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सांसद का था मामला, पुलिस कांस्टेबल की ओर से हुई एफआईआर, आम जनता को भी मिले ऐसी सुविधा?

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24 News update उदयपुर। सांसद डॉ. मन्नालाल रावत को गिरफ्तार बताने वाली फर्जी पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल करने के मामले में साइबर सेल के कांस्टेबल की ओर से प्रकरण दर्ज कराया गया और आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया। झाड़ोल पुलिस ने आरोपी करण कटारा को गिरफ्तार किया, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि अगर पुलिस चाहे तो अपनी ओर से साइबर अपराध का मामला दर्ज कर कार्रवाई कर सकती है।
घटनाक्रम इसलिए चर्चा में है क्योंकि आम जनता को ऐसी सुविधा उपलब्ध आम तौर पर है ही नहीं। जनता जिसे चुनती है, उस जन प्रतिनिधि के कानूनी हितों की रक्षा के लिए यदि पुलिस खुद पहल कर सकती है, जांच कर सकती है और आरोपी को गिरफ्तार कर सकती है, तो आम नागरिक क्यों स्वयं की सुरक्षा के लिए ऐसा अधिकार नहीं पा सकते?

व्यापक जनहित क संदर्भ में देखें तो आम आदमी को भी अधिकार होना चाहिए कि वो पुलिस के पास जाए और किसी भी प्रकार के साइबर अपराध होने पर पुलिस की ओर से खुद ही मुकदमा दर्ज करके संबंधित को गिरफतार किया जाए।

जानकारी के अनुसार, यह मामला डूंगरपुर में हुई दिशा बैठक के दौरान बांसवाड़ा सांसद राजकुमार रोत और उदयपुर सांसद डॉ. मन्नालाल रावत के बीच हुई कहासुनी से उत्पन्न विवाद का नतीजा था। इसके बाद एक युवक ने सोशल मीडिया पर डॉ. रावत के गिरफ्तार होने की झूठी सूचना फैलाते हुए एक फोटो वायरल कर दी। साइबर सेल के कांस्टेबल रमेश कुमार ने इस फर्जी पोस्ट के आधार पर तुरंत प्रकरण दर्ज कराया। बीएपी के कुछ कार्यकर्ता सोशल मीडिया पर सांसद के खिलाफ आपत्तिजनक पोस्ट कर रहे थे, जिस पर भी पुलिस निगरानी रख रही थी। गोगुंदा थानाधिकारी श्यामसिंह चारण इस मामले की आगे की जांच कर रहे हैं।
जानकारों का कहना है कि डिजिटल दुनिया में नागरिकों की सुरक्षा और साइबर अपराध की रोकथाम दोनों के लिए समान व्यवस्था होनी चाहिए। यदि सांसदों या नेताओं के लिए पुलिस किसी भी स्तर पर फिर चाहे सूचना पहले उसे मिली हो तब भी स्वतः पहल कर सकती है, तो आम नागरिक को भी अपने खिलाफ या दूसरों के खिलाफ साइबर अपराध में त्वरित कार्रवाई करवा सकने का अधिकार मिलना ही चाहिए ।

इस मामले में खबर प्रसारित होने के बाद एक पक्ष यह भी आया है कि पुलिस परिस्थितियों के अनुसार एक्ट करती है। अपनी कानूनी शक्तियों का प्रयोग करती है। सांसद का मामला व्यापक जनहित से जुड़ा हुआ था, ऐसे में उसने उसी प्रकार के त्वरित निर्णय किया। किसी भी आम व्यक्ति केे मामले में मामले दर्ज नहीं करने को लेकर होने वाली किसी भी चर्चा को इस मामले से इतर रखकर ही देखा जाना चाहिए।

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