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अरावली और मनरेगा के मुद्दे पर कांग्रेस का जन-जागरण, उदयपुर में सैकड़ों कार्यकर्ता सड़कों पर उतरे

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24 News Update उदयपुर। अरावली पर्वतमाला के संरक्षण और मनरेगा को कमजोर किए जाने के विरोध में शुक्रवार को उदयपुर शहर व देहात कांग्रेस की ओर से संयुक्त जन-जागरण रैली आयोजित की गई। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के आह्वान पर 27 से 31 दिसंबर तक चलने वाले इस अभियान के तहत निकाली गई रैली में बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि और कार्यकर्ता शामिल हुए।
रैली नगर निगम टाउन हॉल स्थित शहीद स्मारक से सुबह 11.30 बजे प्रारंभ होकर सूरजपोल, अश्विनी बाजार से गुजरते हुए चेतक स्थित मोहता पार्क पहुंची, जहां सभा का आयोजन हुआ। इस दौरान अरावली पर्वतमाला को बचाने और मनरेगा के अस्तित्व की रक्षा के समर्थन में जोरदार नारेबाजी की गई।
सभा को संबोधित करते हुए उदयपुर देहात जिला कांग्रेस अध्यक्ष रघुवीर सिंह मीणा ने कहा कि अरावली केवल पहाड़ों की श्रृंखला नहीं, बल्कि देश के करोड़ों लोगों के जीवन, जल और पर्यावरण की रक्षा करने वाला प्राकृतिक कवच है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा शासन में अरावली पर अवैध खनन और माफिया गतिविधियां सरकारी संरक्षण में फल-फूल रही हैं, जिससे प्रदेश की कानून व्यवस्था और प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
मीणा ने कहा कि अरावली पर हो रहा हमला दरअसल आमजन के जीवन पर सीधा हमला है और इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार से सुप्रीम कोर्ट में अरावली संरक्षण के पक्ष में प्रभावी पैरवी करने की मांग भी की।
मनरेगा के मुद्दे पर बोलते हुए रघुवीर सिंह मीणा ने कहा कि रोजगार गारंटी कानून को कमजोर करना देश के करोड़ों श्रमिक परिवारों के भविष्य के साथ अन्याय है। उन्होंने आरोप लगाया कि सुधार के नाम पर मनरेगा को खत्म करने की साजिश रची जा रही है और राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नाम को योजनाओं से हटाने की कोशिश मोदी सरकार की कुंठित मानसिकता को दर्शाती है। कांग्रेस सड़क से लेकर संसद तक इस फैसले के खिलाफ संघर्ष करेगी।
उदयपुर शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष फतह सिंह राठौड़ ने अपने संबोधन में कहा कि अरावली की चोटियां केवल भौगोलिक संरचना नहीं हैं, बल्कि हमारी सभ्यता, आस्था और आने वाली पीढ़ियों के अस्तित्व की आधारशिला हैं। अरावली ने सदियों से जलस्रोतों की रक्षा की है और रेगिस्तान के विस्तार को रोका है।
उन्होंने कहा कि यह संघर्ष किसी एक दिन या एक संगठन का नहीं, बल्कि सत्ता के अहंकार और प्रकृति के शोषण के खिलाफ जन-चेतना का आंदोलन है, जो तब तक जारी रहेगा जब तक अरावली की हर चोटी सुरक्षित नहीं हो जाती।
मनरेगा पर नए प्रावधानों को लेकर राठौड़ ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा राज्यों पर 40 प्रतिशत बजट वहन करने का दबाव डालना गरीब राज्यों के लिए असंभव है। जिन राज्यों में गरीबी अधिक है, उनके पास पहले से ही सीमित संसाधन हैं। ऐसे में यह कदम सुनियोजित तरीके से मनरेगा को खत्म करने की दिशा में बढ़ाया गया कदम है, जो मोदी सरकार की संकीर्ण सोच को उजागर करता है।
जन-जागरण रैली और सभा में प्रमुख रूप से उदयपुर देहात जिला कांग्रेस अध्यक्ष रघुवीर सिंह मीणा, उदयपुर शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष फतह सिंह राठौड़, पूर्व विधायक त्रिलोक पूर्बिया, प्रीति शक्तावत, पीसीसी उपाध्यक्ष सुरेश श्रीमाली, पीसीसी महासचिव लाल सिंह झाला, पंकज कुमार शर्मा, गोपाल शर्मा, पूर्व मंत्री डॉ. मांगी लाल गरासिया, जगदीश राज श्रीमाली, पीसीसी सचिव दिनेश श्रीमाली, विधायक प्रत्याशी विवेक कटारा, पूर्व विधायक सज्जन कटारा, पीसीसी सदस्य राम लाल गायरी, प्रो. दरियाव सिंह चुंडावत, गोपाल सिंह चौहान, दलपत सिंह चुंडावत, मोहम्मद अय्यूब, जिला संगठन महासचिव गजेंद्र कोठारी, पूर्व उप जिला प्रमुख लक्ष्मी नारायण पंड्या, प्रवक्ता डॉ. संजीव राजपुरोहित, शहर प्रवक्ता पंकज पालीवाल, शिवशंकर मेनारिया, डॉ. कौशल नागदा, राजीव सुहालका, खूबी लाल मेनारिया, दिनेश दवे, आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय को-ऑर्डिनेटर बंसी लाल मीणा, श्याम लाल चौधरी, मथुरेश नागदा, ब्लॉक अध्यक्ष राम सिंह चदाणा, अजय सिंह, सोमेश्वर मीणा, पूर्व सरपंच रूप लाल सालवी, महिला कांग्रेस की नजमा मेवाफरोश, सीमा पंचोली, डॉ. दिव्यानी कटारा, अमर सिंह झाला, हरि सिंह झाला, झाड़ोल प्रधान राधा देवी परमार, पूर्व प्रधान सदन देवी, ओम प्रकाश गमेती, जय प्रकाश निमावत, पूर्व पार्षद शंकर चंदेल, हिदायतुल्ला, लक्ष्मी लाल सोनी, दिनेश औदिच्य, राजेश मेनारिया, मोहम्मद रईस खान, फारुख कुरैशी, गोपाल सरपटा, रतन लाल पूर्बिया, दिनेश पानेरी, चंद्रवीर गुर्जर, शिव लाल गुर्जर, सचिन गुर्जर, माधव लाल अहीर, मोहम्मद शाहिद, सुरेश सोलंकी, मयंक खमेसरा, तीरथ सिंह खरेलिया, विष्णु पटेल, गणेश लाल शर्मा, कमल चौधरी, जीतेश खटीक, रवि भावा सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे।

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