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24 न्यूज अपडेट, सागवाड़ा (जयदीप जोशी)। कान्हड़दास धाम, बड़ा रामद्वारा में चातुर्मास प्रवचन में रामस्नेही संत तिलकराम ने कहा कि “धर्म एक है, जातियां भिन्न हो सकती हैं। भक्ति से बढ़कर कोई धर्म नहीं है।” उन्होंने कहा कि यदि घर में प्रेम, सेवा, स्नेह हो तो वही स्वर्ग बन सकता है। संत वचन: “जो सकारात्मक सोचता है, उसे कोई ज़हर नहीं मार सकता; और जो नकारात्मक सोचता है, उसे कोई दवा नहीं बचा सकती।”

