रिपोर्ट—जयवंत भैरविया

24 News Update उदयपुर। उदयपुर विकास प्राधिकरण में अगर आपका लोक सूचना अधिकारी याने कि यूडीए सचिव से कोई काम पड़ जाए या कहीं किसी सरकारी पत्रावली में उनके नाम के कागजातों के दर्शन हो जाएं तो सावधान हो जाइये। आपके साथ ऐसा धोखा भी हो सकता है। सचिव साहब आपका ही आवेदन आपको दस्तावेज के रूप में वापस पकड़ा कर कभी भी लीगली कह देंगे कि हमने तो दस्तावेज दे दिया। आप घनचक्कर होकर उपर शिकायत करेंगे तो वहां भी जवाब देंगे कि हमने तो दस्तावेज दे दिया। खामख्वाह हमारा ‘टाइम खोटी’ कर रहे हैं।
उसके बाद आप क्या करेंगे? झल्लाएंगे! हंसेंगे! खुद को कोसेंगे! या फिर ढिंढोरा पीट कर सचिव साहब की नादानी का बखान करते फिरेंगे। कहेंगे कि इतना अज्ञानी कोई हो सकता है क्या?? सरकारी सिस्टम में रहते हुए इतनी बड़ी महामूर्खता कोई कर सकता है क्या?

“तुम मुझे आवेदन दो, मैं तुम्हें फोटो कॉपी दूंगा”
काम नहीं करने के बहाने बना कर टालने वाले गोलीबाज तो सिस्टम में पग—पग पर मिल जाएंगे मगर यहां तो उनके भी सरताज बैठे हैं?? लगता है जैसे फोटो कॉपी मशीन एकदम रेडी टू प्रिंट साथ लेकर तैयार बैठे रहते हैं———तुम मुझे आवेदन दो, मैं तुम्हें फोटो कॉपी दूंगा….। आप कहेंगे कि सचिव साहब,
मुझपे एक अहसान करना, मुझ पर कोई अहसान मत करना।

राहु—ल काल और RTI का मज़ाक
यूडीए के राहु—ल काल में बहुत सारी बातें अजब—गजब की हो रही हैं। उदयपुर विकास प्राधिकरण के सचिव जो लोक सूचना अधिकारी भी हैं—हेमेंद्र नागर साहब!! सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 के आवेदनों को ऐसे हल्के में ले रहे हैं जैसे ये कोई फालतू का टाइम पास, अनवांटेड काम हो।
ये लगता है कसम खाकर बैठे हैं कि आवेदक को उसका ही आवेदन सूचना के रूप में वापस चिपका कर जमकर मजे लेने हैं। सचिव साहब को आरटीआई आवेदन का मजाक और आवेदकों को फुटबॉल बनाने का खेल बहुत रास आ रहा है।
तो, आज हम भी उसी अंदाज में जनता के पक्ष में खड़े होकर कुछ सवालों की फिरकी वाली फुटबॉल उनकी तरफ उछालना चाहते हैं।

अब सुनिये सच बेधड़क!!
भ्रष्टाचार की सड़क, नोट कड़क… ऐसे अफसर हों तो क्यों ना बने घपलेबाज बेधड़क!! अब सुनिये सच बेधड़क!! उदयपुर में कोडियात टनल का नाम तो सुना होगा। उसके पास बनी हुई है आलीशान होटल ताज अरावली। वहां तक जाने के लिए एक आलीशान सड़क नदी पेटे में ही बना दी गई है। टनल के ऊपर की तरफ पहाड़ी काटकर होटल का निर्माण भी बिंदास हो रहा है।

पहाड़ी कटान, नदी पेटा और सरकारी जमीन पर कब्जा
और तो और जल संसाधन विभाग की आराजी संख्या 158, 131 व 134 पर कब्जा करके मजे से उसका उपयोग भी किया जा रहा है। ये सब बिल्कुल चौड़े धाड़े, सीना ठोककर किया जा रहा है। क्योंकि होटल को पता है कि UDA में हेमेंद्र नागर जैसे शुभचिंतक अधिकारी बैठे हैं। शिकायत आते ही उधर से आलू डालेंगे, उधर से सोना निकलने लग जाएगा???
जल संसाधन विभाग तो पहले ही एकदम पानी—पानी है रसूख के आगे इसलिए उसके अफसरों ने तो मुंह फेर लिया है।

1000 करोड़ का निवेश और बढ़ता हौसला
अब तो बताया जा रहा है कि विश्व प्रसिद्ध ब्लैक स्टोन ग्रुप ने 1000 करोड़ का इनवेस्टमेंट कर 50 % हिस्सेदारी भी इस आलीशन होटल में खरीद ली है। अब वापस आते है मुद्दे पर। उदयपुर शहर के लिये बनाई गई देवास परियोजना की कोडियात टनल और अमरजोक नदी में भराव डाल कर 50 से 60 फीट चौड़ी सड़क बनाई गई है। इस सड़क को किसने बनाया, इसकी कितनी लागत आई, आम आदमी इस सड़क पर जा सकता है या नहीं, होटल से लगती हुई UDA स्वामित्व की जमीन कौन कौन सी है, किस पर होटल का कब्जा है, और कब्जे पर क्या कार्यवाही की गई, होटल को सीवर लाइन डालने की स्वीकृति दी या नहीं??? आदि सवाल तो बनते हैं ना।

इन बिन्दुओं पर मांगी गई सूचना
जब सवाल उठे तो 6 बिंदुओं की सूचना UDA से मांगी गई।
6 बिंदुओं की सूचना इस प्रकार है—
(1) UIT / UDA द्वारा होटल ताज अरावली …
(2) होटल ताज अरावली के परिसर से लगती हुई UDA स्वामित्व की जमीन…
(3) होटल ताज अरावली द्वारा अमरजोक नदी में डाली गई सीवर लाइन…
(4) सरकारी भूमि पर किये गए अतिक्रमण पर कार्यवाही…
(5) अमरजोक नदी पर बनाई गई पुलिया…
(6) ग्राम बुझड़ा के ग्रामीणों पर लगाए गए प्रतिबंध के आदेश…

सूचना को बनाया मज़ाक, आवेदन ही सूचना बना दिया
राहु—ल काल में UDA में सचिव साहब ऐसा लगता है ओजस्वी, अति बुद्धिमान और ज्यादा ही सयाने लोगों की मंडली से घिरे हुए हैंं। आरटीआई आवेदन आते ही लगने लगा कि ये सूचना दे दी तो ‘इधर आलू डालो—उधर सोना निकलेगा’ वाली स्कीम का क्या होगा??? 30 दिन निकलने के बाद सचिव साहब ने आवेदक पर दुनिया का सबसे नायाब एहसान कर दिया। आवेदन को ही फोटो कॉपी करवा के सूचना के रूप में अपलोड कर दिया।

“प्रिंटर का टोनर खराब हो गया क्या?”
आवेदक के दिमाग का दही हो गया… इसके बाद फिर से नया आवेदन दिया गया। मगर अबकी बार सचिव साहब ने कोई जवाब ही नहीं दिया। मौनी बाबा बनके बैठ गए। आवेदक ने सोचा— लगता है प्रिंटर का टोनर खराब हो गया होगा!!

जाएं तो कहां जाएं, यहां तो हर शाख पे उल्लू बैठा है
प्रथम अपील की गई, सुनवाई UDA आयुक्त राहुल जैन को करनी थी। मगर उन्होंने भी सुनवाई नहीं की। इसके बाद राज्य सूचना आयोग में द्वितीय अपील की गई। न सचिव हेमेंद्र नागर पहुंचे, न कोई अधिवक्ता। फोटो कॉपी वाले कांड को ही “सूचना दे दी” बताकर आयोग को टोपी पहना दी गई। सूचना आयुक्त सुनील शर्मा ने बिना जांचे-परखे अपील खारिज कर दी और रेस-जुडिकेटा का प्रवचन लिख दिया। इसलिए हम कहते हैं—अगर आपकी किसी भी फाइल में नागर साहब का कागज लगा है तो ध्यान से देख लीजिएगा। यहां तो सूचना का मामला है, अगर जमीन का मामला हुआ तो लेने के देने पड़ जाएंगे।
UDA के सचिव से लेकर सूचना आयोग तक पूरे कुएं में भांग मिली हुई है। पद के घमंड में बैठे इन मोटी तनख्वाह वाले अधिकारियों ने ऐसा ही खेल दोहराया तो तय है— सेल्फ गोल होगा!!! पुरखे कह गए हैं— गुमान किस बात का, जनाजे उठाने वालों का भी एक दिन जनाजा जरूर उठता है।


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By desk 24newsupdate

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