
24 News Update उदयपुर l महर्षि गौतम भवन,सेक्टर 4 में श्री पुष्कर दास जी महाराज के द्वारा चल रही संगीतमय भागवत कथा में कहा कथा एक गंगा की तरह हे इसमें जो डुबकी लगाएंगे वो भव से पार हो जाएगा l प्रभु की कृपा होती हे तभी कोई वक्ता व्यासपीठ से बोल पाता है l कृष्ण की वाणी,संतों की वाणी वायुमंडल में घूमती हे तभी व्यासपीठ से शब्द निकलते है l व्यासपीठ सभी की मनोकामना पूरी करती हे क्यों कि वह व्यास जी की गद्दी है l मन में श्रद्धा हो तो ग्रंथों से हमे शांति मिलती हैं l सत्संग में मन की धुलाई होती हे l हर व्यक्ति मन से बंधा हुआ हे l राजा दशरथ ने जवानी में श्रवण को तीर मारा अंत समय में उनके सामने भी एक भी बेटा मौजूद नहीं था l कर्म किसी को नहीं छोड़ता इसलिए कर्म सावधानी से करने चाहिए l महाराज ने कहा कथा एक जन कल्याण का मार्ग हे यह महंगा नहीं होना चाहिए l यशोदा,नंदबाबा के घर जब परमानंद आया तो उन्होंने सब कुछ लुटाया l क्यों की उनके घर सच्चिदानंद स्वरूप खुद ईश्वर ने जन्म लिया l परमात्मा आनंद स्वरूप है l हमारे घट में भी आनंद स्वरूप ईश्वर का जन्म होना चाहिए l कथा को आगे बढ़ाते हुए कहा यशोदा मैया ने महंगे हार,हीरे मोती लुटाए क्यों कि ईश्वर के सामने ये इनकी कोई कीमत नहीं हे l सत्संग में कुछ भी मत करो तो भी फायदा हे ओर कुसंगत में कुछ भी ना करो तो भी नुकसान है l कृष्ण आनंद स्वरूप है जो भक्तो को गोकुल में जगाता है l कृष्ण ने गोपियों के कोमल मन रूपी मक्खन को चुराया है दूध के मक्खन को नहीं l कृष्ण ने मटकियां फोड़ी थी जिस जीवात्मा के सिर पर अहंकार रूपी पाप की मटकी फोड़ी थी l चीरहरण लीला में साड़ी,कपड़े का चीर नहीं बल्कि वासना का चीर हरण किया l महाराज ने गोवर्धन की व्याख्या करते हुए कहा गो का मतलब इंद्रियां वर्धन का मतलब बढ़ना l इसी तरह हमारी श्रद्धा दिनों दिन बढ़े वही “गोवर्धन लीला” है l अंत में सभी भक्तों ने सामूहिक भगवान गिरिराज धरण को 56 भोग धारण करवाया l महिलाओं ने गोवर्धन जी की परिक्रमा की और हाथ खड़े करके गिरिराज धरण के जयकारे लगाए l गुरुवार को कथा में जिनेंद्र शास्त्री, नरेश शर्मा,कपिल पालीवाल,किशन सिंह राठौड़,बसंत चौबीसा,परमवीर सिंह राव आदि उपस्थित रहे l
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