उदयपुर। ग्रामीण भारत की जीवनरेखा मानी जाने वाली मनरेगा योजना को समाप्त करने की कथित मंशा के खिलाफ कांग्रेस ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी एवं प्रदेश कांग्रेस कमेटी के निर्देशानुसार “मनरेगा बचाओ महासंग्राम जन आंदोलन” के तहत उदयपुर देहात एवं उदयपुर शहर जिला कांग्रेस कमेटियों ने संयुक्त रूप से सोमवार को एक दिवसीय मौन उपवास रखा।
यह मौन उपवास दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक कोर्ट चौराहा स्थित डॉ. बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा स्थल पर आयोजित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत बाबा साहेब की प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ हुई, इसके बाद महात्मा गांधी और डॉ. अंबेडकर को स्मरण करते हुए कांग्रेसजनों ने मौन रहकर विरोध प्रकट किया।
ग्रामीण मजदूरों की आजीविका पर हमला
मौन उपवास के उपरांत मीडिया से बातचीत करते हुए उदयपुर देहात जिला कांग्रेस अध्यक्ष रघुवीर सिंह मीणा ने कहा कि मनरेगा योजना को कमजोर या समाप्त करने का प्रयास देश के गरीब, मजदूर और ग्रामीण परिवारों की आजीविका पर सीधा हमला है। उन्होंने कहा कि यह योजना केवल रोजगार नहीं, बल्कि ग्रामीण गरीबों के सम्मान और अधिकार की गारंटी है।
मीणा ने कहा कि कांग्रेस संसदीय दल की नेता श्रीमती सोनिया गांधी एवं पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने मनरेगा के माध्यम से गरीब मजदूरों को स्वाभिमान के साथ जीवन जीने का अधिकार दिया था, लेकिन वर्तमान केंद्र सरकार इस अधिकार को छीनने पर आमादा है।
ग्राम पंचायत स्तर तक चलेगा आंदोलन
उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी हमेशा गरीब, मजदूर और वंचित वर्ग के अधिकारों की लड़ाई लड़ती रही है। मनरेगा को लेकर केंद्र सरकार के फैसले के खिलाफ यह आंदोलन केवल शहरों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे ग्राम पंचायत स्तर तक ले जाकर गरीब मजदूरों, भूमिहीन किसानों और ग्रामीण परिवारों की आवाज को मजबूती से उठाया जाएगा।
वरिष्ठ नेताओं की रही मौजूदगी
मौन उपवास में उदयपुर शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष फतह सिंह राठौड़, पीसीसी उपाध्यक्ष सुरेश श्रीमाली, लोकसभा प्रत्याशी ताराचंद मीणा, पूर्व विधायक त्रिलोक पूर्बिया, पीसीसी महासचिव गोपाल शर्मा, पीसीसी सचिव दिनेश श्रीमाली, आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर बंसीलाल मीणा, सहित अनेक वरिष्ठ नेता, जनप्रतिनिधि, ब्लॉक अध्यक्ष, प्रधान एवं कांग्रेस कार्यकर्ता बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में कांग्रेस नेताओं ने एक स्वर में मनरेगा को बचाने और ग्रामीण रोजगार की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया।

