक्रमों की श्रृंखला शुरू होगी, जिसका समापन 22 मार्च को भव्य शोभायात्रा के साथ होगा। आयोजन की तैयारियों को लेकर सेक्टर 4 स्थित विद्या निकेतन के भागीरथ सभागार में समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में शहर के विभिन्न समाजों और संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लेकर कार्यक्रम की रूपरेखा पर विस्तार से चर्चा की। बैठक में समिति के संयोजक डॉ. परमवीर सिंह दुलावत ने पिछले वर्ष आयोजित भारतीय नववर्ष उत्सव का प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए बताया कि बीते वर्ष शहरवासियों ने बड़े उत्साह के साथ इस आयोजन में भाग लिया था। उन्होंने कहा कि इस बार भी आयोजन को और अधिक भव्य एवं जनभागीदारी से परिपूर्ण बनाने का लक्ष्य रखा गया है। समिति के संरक्षक विष्णु शंकर नागदा ने इस वर्ष होने वाले कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए बताया कि भारतीय नववर्ष के स्वागत में 18 मार्च को शहर में भगवा चार पहिया वाहन रैली निकाली जाएगी। यह रैली शहरवासियों को भारतीय नववर्ष के महत्व और सांस्कृतिक परंपराओं से जोड़ने का संदेश देगी। उन्होंने बताया कि नववर्ष की पूर्व संध्या पर उदयपुर के 9 प्रमुख मंदिरों में घोष वादन का आयोजन किया जाएगा, जिससे पूरे शहर में आध्यात्मिक वातावरण बनेगा। इसके साथ ही 20 मार्च को शहर की 73 बस्तियों के मंदिरों में महारती का आयोजन किया जाएगा तथा शहर की प्राचीन बावड़ियों और कुंडों पर गंगा आरती कर भारतीय संस्कृति की परंपराओं को जीवंत किया जाएगा। आयोजन की सबसे आकर्षक कड़ी 22 मार्च को निकलने वाली विशाल शोभायात्रा होगी। इस शोभायात्रा में शहर के विभिन्न समाजों, संस्थाओं और बस्तियों की ओर से आकर्षक झांकियां प्रस्तुत की जाएंगी। पारंपरिक वेशभूषा में कलाकारों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, घोड़े, बग्गियां और धार्मिक ध्वजों के साथ यह शोभायात्रा पूरे शहर में भारतीय संस्कृति की झलक प्रस्तुत करेगी। संयोजक डॉ. परमवीर सिंह दुलावत ने बताया कि भारतीय नववर्ष के स्वागत में पूरे शहर को भगवा पताकाओं से सजाया जाएगा। साथ ही शोभायात्रा में अधिकाधिक जनभागीदारी सुनिश्चित करने के लिए कार्यकर्ता घर-घर जाकर आमजन को निमंत्रण देंगे, ताकि शहर का हर वर्ग इस उत्सव का हिस्सा बन सके। बैठक में मुख्य वक्ता धनराज ने कहा कि भारतीय नववर्ष केवल एक तिथि नहीं बल्कि हमारी परंपरा, संस्कृति और सामाजिक एकता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि संत-महात्माओं के आशीर्वाद और समाजजनों की सहभागिता से यह उत्सव हर वर्ष और अधिक भव्य रूप ले रहा है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपनी संस्कृति, परंपरा और सनातन मूल्यों के संरक्षण एवं प्रचार-प्रसार में सक्रिय भूमिका निभाएं, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी रहें। बैठक में उपस्थित विभिन्न समाजों के प्रतिनिधियों ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए भारतीय नववर्ष उत्सव को सामूहिक रूप से सफल बनाने का संकल्प लिया। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation “पुत्रवती भव ही क्यों? ‘पुत्रीवती भव’ क्यों नहीं?” — महिला समानता पर उठे तीखे सवाल,अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर आयोजित विचार गोष्ठी कुलगुरु प्रो. डॉ. प्रताप सिंह ने किया छात्रावास का निरीक्षण, व्यवस्थाओं का लिया जायजा, छात्रों से सीधे संवाद कर सुनी समस्याएं